
यूक्रेन युद्ध में दो मिलियन से अधिक सैन्य हताहत, रूस की क्षति चार लाख से ऊपर: सीएसआईएस अध्ययन
अमेरिकी थिंक टैंक के नए आकलन के अनुसार, चार वर्षों में रूस और यूक्रेन के कुल सैन्य नुकसान 20 लाख के पार, मास्को की भर्ती क्षमता पर दबाव।
अमेरिकी शोध संस्थान सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के एक ताजा अध्ययन के अनुसार, फरवरी 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक 20 लाख से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं, घायल हुए हैं या लापता हैं। इसमें रूस के 14 लाख सैनिक हताहत हुए हैं, जिनमें 4 लाख से 4.5 लाख मौतें शामिल हैं, जबकि यूक्रेन के 5.25 लाख से 6.25 लाख सैनिक हताहत होने का अनुमान है। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी जीसीएचक्यू ने भी मई में कहा था कि रूस के लगभग 5 लाख सैनिक मारे जा चुके हैं। ये आंकड़े दोनों देशों की ओर से आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन पश्चिमी सरकारों और स्वतंत्र विश्लेषकों के अनुमानों पर आधारित हैं।
पश्चिमी सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, भारी नुकसान के बावजूद रूस की क्षेत्रीय बढ़त लगभग रुक गई है। इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (आईएसडब्ल्यू) के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच रूस ने केवल 40.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा किया या घुसपैठ की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 515.84 वर्ग किलोमीटर का मात्र 7.87 प्रतिशत है। सीएसआईएस के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 में रूस ने जितना क्षेत्र हासिल किया, उससे लगभग 400 वर्ग किलोमीटर अधिक गंवा दिया—अगस्त 2024 के बाद यह पहली शुद्ध मासिक क्षति थी। मोर्चे पर रूसी सेना की औसत प्रगति 50 से 90 मीटर प्रतिदिन रह गई है, जिसे पश्चिमी विशेषज्ञ प्रथम विश्व युद्ध जैसी धीमी गति बता रहे हैं।
यूक्रेनी सैन्य सूत्रों और पश्चिमी आकलनों के अनुसार, कीव ने मध्यम दूरी के ड्रोन हमलों का विस्तार कर रूस के ईंधन ढांचे, शस्त्रागारों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाया है, जिससे मास्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे शहरों तक आपूर्ति प्रभावित हुई है। यूक्रेनी ड्रोन कार्यक्रम ने अग्रिम पंक्ति के आसपास एक विस्तृत 'किल ज़ोन' तैयार कर दिया है, जिससे रूसी सैनिकों का प्रवेश लगभग असंभव हो गया है। सीएसआईएस के विश्लेषकों का कहना है कि 2026 की पहली छमाही में हताहत अनुपात रूस के पक्ष में आठ गुना तक पहुंच गया, जबकि युद्ध के अधिकांश समय में यह दो से तीन गुना था। साथ ही, रूस की मासिक भर्ती दर लगभग 27,000 रह गई है, जबकि हर महीने 30,000 से 34,000 सैनिक हताहत हो रहे हैं, जिससे उसकी सेना की संख्या में शुद्ध गिरावट आ रही है।
भू-राजनीतिक स्तर पर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक शिखर सम्मेलन में कहा कि इस युद्ध से अमेरिका का कोई सरोकार नहीं है, सिवाय इसके कि वह यूक्रेन को हथियार बेचता है। यूरोपीय विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान अमेरिकी सुरक्षा छत्र पर आठ दशकों से निर्भर यूरोपीय सहयोगियों के लिए एक नई वास्तविकता को रेखांकित करता है। इस बीच, उत्तर कोरिया ने 2024-25 में कुर्स्क क्षेत्र में रूस की मदद के लिए 10,000 से अधिक सैनिक भेजे थे। फिलहाल, युद्ध एक लंबी अट्रिशन लड़ाई में बदल चुका है, जिसमें किसी पक्ष के पास निर्णायक सफलता का तत्काल कोई संकेत नहीं है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.50 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.10 | neutral |
The conflict is turning into a war of attrition that demands strategic patience; Russian losses are severe but not decisive.
A hierarchy of threats is built: Russian attrition is real, but not enough to justify premature optimism; the reader is urged not to let down their guard.
It omits that the CSIS study is funded by defense-industry-linked donors, which could color the interpretation of the numbers.
The numbers speak for themselves: two million total losses, Russian advance stalled. The war continues without breakthroughs.
A calm, news-report register is adopted, presenting the data as objective facts rather than political argument, reducing emotional charge.
It does not delve into the study's methodology or possible implications for European strategy.
Losses are heavy, but the war continues; no hasty conclusions are drawn.
Moral or political judgment is avoided, treating the conflict as a matter of power and numbers, in line with a tradition of realism.
It does not cite the CSIS as an American think tank, nor discuss the reliability of the estimates.
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