
ब्रिटिश स्टील के राष्ट्रीयकरण पर बीजिंग की तीखी प्रतिक्रिया, द्विपक्षीय निवेश संधि के उल्लंघन का आरोप
चीन ने जिंगये ग्रुप के स्वामित्व वाली ब्रिटिश स्टील को सार्वजनिक हाथों में लेने के ब्रिटेन के फ़ैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ज़बरन अधिग्रहण बताते हुए क़ानूनी कार्रवाई का संकेत दिया है।
ब्रिटेन सरकार द्वारा ब्रिटिश स्टील का राष्ट्रीयकरण किए जाने के एक दिन बाद चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि वह इस निर्णय का “दृढ़ विरोध” करता है और “अत्यधिक असंतुष्ट” है। चीनी पक्ष के अनुसार, स्कनथॉर्प स्थित इस्पात संयंत्र को सार्वजनिक स्वामित्व में लेने की कार्रवाई ने जिंगये समूह के वैध अधिकारों को गंभीर क्षति पहुँचाई है और ब्रिटेन में निवेश करने वाली चीनी कंपनियों के विश्वास को गहरा धक्का लगा है। ब्रिटेन के व्यवसाय एवं व्यापार विभाग ने इस क़दम को स्कनथॉर्प में इस्पात उत्पादन का भविष्य सुरक्षित करने तथा आपूर्ति शृंखलाओं की रक्षा के लिए आवश्यक बताया था।
ब्रिटिश सरकारी पक्ष के अनुसार, यह हस्तक्षेप राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम है। प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने ब्रिटिश स्टील को देश की औद्योगिक ताक़त की आधारशिला बताते हुए कहा कि इससे कुशल नौकरियाँ सुरक्षित होंगी और एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय क्षमता की रक्षा होगी। संसद ने बुधवार को ‘इस्पात उद्योग (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम 2026’ पारित किया, जो मंत्रियों को सार्वजनिक हित की कसौटी पर इस्पात कारोबारों के शेयर या संपत्ति सरकारी स्वामित्व में स्थानांतरित करने का अधिकार देता है। ब्रिटेन की दीर्घकालिक रणनीति सभी घरेलू इस्पात उत्पादन को विद्युत चाप भट्टियों के माध्यम से करने की है, लेकिन स्कनथॉर्प ऐसे विशेष प्रकार के इस्पात का उत्पादन करता है जो अभी देश में अन्यत्र नहीं बनता और जिसकी नेटवर्क रेल तथा भवन उद्योग को आवश्यकता है।
बीजिंग ने इस कार्रवाई को द्विपक्षीय निवेश संरक्षण संधि के तहत ब्रिटेन के दायित्वों का उल्लंघन बताया है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन पक्ष ने जिंगये की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका की अनदेखी करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर कंपनी पर ज़बरन क़ब्ज़ा किया। चीन ने ब्रिटेन से अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने, चीन-ब्रिटेन द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत अपने वादों को ईमानदारी से निभाने और ब्रिटेन में काम कर रही चीनी कंपनियों के साथ निष्पक्ष एवं समान व्यवहार करने का आग्रह किया। साथ ही, चीन ने घोषणा की कि वह स्थिति पर क़रीबी नज़र रखेगा, चीनी कंपनियों को क़ानूनी रास्ते से अपने अधिकारों की रक्षा करने में सहयोग देगा और चीनी उद्यमों के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस क़दम उठाएगा।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब ब्रिटेन में सोमवार को नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम पदभार ग्रहण करने वाले हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला लंदन और बीजिंग के बीच आर्थिक संबंधों पर दबाव डाल सकता है। ब्रिटेन का छोटे व्यवसाय मंत्री ब्लेयर मैकडुगल ने संसद में बताया कि सरकार शरद ऋतु में एक स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता नियुक्त करेगी जो देय मुआवज़े पर निर्णय करेगा, और यह मुआवज़ा शून्य भी हो सकता है। जिंगये पहले ही मुआवज़े की माँग कर चुका है और उसका कहना था कि यह कारोबार प्रतिदिन सात लाख पाउंड का घाटा दे रहा था। राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय के अनुसार, मार्च में स्कनथॉर्प संयंत्र पर सरकार को प्रतिदिन लगभग 13 लाख पाउंड का ख़र्च आ रहा था।
फ़िलहाल ब्रिटिश स्टील का परिचालन सरकारी नियंत्रण में जारी रहेगा, और नई नेतृत्व टीम कारोबार को स्थिर कर व्यावसायिक रूप से टिकाऊ, निम्न-कार्बन उद्यम में बदलने पर ध्यान केंद्रित करेगी। ब्रिटेन सरकार ने संकेत दिया है कि वह दीर्घकाल में यह कारोबार स्वयं नहीं चलाना चाहती, लेकिन जब तक वैकल्पिक उत्पादन क्षमता विकसित नहीं हो जाती, स्कनथॉर्प को खुला रखा जाएगा। चीन ने क़ानूनी उपायों का सहारा लेने की बात कही है, जिससे आने वाले महीनों में मुआवज़े और संधि के प्रावधानों की व्याख्या को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और विधिक आदान-प्रदान की संभावना बनती है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.70 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.20 | neutral |
The UK nationalises to save the industry; China protests.
Balanced presentation of facts without judgment, leaving evaluation to the reader.
The Chinese criticism that the nationalisation was forcible and damaged Jingye's rights is not mentioned.
The UK forcibly expropriated British Steel, damaging legitimate Chinese rights and revealing its hypocrisy on free markets.
Emphasising the contrast between British free-market rhetoric and the nationalisation action, creating an accusation of double standards.
The UK's justification of protecting future production and jobs is not reported.
Nationalisation is the only way to save British steel, given the red ink and conflict with Jingye.
Presenting nationalisation as an inevitable technical solution, based on economic and production data, to legitimise state intervention.
The strong Chinese dissatisfaction and the accusation of damage to investors are not given voice.
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