
स्वास्थ्य सेवाओं में बिजली संकट और प्रणालीगत सुधार: नाइजीरिया, जॉर्डन और स्वीडन से सबक
नाइजीरिया में अस्पतालों के लिए निजी बिजली निवेश, जॉर्डन में बिजली संयंत्र की दक्षता वृद्धि और स्वीडन में स्वास्थ्य कतारों से निपटने के उपाय वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के विविध समाधान दर्शाते हैं।
नाइजीरिया की संघीय सरकार ने देशभर के अस्पतालों को भरोसेमंद बिजली आपूर्ति से जोड़ने के लिए निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने की एक नई रूपरेखा शुरू की है। ‘नाइजीरिया पावर फॉर हेल्थ इनिशिएटिव’ नामक इस योजना के तहत स्वास्थ्य मंत्री इज़ियाक सलाको ने कहा कि बिजली की कमी सर्जरी, टीका भंडारण, प्रयोगशाला निदान और आपातकालीन सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित करती है। विद्युत मंत्री जोसेफ टेग्बे ने स्थायी वित्तपोषण मॉडल अपनाने पर जोर दिया, ताकि स्वास्थ्य केंद्रों का विद्युतीकरण दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित हो सके। यह पहल अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले देश में एक गंभीर बुनियादी ढांचागत कमी को दूर करने का प्रयास है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मातृत्व वार्डों में बिजली कटौती के कारण जीवन-मरण की स्थितियां बन जाती हैं।
इसी बीच, जॉर्डन में ऊर्जा मंत्री सालेह खराबशेह ने रेहाब पावर प्लांट में एक फॉगिंग प्रणाली का उद्घाटन किया, जो गैस टर्बाइनों की दक्षता बढ़ाकर गर्मियों की चरम मांग के दौरान परिचालन क्षमता को मजबूत करेगी। यह संयंत्र जॉर्डन की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता का लगभग 37 प्रतिशत प्रदान करता है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता का सीधा असर अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं पर पड़ता है। दूसरी ओर, स्वीडन में बहस बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर प्रणालीगत खामियों पर केंद्रित है। वहां सरकार ने स्वास्थ्य सेवा में 25 अरब क्रोनोर का निवेश किया है, फिर भी लंबी कतारें बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि प्रणाली की विफलता है—उपलब्ध क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता और वादा की गई ‘वाउचर गारंटी’ महज एक महत्वाकांक्षा बनकर रह गई है।
स्वीडन के स्थानीय स्तर पर भी सुधार के प्रयास दिख रहे हैं। ओस्तहामार कम्यून ने अपने बजट में पहली बार स्कूलों की तुलना में स्वास्थ्य सेवा को अधिक धन आवंटित किया है, साथ ही सभी अंडरश्योटर्सकोटरों के वेतन में 500 क्रोनोर प्रति माह की वृद्धि की घोषणा की है। सामाजिक सेवा बोर्ड के अध्यक्ष के अनुसार, अंशकालिक कर्मचारियों को पूर्णकालिक स्थायी पदों में बदलने से देखभाल की निरंतरता बेहतर होगी। ओस्तरयोतलांद क्षेत्र में सोशल डेमोक्रैट्स ने मनोचिकित्सा के लिए 64 मिलियन क्रोनोर अतिरिक्त देने का वादा किया है, ताकि बच्चों और वयस्कों की मानसिक स्वास्थ्य कतारें छोटी की जा सकें। राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक सेवा मंत्री कैमिला वाल्टरसन ग्रोनवाल ने बाल मनोचिकित्सा (बीयूपी) में सुधार का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत ‘पहली पंक्ति की मनोचिकित्सा’ का विस्तार करके हल्के मामलों का त्वरित उपचार किया जाएगा और बीयूपी केवल गंभीर मामलों पर ध्यान देगी।
भारत और दक्षिण एशिया के संदर्भ में ये घटनाक्रम विशेष प्रासंगिक हैं। भारत के ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति टीकाकरण और आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित करती है, ठीक वैसे ही जैसे नाइजीरिया में। नाइजीरिया का निजी निवेश मॉडल भारत के लिए एक अनुकरणीय ढांचा हो सकता है, जहां सार्वजनिक-निजी भागीदारी से सौर ऊर्जा चालित क्लीनिकों की संभावना है। वहीं, स्वीडन की कतार समस्या भारत के सरकारी अस्पतालों की लंबी प्रतीक्षा सूचियों से मिलती-जुलती है। स्वीडन में उठाया गया कदम—आर्थिक मुआवजे का विचार या कार्यबल का पुनर्गठन—भारत में भी रोगी अधिकारों को सशक्त बनाने की दिशा में सोचने को प्रेरित कर सकता है।
वैश्विक स्तर पर यह स्पष्ट है कि स्वास्थ्य प्रणालियों को एक साथ दो मोर्चों पर काम करना होगा: बुनियादी ढांचे की विश्वसनीयता और प्रणालीगत दक्षता। नाइजीरिया और जॉर्डन ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने पर ध्यान दे रहे हैं, जबकि स्वीडन संसाधनों के बेहतर उपयोग और समय पर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक बदलाव ला रहा है। आने वाले वर्षों में, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती मांग के कारण बिजली की चुनौतियां और गहराएंगी, ऐसे में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े स्वास्थ्य केंद्र और कार्यबल नवाचार ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की कुंजी होंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्वीडिश मीडिया इस संकट को संसाधनों की कमी के बजाय एक प्रणालीगत स्वास्थ्य सेवा समस्या के रूप में देखता है: लंबी प्रतीक्षा सूची, अप्रयुक्त क्षमता और स्टाफ की कमी। सुधार के प्रस्तावों में बाल मनोरोग सुधार से लेकर विलंबित देखभाल के लिए वित्तीय मुआवजा शामिल है, जो कर कटौती और कल्याण खर्च में वृद्धि के बीच राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
नाइजीरियाई मीडिया अस्पतालों में पुरानी बिजली कटौती को स्वास्थ्य सेवा वितरण में मुख्य बाधा के रूप में उजागर करता है। नाइजीरिया पावर फॉर हेल्थ पहल को निजी निवेश आकर्षित करने और चिकित्सा सुविधाओं के लिए विश्वसनीय बिजली सुनिश्चित करने के एक माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें स्थायी वित्तपोषण मॉडल की अपील की गई है।
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