
ईरान पर 13वीं रात भी अमेरिकी हमले, हार्मोज जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी का असर
व्यावसायिक जहाजरानी को सुरक्षित रखने के नाम पर अमेरिका लगातार हमले कर रहा है, जबकि ईरान ने भी खाड़ी देशों पर पलटवार किया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।
अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने शुक्रवार तड़के पुष्टि की कि ईरान में सैन्य ठिकानों पर लगातार तेरहवीं रात भी हवाई हमले किए गए। सेंटकॉम के बयान के मुताबिक, ये हमले ‘ईरान को जवाबदेह ठहराने और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा व्यावसायिक जहाजरानी को उत्पन्न खतरों को कम करने’ के उद्देश्य से शुरू हुए। हमलों का दायरा दक्षिणी इलाकों से बढ़ाकर पश्चिमी और मध्य ईरान तक कर दिया गया है। इसी के साथ, सेंटकॉम ने नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू करते हुए नौ दिनों में 12 व्यावसायिक जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर किया और एक को निष्क्रिय कर दिया, ताकि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जा सके।
अमेरिकी पक्ष की स्थिति स्पष्ट है: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान अभी युद्धविराम के लिए तैयार नहीं है और उसे ‘और इसी तरह के हमलों की जरूरत है।’ विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार, ‘ईरान ने यह नहीं दिखाया कि वह किसी ऐसे समझौते पर टिक सकता है जिसका वह पालन कर सके,’ और हर गुजरती रात के साथ ईरान को चुकानी पड़ने वाली कीमत बढ़ती जाएगी। रुबियो ने तीसरे देशों के जरिए रोजाना ईरानी विदेश मंत्री के संदेश मिलने का दावा भी किया, लेकिन कहा कि ईरान हर समझौते को तोड़ता या बदलता रहा है। अमेरिकी सेना का कहना है कि उसका अभियान हार्मोज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले गैर-ईरानी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
ईरानी मीडिया और सरकारी सूत्रों ने देश के विभिन्न हिस्सों—अहवाज, बंदर अब्बास, क़ेशम द्वीप और बुशहर—में विस्फोटों की पुष्टि की, जिनमें कुछ स्थानों पर टॉमहॉक मिसाइलों को रोकने का दावा भी शामिल है। खुज़ेस्तान प्रांत के एक अधिकारी ने बताया कि शलामचेह सीमा चौकी पर हुए हमले में दो लोगों की मौत और 11 घायल हुए। ईरानी संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी दी कि यदि उसके नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया तो क्षेत्रीय तेल, गैस और बिजली प्रतिष्ठानों पर करारा जवाब दिया जाएगा और हार्मोज से तेल निर्यात रोकने की क्षमता रखता है। इस बीच, जॉर्डन, बहरीन और कुवैत ने अपने यहाँ ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी, जबकि ईरान समर्थित हूती बलों ने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हमलों की जिम्मेदारी ली, जिसे उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी करार दिया।
वैश्विक स्तर पर इस टकराव का असर तेल बाजार पर पड़ा है, जहाँ कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गई हैं। हार्मोज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के तेल व्यापार का अहम मार्ग है, वहाँ जहाजों की आवाजाही संघर्ष-पूर्व स्तरों की तुलना में घट गई है। यह तनाव उस समय गहराया है जब पूर्व में हुए युद्धविराम समझौते टूट चुके हैं और लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व में तैनात हैं। हालिया घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि फिलहाल किसी पक्ष की ओर से तत्काल रणनीतिक वार्ता की संभावना कम है, जबकि जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाइयाँ जारी रहने की आशंका है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.40 | critical |
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.20 | neutral |
The United States is compelled to strike Iran nightly to uphold freedom of navigation and hold the regime accountable for its threats.
By framing the strikes as a measured response to Iranian aggression and quoting official warnings about rising costs, the narrative constructs the campaign as a rational, incremental pressure tactic rather than an open-ended escalation.
The reports omit details of explosions reported inside Iran and any civilian casualties.
The US continues its unilateral strikes, ignoring the risk of regional conflagration and the need for a diplomatic solution.
By quoting CENTCOM's own language without endorsement and emphasizing the consecutive night count, the narrative subtly questions the effectiveness and justification of the campaign.
The reports omit specifics of the naval blockade and its impact on shipping.
The US-led campaign tightens the noose around Iran, disrupting key shipping lanes and keeping the entire Gulf on edge.
By detailing the blockade's effects (ships redirected, disabled) and using imagery of a tightening noose, the narrative highlights the tangible consequences for regional trade and security.
The reports omit the US official warnings that the price for Iran will increase, focusing instead on the immediate regional disruption.
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