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अर्थव्यवस्था और बाजाररविवार, 26 जुलाई 2026

ईरान ने युद्ध और युद्धविराम में 18 अरब डॉलर का तेल बेचा

पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद तेल राजस्व जारी रहने का संकेत देता है, जो शीर्ष अधिकारी के पूर्व बयान से भिन्न है।

ईरान के पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध और उसके बाद के संक्षिप्त युद्धविराम के दौरान देश ने 18 अरब डॉलर का कच्चा तेल बेचा। मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक चले सक्रिय युद्ध चरण में 11.5 अरब डॉलर और 8 अप्रैल से 7 जुलाई तक युद्धविराम अवधि में 6.5 अरब डॉलर की बिक्री हुई। यह आय चालू ईरानी बजट वर्ष के लिए अनुमानित तेल राजस्व के 60 प्रतिशत से अधिक को कवर करती है। यह दावा जून के अंत में ईरानी संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के उस बयान से स्पष्ट विरोधाभास रखता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी बंदरगाह नाकेबंदी के कारण ईरान एक बैरल भी तेल निर्यात करने में असमर्थ रहा।

अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और कठोर प्रतिबंधों के बावजूद तेल प्रवाह जारी रहने के पीछे रणनीतिक खरीदारों और वैकल्पिक मार्गों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। ऊर्जा ट्रैकिंग फर्मों के अनुमानों के अनुसार, चीन इस दौरान ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। युद्ध से पहले इस जलमार्ग से दुनिया के कुल समुद्री-जनित कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता था। अब यहां सैन्य गतिविधियाँ और जहाजों पर हमलों के कारण समुद्री बीमा प्रीमियम और परिवहन लागत कई गुना बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आयातक अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा महंगाई पर पड़ रहा है।

जुलाई के पहले सप्ताह में शत्रुता फिर शुरू होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी सख्त कर दी है और तेहरान खाड़ी देशों में अमेरिकी सहयोगियों पर जवाबी हमले तेज कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध के बीच तेल राजस्व ईरान के राज्य संचालन और सैन्य प्रयासों को वित्तपोषित करने का मुख्य साधन बना हुआ है। अगला निर्णायक बिंदु यह होगा कि क्या आने वाले सप्ताहों में होर्मुज के जरिये तेल प्रवाह बहाल होता है या सैन्य अभियान इसे और बाधित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियाँ और बाजार जलडमरूमध्य की स्थिति पर कड़ी निगाह रखे हुए हैं।

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ईरान ने युद्ध और युद्धविराम में 18 अरब डॉलर का तेल बेचा

पेट्रोलियम मंत्रालय का दावा अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद तेल राजस्व जारी रहने का संकेत देता है, जो शीर्ष अधिकारी के पूर्व बयान से भिन्न है।

ईरान के पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान में कहा कि अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध और उसके बाद के संक्षिप्त युद्धविराम के दौरान देश ने 18 अरब डॉलर का कच्चा तेल बेचा। मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी से 8 अप्रैल तक चले सक्रिय युद्ध चरण में 11.5 अरब डॉलर और 8 अप्रैल से 7 जुलाई तक युद्धविराम अवधि में 6.5 अरब डॉलर की बिक्री हुई। यह आय चालू ईरानी बजट वर्ष के लिए अनुमानित तेल राजस्व के 60 प्रतिशत से अधिक को कवर करती है। यह दावा जून के अंत में ईरानी संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के उस बयान से स्पष्ट विरोधाभास रखता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी बंदरगाह नाकेबंदी के कारण ईरान एक बैरल भी तेल निर्यात करने में असमर्थ रहा।

अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और कठोर प्रतिबंधों के बावजूद तेल प्रवाह जारी रहने के पीछे रणनीतिक खरीदारों और वैकल्पिक मार्गों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। ऊर्जा ट्रैकिंग फर्मों के अनुमानों के अनुसार, चीन इस दौरान ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा गंतव्य बना रहा। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। युद्ध से पहले इस जलमार्ग से दुनिया के कुल समुद्री-जनित कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता था। अब यहां सैन्य गतिविधियाँ और जहाजों पर हमलों के कारण समुद्री बीमा प्रीमियम और परिवहन लागत कई गुना बढ़ गई है, जिसका सीधा असर आयातक अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा महंगाई पर पड़ रहा है।

जुलाई के पहले सप्ताह में शत्रुता फिर शुरू होने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी सख्त कर दी है और तेहरान खाड़ी देशों में अमेरिकी सहयोगियों पर जवाबी हमले तेज कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध के बीच तेल राजस्व ईरान के राज्य संचालन और सैन्य प्रयासों को वित्तपोषित करने का मुख्य साधन बना हुआ है। अगला निर्णायक बिंदु यह होगा कि क्या आने वाले सप्ताहों में होर्मुज के जरिये तेल प्रवाह बहाल होता है या सैन्य अभियान इसे और बाधित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियाँ और बाजार जलडमरूमध्य की स्थिति पर कड़ी निगाह रखे हुए हैं।

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