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राजनीतिमंगलवार, 16 जून 2026

यूरोप में जनसांख्यिकीय बदलाव: स्विस जनमत संग्रह से इनकार, जर्मनी की घटती आबादी और रेल संकट

स्विट्ज़रलैंड ने जनसंख्या को 10 मिलियन पर सीमित करने का प्रस्ताव ठुकराया, जर्मनी में आबादी घटकर 8.35 करोड़ हुई, लेकिन दोनों देशों में बुनियादी ढांचे पर दबाव और निवेश की कमी साझा चुनौती बनी हुई है।

पिछले सप्ताह स्विट्ज़रलैंड में एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह ने यूरोप की जनसांख्यिकीय चिंताओं को केंद्र में ला दिया। दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी (एसवीपी) द्वारा प्रस्तावित ‘10 मिलियन से अधिक जनसंख्या नहीं’ पहल को मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। यह प्रस्ताव 2050 तक जनसंख्या को 10 मिलियन पर रोकने और 9.5 मिलियन पार होने पर परिवार पुनर्मिलन, निवास परमिट व आप्रवासन पर कठोर पाबंदियाँ लगाने की माँग करता था। हालाँकि यह अभियान विफल रहा, लेकिन इसने रेलवे जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को उजागर किया। अभियान के दौरान अत्यधिक भीड़भाड़ वाली ट्रेनों की तस्वीरों ने इस बात को रेखांकित किया कि स्विस रेल नेटवर्क, खासकर पठारी क्षेत्र का पूर्व-पश्चिम गलियारा, क्षमता की गंभीर कमी से जूझ रहा है।

इसके विपरीत, जर्मनी की जनसंख्या वास्तव में सिकुड़ रही है। संघीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, 2025 के अंत तक देश की आबादी 110,000 घटकर 8.35 करोड़ रह गई—2020 के बाद पहली गिरावट। 235,000 का शुद्ध आप्रवासन 352,000 के जन्म घाटे की भरपाई नहीं कर सका, और बुजुर्गों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है। फिर भी, म्यूनिख जैसे आर्थिक केंद्रों में स्थिति उलट है: तेज़ी से बढ़ता क्षेत्र और अधिक यात्रियों को खींच रहा है, जबकि रेल बुनियादी ढाँचा ‘बहुत पुराना, बहुत खस्ताहाल, बहुत भीड़भाड़ वाला’ बना हुआ है। बजट की कमी के चलते क्षेत्रीय ट्रेन सेवाएँ घटने का खतरा है, भले ही विस्तार की सख्त ज़रूरत हो।

स्विट्ज़रलैंड में जनमत संग्रह के बाद हरित दल ने संसद में सात हस्तक्षेप प्रस्ताव रखे हैं, जिनका उद्देश्य लोकतांत्रिक बहस को दुष्प्रचार, फर्ज़ी सोशल मीडिया खातों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग से बचाना है। साथ ही, रेल अवसंरचना के पूर्व-वित्तपोषण की माँग ज़ोर पकड़ रही है, ताकि क्षमता बढ़ाने की परियोजनाएँ समय पर पूरी हों। यह पहल इस मान्यता से उपजी है कि जनसंख्या वृद्धि के परिणामों से निपटने के लिए तत्काल निवेश अपरिहार्य है, चाहे आप्रवासन नीति पर मतभेद क्यों न हों।

इटली भी इस जनसांख्यिकीय बदलाव से अछूता नहीं है। वहाँ घटती जन्म दर, बढ़ती दीर्घायु और कल्याण प्रणाली पर दबाव को लेकर 18 जून को ‘डेमोग्राफ़िका’ नामक वार्षिक राष्ट्रीय मंच आयोजित हो रहा है, जिसमें सरकार, संस्थाएँ और विशेषज्ञ श्रम बाज़ार व पेंशन सुधारों पर चर्चा करेंगे। यूरोप भर में यह साझा पैटर्न उभरता है: चाहे आबादी घटे या बढ़े, सार्वजनिक परिवहन और सामाजिक सुरक्षा ढाँचे दशकों के कम निवेश के कारण तनाव में हैं।

आगे का रास्ता राजनीतिक इच्छाशक्ति और दीर्घकालिक योजना की माँग करता है। जर्मनी में बजट अनुशासन के नाम पर क्षेत्रीय रेलगाड़ियाँ कम करने की चर्चा अल्पकालिक सोच को दर्शाती है, जबकि स्विट्ज़रलैंड में जनमत संग्रह की विफलता के बाद भी बुनियादी ढाँचे के पूर्व-वित्तपोषण की पहल एक सकारात्मक मोड़ ले सकती है। दक्षिण एशिया जैसे तेज़ी से शहरीकरण करते क्षेत्रों के लिए यह सबक स्पष्ट है: जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के साथ निवेश को जोड़े बिना, भीड़भाड़ और सेवा विफलताएँ अपरिहार्य हैं।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa europea continentaleStampa sud-est asiatica
Stampa europea continentale/ dach_plus
allarmeurgenzapragmatismo

Continental Europe, caught between ageing populations and urban growth, sees its rail infrastructure on the brink of collapse. Chronic underfunding threatens strategic hubs like Munich, while Switzerland tries to pre-finance its network and to tame the immigration debate after a campaign deemed toxic. Germany's demographic decline and Italy's falling birth rate add pressure on welfare and transport, forcing urgent long-term decisions.

