
बेंगलुरु डे-केयर में मासूमों पर अत्याचार: वॉशिंग मशीन में डाला, टॉयलेट जेट से पानी छिड़का
कैपजेमिनी परिसर के क्रेच में कथित दुर्व्यवहार के वीडियो वायरल, पांच कर्मचारियों पर मामला दर्ज; ब्राजील और अर्जेंटीना में भी सामने आए डे-केयर हिंसा के मामले।
बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड स्थित आईटी कंपनी कैपजेमिनी के परिसर में संचालित एक डे-केयर सेंटर से दो से तीन साल के बच्चों के साथ कथित शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार के वीडियो सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, ‘लिटिल बड्स डे केयर’ में कार्यरत पांच महिला देखभालकर्ताओं—मंजुला, विजयलक्ष्मी, सिंधु, भवानी और बिंदु—के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। वायरल वीडियो में बच्चों को फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के ड्रम में बैठाने, वेस्टर्न टॉयलेट सीट पर जबरन बिठाने, टॉयलेट जेट स्प्रे से मुंह में पानी डालने और बाथरूम में बंद कर चुप रहने की धमकी देने के दृश्य दिखने का दावा किया गया है।
शिकायत के मुताबिक, ये वीडियो व्हाट्सएप पर प्रसारित होने के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना दी गई, जिसके आधार पर एचएएल पुलिस ने मामला दर्ज किया। जांचकर्ता फिलहाल वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि कर रहे हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि घटनाएं कब हुईं और कितने बच्चे प्रभावित हुए। आरोपियों को हिरासत में लिए जाने या नोटिस जारी किए जाने को लेकर सूत्रों में विरोधाभास है—कुछ रिपोर्टों में उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की बात कही गई है, जबकि अन्य के अनुसार अभी केवल नोटिस भेजे गए हैं। कैपजेमिनी ने एहतियातन डे-केयर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है।
यह मामला अकेला नहीं है। ब्राजील के सर्किल्हो शहर में एक नगरपालिका क्रेच में सीसीटीवी में छह महीने की बच्ची को कर्मचारी द्वारा ज़मीन पर पटकते और चेहरे पर कपड़ा ज़ोर से रगड़ते हुए कैद किया गया; बाद में वह कर्मचारी मृत पाई गई। अर्जेंटीना के सैंटियागो डेल एस्टेरो प्रांत में एक मां को अपनी चार साल की बेटी को पीटने और धमकाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जिसके वीडियो पिता ने पुलिस को सौंपे। इन घटनाओं के बीच, भारत के महाराष्ट्र के एक डे-केयर का सीसीटीवी फुटेज—जिसमें एक बच्चे को दूसरे बच्चे द्वारा मारते हुए दिखाया गया था—बांग्लादेश का बताकर सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में वायरल हुआ, जिसे बाद में तथ्य-जांच में भारतीय पाया गया।
बेंगलुरु पुलिस वीडियो की फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयान दर्ज कर रही है। कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग भी स्वतंत्र जांच की संभावना पर विचार कर रहा है। अभी तक किसी बच्चे की चिकित्सीय रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही आरोपियों पर औपचारिक आरोप तय हुए हैं। जांच जारी है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.50 | critical |
India responds firmly: authorities have arrested the perpetrators and the judicial system will take its course.
The coverage focuses on arrests and legal procedures, presenting the case as a public order issue resolved by law enforcement.
The broader context of childcare conditions in India and international criticism of the handling of such cases is omitted.
The world must act: the spread of the videos reveals a global crisis in child protection.
The story is framed as a universal problem, using the Bangalore case to sound an alarm about child safety everywhere.
Specific details of the Indian judicial system and measures already taken by local authorities are omitted.
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