
बेलिंगहैम के गोल पर स्पाइडरकैम का साया, फीफा ने सेंसर डेटा से विवाद को काटा
विश्व कप क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के बराबरी के गोल पर नॉर्वे ने स्पाइडरकैम केबल से टकराने का आरोप लगाया, लेकिन फीफा ने गेंद में लगे चिप के आंकड़ों के आधार पर इसे खारिज कर दिया।
मियामी के स्टेडियम में पहले हाफ के इंज्युरी टाइम में जूड बेलिंगहैम ने जो गोल दागा, उसने न केवल इंग्लैंड को नॉर्वे के खिलाफ 1-1 की बराबरी दिलाई, बल्कि पूरे विश्व कप क्वार्टर फाइनल को एक तकनीकी तूफान में लपेट दिया। नॉर्वे के गोलकीपर ओरियन नीलैंड के गोल किक के बाद गेंद हवा में ऊपर उठी और अचानक सामान्य प्रक्षेपवक्र से नीचे गिरती दिखी। नॉर्वे के खिलाड़ियों ने तुरंत दावा किया कि गेंद मैदान के ऊपर लगी स्पाइडरकैम केबल से टकराई, जिससे उसकी दिशा बदल गई। अगर ऐसा होता, तो नियमों के मुताबिक खेल रोककर रेफरी की बॉल दी जानी चाहिए थी और गोल मंसूख हो जाता।
नॉर्वे के कप्तान मार्टिन ओडेगार्ड और हाफलैंड जैसे स्टार खिलाड़ियों ने रेफरी क्लेमेंट टर्पिन के पास जाकर जोरदार विरोध जताया। कोच स्टोले सोलबाकेन ने हाफ टाइम में रेफरी से बात की और बाद में कहा, "गेंद हमारी बेंच के ठीक सामने अचानक नीचे गिरी, मानो सीधे आसमान से आई हो। बेंच पर बैठे कई लोगों ने उसी पल रिएक्ट किया।" हालांकि, रेफरी ने उन्हें बताया कि उन्होंने खुद कोई संपर्क नहीं देखा और न ही वीएआर से कोई संकेत मिला। मैच के बाद नॉर्वे के मिडफील्डर सैंडर बर्गे ने इसे "मजाकिया" बताते हुए कहा कि 2-1 का नतीजा खुद सब कुछ बयां करता है और सारे फैसले इंग्लैंड के पक्ष में गए।
फीफा ने कुछ घंटों बाद एक स्पष्ट बयान जारी कर विवाद को खत्म करने की कोशिश की। विश्व संस्था ने कहा कि गेंद के अंदर लगे कनेक्टेड बॉल सेंसर ने हवा में रहने के दौरान किसी भी तरह का असामान्य 'हार्टबीट' दर्ज नहीं किया, जिससे साबित होता है कि गेंद ने केबल को नहीं छुआ। साथ ही, स्पाइडरकैम के फुटेज में कैमरे में कोई कंपन या हलचल नहीं दिखी। इंग्लैंड के कोच थॉमस टुशेल ने भी इस तकनीक पर भरोसा जताते हुए कहा कि अगर टक्कर होती तो चिप जरूर पकड़ लेता।
यह पूरा प्रकरण इसलिए भी अहम है क्योंकि इसी विश्व कप में तकनीक ने एक अलग ही किस्सा लिखा था। क्रोएशिया-पुर्तगाल मैच में क्रोएशिया का एक गोल सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि गेंद के सेंसर ने एक खिलाड़ी के बाल को हल्का सा छूना रिकॉर्ड कर लिया, जिससे ऑफसाइड का फैसला हुआ। वहां सेंसर ने नंगी आंखों से न दिखने वाले संपर्क को पकड़ा, जबकि यहां उसने किसी संपर्क को नकार दिया। इस विरोधाभास ने वीएआर और गेंद तकनीक की भूमिका पर बहस तेज कर दी है। लॉस एंजिल्स टाइम्स के अनुसार, इस विश्व कप में राउंड ऑफ 16 तक 100 से अधिक वीएआर हस्तक्षेप हुए, जिनमें से कई फैसले सूक्ष्म साक्ष्यों पर आधारित थे।
नॉर्वे की टीम बाहर हो चुकी है, जबकि इंग्लैंड सेमीफाइनल में पहुंच गया है। फीफा के आधिकारिक रुख के बावजूद, बीबीसी और स्काई स्पोर्ट्स जैसे प्रसारकों के रिप्ले में गेंद की दिशा में मामूली बदलाव दिखने का दावा किया गया, जिससे यह सवाल हवा में ही रह गया कि क्या तकनीक ने सचमुच सब कुछ देख लिया या एक अदृश्य स्पाइडरकैम ने मैच का रुख बदल दिया।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
Norway clings to a ridiculous excuse to justify defeat, while the VAR system is accused of inefficiency.
It cites a Norwegian player's statement to dismiss the protest as unfounded, and broadens the discussion to VAR's failure, shifting focus from the match to the system.
The possibility that the ball touched the cable is dismissed without a thorough analysis of the footage.
Bellingham's goal is tainted by a touch of the ball on the spidercam cable, and FIFA hides the truth behind sensor data.
It uses an ironic and accusatory tone to describe the episode, contrasting visual evidence (the ball changing trajectory) with the cold sensor reading, creating suspicion of manipulation.
It omits mentioning that the sensor recorded no contact, and that FIFA provided a detailed technical explanation.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
ट्रंप ने न्यूयॉर्क मेयर की धमकी को खारिज किया, नेतन्याहू की गिरफ्तारी नहीं होगी
9 भाषाएँ · 21 स्रोत
Economy & Markets सेहोर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से तेल 90 डॉलर के पार, वैश्विक आपूर्ति पर संकट
8 भाषाएँ · 21 स्रोत
Technology सेएशिया में शिक्षा का बदलता परिदृश्य: परीक्षा सुधार, सुरक्षा संकट और सांस्कृतिक निवेश
6 भाषाएँ · 10 स्रोत