
अंतिम क्षणों में डायलो का गोल: कोटे डी आइवर ने इक्वाडोर को हराकर तोड़ा 12 साल का सूखा
फिलाडेल्फिया में विश्व कप 2026 के ग्रुप ई मुकाबले में कोटे डी आइवर ने 90वें मिनट में अमाद डायलो के गोल से इक्वाडोर को 1-0 से हराकर अफ्रीकी टीम का दक्षिण अमेरिकी टीम के खिलाफ पहला ग्रुप चरण जीत का सूखा खत्म किया।
फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में रविवार रात विश्व कप 2026 के ग्रुप ई का मुकाबला गोलरहित ड्रॉ की ओर बढ़ रहा था, तभी 90वें मिनट में कोटे डी आइवर के युवा स्टार अमाद डायलो ने एक शानदार गोल कर 68,000 से अधिक इक्वाडोर समर्थकों की चीखों को खामोश कर दिया। डिफेंडर सिंगो की तेज़ रफ्तार और सटीक पास ने डायलो को मौका दिया, जिन्होंने बाएं पैर से गेंद को गोलकीपर गैलिंडेज़ के दाएं कोने में पहुंचा दिया। इस जीत ने न केवल अफ्रीकी टीम को ग्रुप में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया, बल्कि एक ऐतिहासिक वर्जना भी तोड़ी।
मैच शुरू से ही रोमांचक था और दोनों टीमों ने गोल के भरपूर मौके बनाए। इक्वाडोर ने पहले हाफ में दबदबा बनाया और तीन बार गेंद गोलपोस्ट से टकराई—जॉन येबोआह, एलन मिंडा और पेड्रो विटे के शॉट किस्मत के मारे गोल में नहीं बदल सके। दूसरे हाफ की शुरुआत में कोटे डी आइवर का भी एक शॉट पोस्ट से लगा, लेकिन कुल मिलाकर इक्वाडोर के पास अधिक स्पष्ट अवसर थे। हालांकि, दक्षिण अमेरिकी टीम की फिनिशिंग कमजोर रही और अंत में उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।
यह जीत कोटे डी आइवर के लिए कई मायनों में खास रही। टीम ने 12 साल बाद विश्व कप में कोई मैच जीता—आखिरी जीत 2014 में आई थी। इसके अलावा, अफ्रीकी टीम ने पहली बार विश्व कप के ग्रुप चरण में किसी दक्षिण अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी को हराया। दूसरी ओर, इक्वाडोर का डेब्यू मैचों में हार का सिलसिला जारी रहा; 2002 में इटली और 2014 में स्विट्जरलैंड के बाद अब कोटे डी आइवर ने उसे शुरुआती मुकाबले में हराया।
इक्वाडोर के कोच सेबेस्टियन बेक्कासेसे ने हार को “अन्यायपूर्ण” बताया और रेफरी पर एक स्पष्ट लाल कार्ड न दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीम ने बेहतर खेल दिखाया लेकिन फिनिशिंग की कमी खली। कप्तान एनर वालेंसिया ने हार के बावजूद भरोसा जताया कि टीम अगले मैचों को फाइनल की तरह लड़ेगी। वहीं, कोटे डी आइवर के कोच एमर्स फाए ने अंतिम क्षण के गोल पर जबरदस्त उत्साह दिखाया। अब ग्रुप ई में कोटे डी आइवर जर्मनी के साथ शीर्ष पर है, जबकि इक्वाडोर पर कराओ और फिर जर्मनी से भिड़ने का दबाव है।
आगे का रास्ता दोनों टीमों के लिए चुनौतीपूर्ण है। कोटे डी आइवर को टोरंटो में जर्मनी जैसी मजबूत टीम का सामना करना है, जबकि इक्वाडोर को कैनसस सिटी में कराओ के खिलाफ जीत हासिल करनी होगी और फिर जर्मनी से अंक निकालने होंगे। भारतीय दर्शकों के लिए यह विश्व कप अंतिम क्षणों के नाटकीय गोलों से भरा रहा है, जो टूर्नामेंट की अप्रत्याशितता को रेखांकित करता है। क्या इक्वाडोर वापसी कर पाएगा या कोटे डी आइवर अपनी ऐतिहासिक शुरुआत को आगे बढ़ाएगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
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