
स्पेन की जीत के बाद 2030 विश्व कप में 64 टीमों की गूंज, कोनमेबोल ने फीफा पर बनाया दबाव
2026 विश्व कप के समापन के तुरंत बाद दक्षिण अमेरिकी महासंघ ने शताब्दी संस्करण को 64 देशों के साथ आयोजित करने की वकालत तेज कर दी, हालांकि फीफा ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
स्पेन ने रविवार को डलास में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 2026 विश्व कप का खिताब जीता, लेकिन मैदान पर जश्न खत्म होने से पहले ही 2030 की तस्वीर ने करवट लेनी शुरू कर दी। कोनमेबोल के अध्यक्ष एलेजांद्रो डोमिंगेज ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगला विश्व कप घर पर खेला जाएगा! 2030 में उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे का विश्व कप आ रहा है – 64 टीमों के साथ शताब्दी मनाने का शानदार मौका।” यह बयान फीफा की आधिकारिक घोषणा नहीं थी, बल्कि दक्षिण अमेरिकी महासंघ की ओर से एक बार फिर उस प्रस्ताव को बल देने की कोशिश थी जो पिछले साल पहली बार सामने आया था।
2030 का टूर्नामेंट पहले विश्व कप की शताब्दी का प्रतीक होगा, जो 1930 में उरुग्वे में खेला गया था। इस ऐतिहासिक मौके पर फीफा ने स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को को मुख्य मेजबान बनाया है, जबकि उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे में शुरुआती मैच आयोजित होंगे। मौजूदा 48 टीमों के प्रारूप में इन तीन दक्षिण अमेरिकी देशों को केवल एक-एक उद्घाटन मैच मिलना तय था। डोमिंगेज का 64 टीमों का सपना इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे हर देश को एक पूरा ग्रुप मिल सकता है, जिससे दक्षिण अमेरिका की भागीदारी काफी बढ़ जाएगी।
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो ने 2026 के 48 टीमों वाले प्रारूप को “सफल” बताया और कहा कि सभी प्रस्तावों का अध्ययन किया जाएगा, लेकिन उन्होंने 2030 में विस्तार की पुष्टि नहीं की। यूरोपीय महासंघ (यूईएफए) के अध्यक्ष अलेक्जेंडर सेफेरिन ने इस विचार को “बुरा” करार दिया, जबकि एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) और उत्तर अमेरिकी महासंघ (कॉनकाकाफ) के प्रमुखों ने भी प्रतिस्पर्धी संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। दूसरी ओर, अफ्रीकी और एशियाई महासंघों के भीतर कई छोटे देश इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि इससे उनके विश्व कप में पहुंचने की संभावना बढ़ेगी।
भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह बहस सीधे मायने रखती है। 2026 क्वालीफायर में भारत चौथे दौर तक पहुंचा था, लेकिन सऊदी अरब और इराक से पिछड़ गया। 64 टीमों के प्रारूप में एशिया के कोटे में इजाफा होने की उम्मीद है, जिससे भारत जैसे उभरते फुटबॉल देशों के लिए रास्ता आसान हो सकता है। इंडोनेशियाई मीडिया ने भी इसी उम्मीद को रेखांकित किया है। हालांकि, फीफा के सामने स्टेडियम, यात्रा और कैलेंडर की जटिल चुनौतियां भी हैं – 64 टीमों के साथ मैचों की संख्या 104 से बढ़कर 128 हो जाएगी, और तीन महाद्वीपों में फैले इस आयोजन का लॉजिस्टिक बोझ काफी बढ़ जाएगा।
फिलहाल, 2030 विश्व कप के लिए छह मेजबान देशों – स्पेन, पुर्तगाल, मोरक्को, उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे – की सीधी क्वालीफिकेशन तय है। शेष स्थानों के लिए क्वालीफायर का ढांचा फीफा द्वारा बाद में तय किया जाएगा। कोनमेबोल चाहता है कि दक्षिण अमेरिका की सभी दस टीमें सीधे क्वालीफाई करें, जबकि यूरोपीय महासंघ प्रतिस्पर्धा की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दे रहा है। अगला ठोस कदम फीफा कार्यकारी समिति की बैठक होगी, जहां इस प्रस्ताव की आर्थिक और खेल व्यवहार्यता पर बहस होगी। तब तक, 64 टीमों का विश्व कप एक आकर्षक संभावना बना रहेगा, जिसकी सच्चाई फीफा की मुहर पर टिकी है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
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| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.70 | aligned |
मोरक्को स्वयं को एक तैयार और सक्षम मेजबान के रूप में प्रस्तुत करता है, लेकिन 64 टीमों तक विस्तार पर बहस को एक वैध मुद्दे के रूप में उठाता है।
अरब ब्लॉक बहस को संगठनात्मक प्रक्रिया के एक स्वाभाविक हिस्से के रूप में प्रस्तुत करके असहमति को सामान्य बनाता है, बिना मोरक्को की बोली पर सवाल उठाए।
अरब ब्लॉक उस राजनीतिक समझौते को छोड़ देता है जिसने बहु-महाद्वीपीय प्रारूप को जन्म दिया और तीन महाद्वीपों में वितरण की तार्किक चुनौतियों को, जो लैटिन अमेरिकी कवरेज द्वारा उजागर की गई हैं।
लैटिन अमेरिका शताब्दी में अपनी केंद्रीय भूमिका का जश्न मनाता है, उरुग्वे, अर्जेंटीना और पैराग्वे में उद्घाटन मैचों के ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक मूल्य पर जोर देता है।
लैटिन अमेरिकी ब्लॉक बहु-महाद्वीपीय प्रारूप और राजनीतिक समझौते को वैध बनाने के लिए शताब्दी कथा का उपयोग करता है, इसे एक तार्किक चुनौती के बजाय एक श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत करता है।
लैटिन अमेरिकी ब्लॉक 64 टीमों तक विस्तार पर विवाद और मोरक्को द्वारा मेजबान के रूप में सामना की जाने वाली विशिष्ट चुनौतियों को छोड़ देता है।
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