
होर्मुज संकट के बीच सोने में उथल-पुथल, फेड बैठक पर टिकी निवेशकों की निगाह
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और फेडरल रिजर्व की नीति पर अनिश्चितता के कारण वैश्विक सोने के बाजार में उथल-पुथल जारी है, जबकि एशियाई निवेशक शांति वार्ताओं पर निगाह लगाए हुए हैं।
वैश्विक सोने के बाजार में इस सप्ताह जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिली। सप्ताह के शुरुआती दिनों में कीमतें लगभग 6% तक लुढ़क गईं और एशियाई कारोबार के दौरान गुरुवार को सोना 4,023 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक गिर गया, जो 2026 का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव और मजबूत अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों के बीच आई। हालांकि, बाद में सोने ने कुछ हद तक वापसी की और शुक्रवार को हाजिर कीमत लगभग 4,210 डॉलर और वायदा 4,234 डॉलर पर बंद हुआ। फिर भी, यह लगातार दूसरी सप्ताहिक गिरावट दर्ज करने की राह पर है।\n\nभू-राजनीतिक मोर्चे पर, ईरानी विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका को तेहरान के साथ टिकाऊ समझौते के लिए सैन्य दबाव के बजाय आर्थिक प्रोत्साहन, जैसे प्रतिबंधों में ढील और युद्धोत्तर निवेश कोष, की पेशकश करनी चाहिए। दूसरी ओर, इंडोनेशिया जैसे एशियाई बाजारों में निवेशक शांति प्रयासों पर करीबी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि तनाव में कमी से स्थानीय मुद्रा में सोने की कीमतों को बढ़ावा मिल सकता है। भारत जैसे प्रमुख स्वर्ण आयातक देशों के लिहाज से भी यह भू-राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मांग और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।\n\nइस बीच, बाजार की निगाहें अगले सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी हैं। अमेरिका में लगातार ऊंची मुद्रास्फीति ने इस संदेह को बल दिया है कि कीमतों का दबाव जल्दी खत्म होने वाला नहीं है, जिससे यह उम्मीद बढ़ी है कि फेड ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखेगा या और बढ़ोतरी करेगा। इससे डॉलर को मजबूती मिली है और सोने पर दबाव बना है। कुछ रणनीतिकारों का कहना है कि तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद मुद्रास्फीति बनी रह सकती है, जो सोने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकती है, लेकिन फिलहाल अनिश्चितता का माहौल है।\n\nआगे का रुख काफी हद तक दो कारकों पर निर्भर करेगा: अमेरिका-ईरान तनाव का समाधान और फेड का रुख। यदि होर्मुज मुद्दे पर कूटनीतिक प्रगति होती है और शांति स्थापित होती है, तो सोना और नीचे जा सकता है, जिसके लिए एशियाई बाजारों में 4,058 और 3,929 डॉलर के सपोर्ट स्तर देखे जा रहे हैं। दूसरी ओर, फेड का कोई भी नरम संकेत सोने के लिए तेजी का कारण बन सकता है। दक्षिण एशियाई देशों में, जहां सोने की सांस्कृतिक और आर्थिक मांग अधिक है, घरेलू कीमतें वैश्विक रुझानों और मुद्रा विनिमय दरों के साथ झूलती रहेंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने के बीच सोने के बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखा गया। मजबूत अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े और आगामी फेड बैठक ने धातु की दिशा पर संदेह पैदा कर दिया है। कूटनीतिक वार्ता जारी है, और आर्थिक प्रोत्साहनों को संघर्ष को कम करने के संभावित रास्ते के रूप में देखा जा रहा है।
लगातार मुद्रास्फीति के दबाव के बीच अमेरिकी मौद्रिक नीति की उम्मीदों का पुनर्मूल्यांकन करने के कारण इस सप्ताह सोने की कीमतों में गिरावट आई। धातु ने लगातार दूसरी साप्ताहिक हानि दर्ज की, फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निचले स्तर पर बंद हुआ। बाजार के प्रतिभागी मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र और ब्याज दरों पर इसके प्रभाव को लेकर संशय में हैं।
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