
श्रम कानूनों में वैश्विक हलचल: जर्मनी ने बीमारी की छुट्टी पर कसा शिकंजा, खाड़ी और एशिया में प्रक्रियागत सुधार
जर्मनी में आर्थिक प्रतिस्पर्धा की चिंता के बीच बीमारी की छुट्टी के नियम सख्त किए गए, जबकि यूएई, ईरान और इंडोनेशिया में श्रमिक अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर नए दिशानिर्देश जारी हुए।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मेर्ज़ ने पिछले सप्ताह कामगारों की बीमारी की छुट्टियों पर अंकुश लगाने की योजना की घोषणा की, जिसके तहत अगले वर्ष जनवरी से फ़ोन पर चिकित्सा प्रमाणपत्र प्राप्त करने की सुविधा समाप्त कर दी जाएगी और बीमारी के पहले दिन से ही डॉक्टर से आमने-सामने परामर्श अनिवार्य होगा। बर्लिन स्थित आईजीईएस इंस्टीट्यूट के जनवरी में प्रकाशित शोध के अनुसार, जर्मन कर्मचारी औसतन 19.5 कार्यदिवस प्रतिवर्ष बीमारी की छुट्टी पर रहते हैं, जो 2018 के लगभग 13 दिनों से उल्लेखनीय वृद्धि है। मेर्ज़ ने इस कदम को जर्मन अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मकता बहाल करने से जोड़ते हुए कहा कि लंबी अनुपस्थिति से उत्पन्न नुकसान अब वहन नहीं किया जा सकता। यह पहल स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में व्यापक सुधारों और बजट कटौती के पैकेज का हिस्सा है, जिसे मेर्ज़ के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने मंजूरी दी है।
जर्मन सरकार की इस पहल पर देश के भीतर ही मिली-जुली प्रतिक्रिया है। सत्तारूढ़ गठबंधन का तर्क है कि उदार छुट्टी प्रणाली अनुपस्थिति को बढ़ावा देती है और उत्पादकता को नुकसान पहुँचाती है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे वैध बीमारियों पर कलंक लगेगा और बढ़ती उम्र की आबादी पर आर्थिक समस्याओं का ठीकरा फोड़ा जाएगा। इसके विपरीत, संयुक्त अरब अमीरात में मानव संसाधन और अमीरातीकरण मंत्रालय (एमओएचआरई) ने वर्क परमिट रद्द करने की चार-चरणीय प्रक्रिया को स्पष्ट किया है, जिसमें कर्मचारी के सभी बकाया प्राप्त करने का नियोक्ता का घोषणापत्र अनिवार्य है। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि रोज़गार अनुबंध में कोई भी संशोधन, चाहे वेतन हो या पद, कर्मचारी की स्पष्ट लिखित सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। साथ ही, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए 30 जुलाई तक ऑनलाइन परामर्श जारी है।
ईरान में श्रम कार्यकर्ता मोहम्मद रज़ा फ़र्ज़अलियान ने विभिन्न प्रकार की छुट्टियों और बीमा भुगतान की ज़िम्मेदारियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, वार्षिक सवैतनिक छुट्टी 26 कार्यदिवसों की होती है और इस दौरान वेतन व बीमा अंशदान नियोक्ता देता है, जबकि बीमारी की छुट्टी में सामाजिक सुरक्षा संगठन मुआवज़ा देता है और ऐसी छुट्टी की अवधि या आवृत्ति पर कोई क़ानूनी सीमा नहीं है, बशर्ते चिकित्सकीय प्रमाणीकरण हो। मातृत्व अवकाश 9 महीने का है और इसका भुगतान भी सामाजिक सुरक्षा संगठन करता है। इंडोनेशिया में बीपीजेएस केसहतान के जनसंपर्क प्रमुख रिज़्की अनुग्रह ने बताया कि वेतनभोगी कर्मचारी अपने माता-पिता, सास-ससुर या चौथी संतान को भी स्वास्थ्य बीमा कवरेज में जोड़ सकते हैं, जिसका अतिरिक्त प्रीमियम वेतन से कटौती द्वारा अदा किया जाएगा। योगदान की गणना अधिकतम 1.2 करोड़ रुपिये के मासिक वेतन पर 1 प्रतिशत की दर से होती है।
ये घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर श्रम सुरक्षा उपायों के पुनर्संतुलन की ओर इशारा करते हैं। जर्मनी का कदम चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा की ऊँची लागत और भू-राजनीतिक तनावों के बीच उत्पादकता बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जबकि 2023 में पूरी तरह लागू इलेक्ट्रॉनिक बीमारी प्रमाणपत्र प्रणाली (ईएयू) ने रिकॉर्डिंग में सुधार कर अनुपस्थिति के आँकड़ों को बढ़ा दिया है। यूएई का डिजिटलीकरण और प्रक्रिया सरलीकरण श्रम बाज़ार की दक्षता और अनुपालन बढ़ाने की सरकारी रणनीति का हिस्सा है। ईरान और इंडोनेशिया में मौजूदा क़ानूनी प्रावधानों की व्याख्या कर कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच स्पष्टता लाने का प्रयास किया जा रहा है। अमेरिकी उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो (सीएफ़पीबी) ने भी सैन्य कर्मियों के लिए किरायेदारी संरक्षण की याद दिलाई है, जिसके तहत सक्रिय सेवा के दौरान बेदखली पर 90 दिन की रोक लगाई जा सकती है। जर्मनी का नया नियम जनवरी 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है, जबकि यूएई में परामर्श प्रक्रिया 30 जुलाई को समाप्त होगी और ईरान व इंडोनेशिया में मौजूदा नियम लागू हैं।
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