
ब्रिटेन की नई रक्षा योजना: 15 अरब पाउंड अतिरिक्त, ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों पर केंद्रित
प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने इस्तीफे से पहले चार वर्षों में लगभग 300 अरब पाउंड के निवेश की घोषणा की, जिसमें पारंपरिक युद्धपोतों की जगह हाइब्रिड नौसेना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्राथमिकता दी गई है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने मंगलवार को दीर्घकालिक रक्षा निवेश योजना (डीआईपी) प्रस्तुत की, जिसके तहत अगले चार वर्षों में रक्षा बजट में 15 अरब पाउंड की अतिरिक्त वृद्धि की जाएगी। इससे कुल व्यय लगभग 300 अरब पाउंड तक पहुंच जाएगा और 2029 तक वार्षिक रक्षा खर्च 80 अरब पाउंड के स्तर पर होगा। योजना का एक तिहाई हिस्सा ड्रोन, स्वायत्त हथियार प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर केंद्रित है, जबकि पारंपरिक विध्वंसक युद्धपोतों के स्थान पर मानवरहित प्रणालियों को नियंत्रित करने वाली ‘हाइब्रिड’ नौसेना बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
ब्रिटिश सरकार के अनुसार, यह निवेश यूक्रेन और मध्य पूर्व में उभरे युद्ध के नए स्वरूपों से सीख लेते हुए सेना को भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार करेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया कि इसके लिए सड़क और ऊर्जा से जुड़ी कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को स्थगित किया जाएगा। उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के महासचिव मार्क रूटे ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे सामूहिक सुरक्षा की दिशा में ‘महत्वपूर्ण कदम’ बताया। वहीं, ब्रिटेन की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी और लिबरल डेमोक्रेट्स ने योजना को ‘बहुत कम और बहुत देर से’ लाया गया प्रयास करार दिया।
सैन्य विशेषज्ञों और पूर्व रक्षा मंत्री जॉन हीली के अनुसार, सेना को 28 अरब पाउंड की अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता थी, जबकि सरकार ने केवल 15 अरब पाउंड की व्यवस्था की है। हीली ने इसी असंतोष के चलते जून में इस्तीफा दे दिया था। ब्रिटिश खुफिया आकलन के अनुसार, रूस 2030 तक किसी नाटो सदस्य पर हमला कर सकता है, ऐसे में योजना की समयसीमा और आकार पर प्रश्न उठ रहे हैं। योजना के तहत रक्षा व्यय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2.7 प्रतिशत तक पहुंचेगा, जो नाटो के 2035 तक 3.5 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी कम है, हालांकि व्यापक सुरक्षा खर्च जोड़कर इसे 4.2 प्रतिशत बताया जा रहा है।
यह घोषणा स्टारमर के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे की पृष्ठभूमि में हुई, जिन्होंने लेबर पार्टी के सांसदों का समर्थन खोने के बाद पद छोड़ने की घोषणा की है। उनके संभावित उत्तराधिकारी एंडी बर्नहैम जुलाई के मध्य में सत्ता संभाल सकते हैं। स्टारमर ने इसे अपनी विरासत बताते हुए कहा कि भावी सरकार इसी मंच पर आगे बढ़ सकती है। योजना को 7-8 जुलाई को अंकारा में होने वाली नाटो शिखर बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां सदस्य देशों के रक्षा व्यय लक्ष्यों पर चर्चा होगी।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| चीनी प्रेस | 0.00 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.30 | aligned |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
Russia denounces the British rearmament as a direct threat to regional security, highlighting London's inability to maintain a traditional fleet.
It builds a hierarchy of threats, linking the technological choice to an aggressive NATO agenda, making a Russian response seem necessary.
China observes the British rearmament with detachment, assessing technological and commercial opportunities for its companies.
An analytical and detached tone is adopted, reducing the issue to an economic-technological calculation, avoiding geopolitical judgments.
The UK rearms with an innovative strategy, but doubts about costs and financial sustainability remain.
A balanced approach is used, acknowledging technological merits but immediately introducing skepticism about funding, creating a 'yes, but' narrative.
Europe takes note of the British choice, placing it in the broader debate on common defense and NATO cooperation.
The British decision is universalized, presented as a piece of a continental trend, smoothing over national specificities.
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