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अमेरिका-ईरान शांति समझौते से बाजारों में राहत, रुपया और शेयर सूचकांकों में उछाल

रविवार को घोषित अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद सोमवार को ब्राजील, इंडोनेशिया और भारत के बाजारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई, जबकि मंगलवार को रुपये और क्षेत्रीय मुद्राओं में मजबूती जारी रही।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच गहन वार्ता के बाद शांति समझौता हो गया है, जिसके तहत दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई। इस ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे को काफी हद तक कम कर दिया, जिसका असर सोमवार को दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर स्पष्ट दिखा। ब्राजील में डॉलर के मुकाबले रियाल में मामूली 0.09 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई, लेकिन इबोवेस्पा सूचकांक 0.42 प्रतिशत गिरकर 1,70,415 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, एशियाई बाजारों में जोखिम लेने की भूख लौट आई: इंडोनेशिया का आईएचएसजी सूचकांक 3 प्रतिशत उछलकर 6,188 पर पहुंच गया और रुपिया 0.56 प्रतिशत मजबूत होकर 17,760 प्रति डॉलर पर आ गया। भारत में भी रुपया 40 पैसे की जोरदार तेजी के साथ 94.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पांच सप्ताह का उच्चतम स्तर है।

मंगलवार को यह सकारात्मक रुख और मजबूत हुआ। भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 5 पैसे चढ़कर 94.53 पर पहुंच गया, जबकि इंडोनेशियाई रुपिया 17,704 के स्तर पर खुला। क्षेत्रीय मुद्राओं में मिला-जुला रुख रहा, लेकिन जापानी येन, दक्षिण कोरियाई वॉन और भारतीय रुपया जैसी प्रमुख मुद्राओं ने बढ़त दर्ज की। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने अहम भूमिका निभाई। ब्रेंट क्रूड 6 प्रतिशत से अधिक लुढ़ककर 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया, जो भारत जैसे 90 प्रतिशत तेल आयात करने वाले देश के लिए अनुकूल परिस्थिति है। इंडोनेशिया के बाजार विश्लेषक इब्राहिम अस्सुआबी ने कहा कि रुपिया और आईएचएसजी में उछाल अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से प्रेरित है, लेकिन यह स्थायी सुधार है या केवल एक अस्थायी विराम, इस पर अभी संदेह बरकरार है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए इस समझौते ने पश्चिम एशिया में व्याप्त तनाव को अचानक शांत कर दिया, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर छाया संकट दूर हुआ। भारतीय विदेशी मुद्रा सलाहकार केएन डे के अनुसार, मौजूदा बाजार स्थितियों और भारतीय रिज़र्व बैंक की विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने की नई नीतियों को देखते हुए रुपया दिसंबर 2026 तक 92.75 से 94.20 के दायरे में कारोबार कर सकता है। इंडोनेशिया में आईएचएसजी लगातार चौथे दिन चढ़ा और सोमवार को 4 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाकर 6,253 तक पहुंच गया। अर्थशास्त्री नोवल आदिब ने कहा कि आंतरिक और बाहरी दोनों कारक अब बाजार को सहारा दे रहे हैं, और शांति समझौते ने मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका को कम कर दिया है।

हालांकि, विश्लेषक आगाह करते हैं कि यह राहत स्थायी होगी या नहीं, यह समझौते के क्रियान्वयन और व्यापक आर्थिक जोखिमों पर निर्भर करेगा। भारत में बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड दो महीने के निचले स्तर 6.83 प्रतिशत के आसपास रही, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। फिर भी, इंडोनेशियाई बाजार पर नजर रखने वालों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं और मौजूदा तेजी एक सांस लेने का अवसर भर हो सकती है। फिलहाल, एशियाई बाजारों ने शांति की ओर बढ़ते कदमों का स्वागत किया है, लेकिन आगे की राह सतर्क आशावाद की मांग करती है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

24%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa latinoamericanaStampa sud-est asiatica
Stampa latinoamericana/ mercato
scetticismopragmatismo

अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को कम किया, लेकिन ब्राज़ील एशियाई मुद्राओं की तेजी में शामिल नहीं हुआ। डॉलर रियाल के मुकाबले हल्का चढ़ा, जबकि बोवेस्पा सूचकांक गिर गया, जो देश की पिछड़ने की स्थिति को रेखांकित करता है।

Stampa sud-est asiatica
trionfoscetticismo

वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौते ने एशियाई बाजारों में आशावाद की लहर दौड़ा दी, इंडोनेशियाई रुपिया और जकार्ता स्टॉक इंडेक्स में जोरदार उछाल आया। हालांकि, विश्लेषक आगाह करते हैं कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह स्थायी सुधार है या अब भी नाजुक माहौल में केवल अस्थायी राहत।

