
जी7 की पारिवारिक तस्वीर में मेलोनी-मोदी की 'इंस्टाग्राम फेमस' टिप्पणी ने फिर जगाई 'मेलोदी' की चर्चा
एवियां-ले-बैं में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान इटली और भारत के प्रधानमंत्रियों के बीच हुए हल्के-फुल्के संवाद ने कूटनीतिक मंच को सोशल मीडिया की गर्मजोशी से जोड़ दिया।
फ्रांस के एवियां-ले-बैं में चल रहे जी7 शिखर सम्मेलन की औपचारिक गंभीरता के बीच एक पल ऐसा आया जिसने वैश्विक नेताओं की पारिवारिक तस्वीर को सुर्खियों का केंद्र बना दिया। जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची जैसे नेता मंच की ओर बढ़ रहे थे, तभी इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक संक्षिप्त लेकिन चर्चित बातचीत हुई। मेलोनी ने हंसते हुए कहा, "हां, यह सच है, हम इंस्टाग्राम पर सबसे मशहूर हैं," और यह टिप्पणी तुरंत वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में आ गई।
यह मजाकिया लम्हा दरअसल पिछले साल शुरू हुए #मेलोदी ट्रेंड का पुनर्जीवन था, जो मेलोनी की भारत यात्रा के दौरान दोनों नेताओं की एक सेल्फी से वायरल हुआ था। 'मेलोनी' और 'मोदी' नामों को जोड़कर बना यह हैशटैग सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत रसायन शास्त्र का प्रतीक बन गया था। जी7 की इस तस्वीर में भारत एक आमंत्रित अतिथि राष्ट्र के रूप में शामिल हुआ, साथ ही ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और कीनिया के राष्ट्रपति विलियम रूटो भी मौजूद रहे। यह उपस्थिति वैश्विक दक्षिण के देशों को जी7 की प्राथमिकताओं में शामिल करने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है, जिसमें भारत की भूमिका सबसे अलग नजर आती है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य से देखें तो यह क्षण महज एक मजाक नहीं था, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में भारत-इटली संबंधों में आए गुणात्मक बदलाव का प्रतीक है। रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सहयोग के नए आयामों के बीच दोनों नेताओं के बीच विकसित हुई सहज मित्रता ने कूटनीतिक संवाद को अधिक मानवीय और सुलभ बना दिया है। यूरोपीय संघ के भीतर इटली की स्थिति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती सक्रियता को जोड़ने वाली यह व्यक्तिगत केमिस्ट्री द्विपक्षीय हितों से कहीं आगे की साझेदारी की संभावना जगाती है।
वैश्विक स्तर पर, जी7 जैसे मंचों पर इस तरह के अनौपचारिक आदान-प्रदान तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं। जहां एक ओर ट्रंप और मैक्रों जैसे नेता पारंपरिक शक्ति संतुलन का प्रतिनिधित्व करते हैं, वहीं मेलोनी और मोदी का 'इंस्टाग्राम फेमस' होने का दावा इस बात की स्वीकारोक्ति है कि आज की कूटनीति में सार्वजनिक धारणा और सोशल मीडिया की पहुंच कितनी मायने रखती है। यह रुझान दक्षिण एशिया के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, क्योंकि भारत जैसे उभरते लोकतंत्र अपनी वैश्विक छवि को गढ़ने में डिजिटल कूटनीति का सहारा ले रहे हैं।
आगे देखें तो यह मैत्रीपूर्ण रसायन शास्त्र भारत को जी7 की भावी कार्यसूची में, विशेषकर जलवायु वित्त, डिजिटल अधोसंरचना और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मुखर करने में, अधिक प्रभावी भूमिका दिला सकता है। मेलोनी और मोदी का यह हल्का-फुल्का पल इस बात का संकेत है कि कूटनीति अब केवल बंद कमरों की बातचीत तक सीमित नहीं है—यह तस्वीरों, हैशटैगों और साझा हंसी के जरिए भी उतनी ही प्रभावी ढंग से संचालित हो सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एवियन में G7 शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मेलोनी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हल्की-फुल्की बातचीत ने सबका ध्यान खींचा। दोनों ने #Melodi ट्रेंड से इंस्टाग्राम पर मशहूर होने का मज़ाक किया, जिससे आधिकारिक पारिवारिक तस्वीर एक व्यक्तिगत गर्मजोशी का पल बन गई।
फ्रांस में G7 सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी और इतालवी प्रधानमंत्री मेलोनी ने अपनी वायरल #Melodi केमिस्ट्री को फिर से जीवंत कर दिया। इंस्टाग्राम की प्रसिद्धि पर उनकी हंसी-मज़ाक शिखर सम्मेलन का सबसे चर्चित मानवीय क्षण बन गया, जिसने औपचारिक कार्यवाही को पीछे छोड़ दिया।
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