
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर शुल्क वसूली का ओमान का प्रस्ताव, अमेरिका ने जताई आपत्ति
ईरान के समर्थन वाली इस योजना के तहत जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाएगा, जबकि वाशिंगटन इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन स्वतंत्रता के लिए खतरा मानता है।
ओमान ने अमेरिका और पश्चिमी सहयोगियों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर सेवा शुल्क लगाने का एक औपचारिक प्रस्ताव सौंपा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव को ईरान का समर्थन प्राप्त है, जबकि अमेरिकी वार्ताकारों ने इस पर चिंता जताई है और ओमानी अधिकारियों के साथ आगे चर्चा की योजना बनाई है। यह पहल अमेरिका-ईरान के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते के तहत 60 दिनों की शुल्क-मुक्त नौवहन अवधि के दौरान सामने आई है, जिसके बाद जलडमरूमध्य के भावी प्रशासन पर एक सहमत ढाँचा तैयार किया जाना है।
विभिन्न पक्षों की स्थिति में स्पष्ट मतभेद हैं। ईरानी उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि तेहरान ओमान के साथ एक संयुक्त तंत्र विकसित करना चाहता है, लेकिन यदि सहमति नहीं बनी तो वह स्वतंत्र रूप से शुल्क लागू करेगा; ईरानी अधिकारियों के अनुसार यह भुगतान अनिवार्य होना चाहिए। दूसरी ओर, ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने पारगमन शुल्क को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताते हुए इसे मलक्का जलडमरूमध्य की तर्ज पर स्वैच्छिक योगदान तक सीमित रखने का समर्थन किया है, जो सुरक्षित नौवहन सेवाओं के बदले लिया जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी टोल या पारगमन शुल्क को “अस्वीकार्य” करार दिया है और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोहराया कि वाशिंगटन जलडमरूमध्य तक पहुँच के मुद्रीकरण के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। सऊदी अरब सहित खाड़ी देशों ने भी संघर्ष-पूर्व यथास्थिति बहाल करने पर जोर दिया है; सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान के अनुसार युद्ध से पहले जलडमरूमध्य का प्रबंधन सुचारू था और किसी नई व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है।
इस प्रस्ताव के व्यापक भू-रणनीतिक आयाम हैं। युद्ध के दौरान ईरानी हमलों और अमेरिकी नौसैनिक रोकथाम के कारण हॉर्मुज से होकर जाने वाला वैश्विक तेल व्यापार ठप हो गया था, जिससे ऊर्जा संकट उत्पन्न हुआ। अब लॉयड्स लिस्ट के आँकड़ों के अनुसार, ओमान के तटीय दक्षिणी मार्ग से जहाजों की आवाजाही में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो ईरान की नियंत्रण क्षमता को चुनौती दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान शुल्क प्रस्ताव के ज़रिये अपनी सामरिक पकड़ बनाए रखना चाहता है, जबकि वैकल्पिक मार्ग और पाइपलाइनें उसकी भौगोलिक बढ़त को कम कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (यूएनसीएलओएस) के अनुच्छेद 26 के तहत केवल वास्तविक सेवाओं के बदले शुल्क की अनुमति है; ईरान ने इस संधि का अनुमोदन नहीं किया है, जबकि ओमान इसका पक्षकार है। यदि यह मॉडल सफल होता है तो यह विश्व के 28 प्रमुख समुद्री गलियारों पर शुल्क वसूली की मिसाल कायम कर सकता है।
फिलहाल कूटनीतिक प्रयास तेज़ हैं। मंगलवार को दोहा में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर कतरी मध्यस्थों के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता करेंगे, जिसमें हॉर्मुज का भविष्य केंद्र में रहेगा; ईरानी प्रतिनिधियों से सीधी बैठक की पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, अल अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार ईरान को सप्ताहांत तक अपनी 3 अरब डॉलर की जब्त संपत्तियाँ प्राप्त हो सकती हैं। ईरान-ओमान संयुक्त हॉर्मुज समिति की पहली बैठक हो चुकी है, लेकिन शुल्क की अनिवार्यता और स्वरूप पर सहमति अभी दूर है। अमेरिकी वार्ताकार ओमानी प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियाँ स्पष्ट करने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि 60 दिन की शुल्क-मुक्त अवधि समाप्ति की ओर बढ़ रही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ
The joint plan by Oman and Iran to impose a toll in the Strait of Hormuz is portrayed as a direct threat to global energy security and U.S. interests. The initiative is described as a provocation that could trigger an international crisis, with tones emphasizing its illegitimacy and geopolitical gamble.
The proposal for a toll in the Strait of Hormuz is framed as a negotiating move by Oman and Iran, rather than a provocation. The focus is on the economic implications for Europe and the need for diplomatic dialogue to avoid escalation.
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