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मंगलवार, 16 जून 2026

अमेरिका-ईरान शांति समझौते से बाजारों में राहत, रुपया और शेयर सूचकांकों में उछाल

रविवार को घोषित अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद सोमवार को ब्राजील, इंडोनेशिया और भारत के बाजारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई, जबकि मंगलवार को रुपये और क्षेत्रीय मुद्राओं में मजबूती जारी रही।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच गहन वार्ता के बाद शांति समझौता हो गया है, जिसके तहत दोनों देशों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई। इस ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहे खतरे को काफी हद तक कम कर दिया, जिसका असर सोमवार को दुनिया भर के वित्तीय बाजारों पर स्पष्ट दिखा। ब्राजील में डॉलर के मुकाबले रियाल में मामूली 0.09 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई, लेकिन इबोवेस्पा सूचकांक 0.42 प्रतिशत गिरकर 1,70,415 पर बंद हुआ। इसके विपरीत, एशियाई बाजारों में जोखिम लेने की भूख लौट आई: इंडोनेशिया का आईएचएसजी सूचकांक 3 प्रतिशत उछलकर 6,188 पर पहुंच गया और रुपिया 0.56 प्रतिशत मजबूत होकर 17,760 प्रति डॉलर पर आ गया। भारत में भी रुपया 40 पैसे की जोरदार तेजी के साथ 94.71 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पांच सप्ताह का उच्चतम स्तर है।

मंगलवार को यह सकारात्मक रुख और मजबूत हुआ। भारतीय रुपया शुरुआती कारोबार में 5 पैसे चढ़कर 94.53 पर पहुंच गया, जबकि इंडोनेशियाई रुपिया 17,704 के स्तर पर खुला। क्षेत्रीय मुद्राओं में मिला-जुला रुख रहा, लेकिन जापानी येन, दक्षिण कोरियाई वॉन और भारतीय रुपया जैसी प्रमुख मुद्राओं ने बढ़त दर्ज की। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तेजी के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट ने अहम भूमिका निभाई। ब्रेंट क्रूड 6 प्रतिशत से अधिक लुढ़ककर 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गया, जो भारत जैसे 90 प्रतिशत तेल आयात करने वाले देश के लिए अनुकूल परिस्थिति है। इंडोनेशिया के बाजार विश्लेषक इब्राहिम अस्सुआबी ने कहा कि रुपिया और आईएचएसजी में उछाल अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद से प्रेरित है, लेकिन यह स्थायी सुधार है या केवल एक अस्थायी विराम, इस पर अभी संदेह बरकरार है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए इस समझौते ने पश्चिम एशिया में व्याप्त तनाव को अचानक शांत कर दिया, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर छाया संकट दूर हुआ। भारतीय विदेशी मुद्रा सलाहकार केएन डे के अनुसार, मौजूदा बाजार स्थितियों और भारतीय रिज़र्व बैंक की विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने की नई नीतियों को देखते हुए रुपया दिसंबर 2026 तक 92.75 से 94.20 के दायरे में कारोबार कर सकता है। इंडोनेशिया में आईएचएसजी लगातार चौथे दिन चढ़ा और सोमवार को 4 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाकर 6,253 तक पहुंच गया। अर्थशास्त्री नोवल आदिब ने कहा कि आंतरिक और बाहरी दोनों कारक अब बाजार को सहारा दे रहे हैं, और शांति समझौते ने मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका को कम कर दिया है।

हालांकि, विश्लेषक आगाह करते हैं कि यह राहत स्थायी होगी या नहीं, यह समझौते के क्रियान्वयन और व्यापक आर्थिक जोखिमों पर निर्भर करेगा। भारत में बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड दो महीने के निचले स्तर 6.83 प्रतिशत के आसपास रही, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। फिर भी, इंडोनेशियाई बाजार पर नजर रखने वालों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं और मौजूदा तेजी एक सांस लेने का अवसर भर हो सकती है। फिलहाल, एशियाई बाजारों ने शांति की ओर बढ़ते कदमों का स्वागत किया है, लेकिन आगे की राह सतर्क आशावाद की मांग करती है।

स्रोतों में मतभेद

भूराजनीति · 8 स्रोत · 2 भाषाएँ

24%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक86%
निंदक14%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa latinoamericanaStampa sud-est asiatica
Stampa latinoamericana/ mercato
scetticismopragmatismo

अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को कम किया, लेकिन ब्राज़ील एशियाई मुद्राओं की तेजी में शामिल नहीं हुआ। डॉलर रियाल के मुकाबले हल्का चढ़ा, जबकि बोवेस्पा सूचकांक गिर गया, जो देश की पिछड़ने की स्थिति को रेखांकित करता है।

Stampa sud-est asiatica
trionfoscetticismo

वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौते ने एशियाई बाजारों में आशावाद की लहर दौड़ा दी, इंडोनेशियाई रुपिया और जकार्ता स्टॉक इंडेक्स में जोरदार उछाल आया। हालांकि, विश्लेषक आगाह करते हैं कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह स्थायी सुधार है या अब भी नाजुक माहौल में केवल अस्थायी राहत।

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