
अंकोरेज समझौतों पर अमेरिका-रूस विवाद: ट्रंप के रुख में बदलाव के संकेत
जी7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी नियंत्रण वाले डोनबास पर पूर्व की सहमति से पीछे हटने का संकेत दिया, जबकि यूरोपीय नेताओं ने ठोस कार्रवाई पर संदेह जताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अगस्त 2025 में अलास्का के अंकोरेज में रूस के साथ बनी सहमतियों से पीछे हटने की संभावना जताई। समाचार पोर्टल एक्सियोस के अनुसार, बैठक में मौजूद दो अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से निराशा व्यक्त की और यह संकेत दिया कि वे 'अंकोरेज समझौतों' को त्याग सकते हैं। इन समझौतों के तहत वाशिंगटन ने किसी भी शांति समझौते में डोनबास पर रूसी नियंत्रण की मास्को की मांग को स्वीकार कर लिया था।
अमेरिकी पक्ष की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 25 जून को स्पष्ट किया कि अंकोरेज में कोई अंतिम सहमति नहीं बनी थी, केवल एक प्रस्ताव रखा गया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई समझौता होता तो युद्ध पहले ही समाप्त हो चुका होता। वहीं रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बयान का खंडन करते हुए दावा किया कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ द्वारा लाए गए प्रस्तावों पर पुतिन ने बिंदुवार सहमति दी थी और ट्रंप व रुबियो की उपस्थिति में उनकी पुष्टि हुई थी। लावरोव ने इसे 'अनुबंध' न मानने को कूटनीतिक रूप से अरुचिकर बताया। क्रेमलिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने भी कहा कि एक पक्ष अपनी प्रतिबद्धता निभाने में असमर्थ रहा है।
यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप के बदले रुख का स्वागत तो किया, लेकिन एक्सियोस से जुड़े सूत्रों के अनुसार वे इस पर संदेह भी जता रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति वास्तव में रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएंगे। जी7 के एक अधिकारी ने कहा, 'ट्रंप पुतिन को लेकर हर पहलू पर संशय में थे और रूस पर दबाव की बात कर रहे थे, लेकिन दूसरे नेता नहीं मानते कि वे सचमुच कुछ करेंगे।' इसी दौरान ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि वे 'काफी अच्छा कर रहे हैं', जो अंकोरेज के बाद के उनके रुख से भिन्न है।
अंकोरेज वार्ता का यह विवाद यूक्रेन संघर्ष के कूटनीतिक ढांचे को कमजोर कर रहा है। रूसी पक्ष लगातार 'अंकोरेज की भावना' का हवाला देकर यह स्थापित करने का प्रयास कर रहा है कि शांति की रूपरेखा पहले से मौजूद है, जबकि अमेरिकी प्रशासन इसे महज एक प्रस्ताव बताकर खारिज कर रहा है। पूर्व अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री डेनियल फ्रीड के अनुसार, मास्को बिना किसी दस्तावेज के समझौते का दावा कर रहा है, जबकि वह उस संधि की अनदेखी कर रहा है जिस पर स्वयं पुतिन ने हस्ताक्षर किए थे और जो 1991 की रूस-यूक्रेन सीमाओं को मान्यता देती है।
फिलहाल, रूस अंकोरेज फॉर्मूले पर अडिग है, जिसमें डोनबास और क्रीमिया पर कानूनी मान्यता के साथ-साथ ज़ापोरिज्जिया और खेरसॉन में यथास्थिति को स्वीकार करना शामिल बताया जाता है। दूसरी ओर, जी7 देशों ने यूक्रेन को वायु रक्षा प्रणालियों और लंबी दूरी के हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने का निर्णय लिया है। अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम की स्पष्टता का अभाव बना हुआ है, लेकिन ट्रंप के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन की स्थिति में बदलाव संभव है, जिसका सीधा प्रभाव यूक्रेन में जारी सैन्य अभियानों और आगामी कूटनीतिक पहलों पर पड़ेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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वाशिंगटन अंकोरेज समझौतों से पीछे हट रहा है, जिससे पश्चिम में भी नाराजगी है। विदेश मंत्री रुबियो के बयान, जो कीव के प्रति एकतरफा समर्थन का दावा करते हैं, ने मास्को के साथ बातचीत को कमजोर कर दिया है। ट्रंप अब समझौतों में संशोधन की धमकी दे रहे हैं, जो अमेरिकी अविश्वसनीयता की पुष्टि करता है।
अंकोरेज में वास्तव में क्या सहमति हुई थी, इसे लेकर विवाद चल रहा है। मास्को युद्ध समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा के साथ 'अंकोरेज की भावना' का आह्वान करता है, लेकिन वाशिंगटन स्पष्ट रूप से इससे इनकार करता है। ट्रंप ने पुतिन के प्रति निराशा व्यक्त की और समझौतों को छोड़ने का संकेत दिया, लेकिन यूरोपीय नेताओं को संदेह है कि वह अमल करेंगे।
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