Stampa sud-est asiatica
distaccoscetticismo

From Southeast Asia, the Swiss referendum on capping the population at 10 million is watched with detachment. The proposal, rejected by the majority, is portrayed as an attempt to curb demographic growth, without delving into the infrastructure pressures or political tensions behind it.

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यूरोप में जनसांख्यिकीय बदलाव: स्विस जनमत संग्रह से इनकार, जर्मनी की घटती आबादी और रेल संकट

स्विट्ज़रलैंड ने जनसंख्या को 10 मिलियन पर सीमित करने का प्रस्ताव ठुकराया, जर्मनी में आबादी घटकर 8.35 करोड़ हुई, लेकिन दोनों देशों में बुनियादी ढांचे पर दबाव और निवेश की कमी साझा चुनौती बनी हुई है।

पिछले सप्ताह स्विट्ज़रलैंड में एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह ने यूरोप की जनसांख्यिकीय चिंताओं को केंद्र में ला दिया। दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी (एसवीपी) द्वारा प्रस्तावित ‘10 मिलियन से अधिक जनसंख्या नहीं’ पहल को मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। यह प्रस्ताव 2050 तक जनसंख्या को 10 मिलियन पर रोकने और 9.5 मिलियन पार होने पर परिवार पुनर्मिलन, निवास परमिट व आप्रवासन पर कठोर पाबंदियाँ लगाने की माँग करता था। हालाँकि यह अभियान विफल रहा, लेकिन इसने रेलवे जैसी सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को उजागर किया। अभियान के दौरान अत्यधिक भीड़भाड़ वाली ट्रेनों की तस्वीरों ने इस बात को रेखांकित किया कि स्विस रेल नेटवर्क, खासकर पठारी क्षेत्र का पूर्व-पश्चिम गलियारा, क्षमता की गंभीर कमी से जूझ रहा है।

इसके विपरीत, जर्मनी की जनसंख्या वास्तव में सिकुड़ रही है। संघीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, 2025 के अंत तक देश की आबादी 110,000 घटकर 8.35 करोड़ रह गई—2020 के बाद पहली गिरावट। 235,000 का शुद्ध आप्रवासन 352,000 के जन्म घाटे की भरपाई नहीं कर सका, और बुजुर्गों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है। फिर भी, म्यूनिख जैसे आर्थिक केंद्रों में स्थिति उलट है: तेज़ी से बढ़ता क्षेत्र और अधिक यात्रियों को खींच रहा है, जबकि रेल बुनियादी ढाँचा ‘बहुत पुराना, बहुत खस्ताहाल, बहुत भीड़भाड़ वाला’ बना हुआ है। बजट की कमी के चलते क्षेत्रीय ट्रेन सेवाएँ घटने का खतरा है, भले ही विस्तार की सख्त ज़रूरत हो।

स्विट्ज़रलैंड में जनमत संग्रह के बाद हरित दल ने संसद में सात हस्तक्षेप प्रस्ताव रखे हैं, जिनका उद्देश्य लोकतांत्रिक बहस को दुष्प्रचार, फर्ज़ी सोशल मीडिया खातों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग से बचाना है। साथ ही, रेल अवसंरचना के पूर्व-वित्तपोषण की माँग ज़ोर पकड़ रही है, ताकि क्षमता बढ़ाने की परियोजनाएँ समय पर पूरी हों। यह पहल इस मान्यता से उपजी है कि जनसंख्या वृद्धि के परिणामों से निपटने के लिए तत्काल निवेश अपरिहार्य है, चाहे आप्रवासन नीति पर मतभेद क्यों न हों।

इटली भी इस जनसांख्यिकीय बदलाव से अछूता नहीं है। वहाँ घटती जन्म दर, बढ़ती दीर्घायु और कल्याण प्रणाली पर दबाव को लेकर 18 जून को ‘डेमोग्राफ़िका’ नामक वार्षिक राष्ट्रीय मंच आयोजित हो रहा है, जिसमें सरकार, संस्थाएँ और विशेषज्ञ श्रम बाज़ार व पेंशन सुधारों पर चर्चा करेंगे। यूरोप भर में यह साझा पैटर्न उभरता है: चाहे आबादी घटे या बढ़े, सार्वजनिक परिवहन और सामाजिक सुरक्षा ढाँचे दशकों के कम निवेश के कारण तनाव में हैं।

आगे का रास्ता राजनीतिक इच्छाशक्ति और दीर्घकालिक योजना की माँग करता है। जर्मनी में बजट अनुशासन के नाम पर क्षेत्रीय रेलगाड़ियाँ कम करने की चर्चा अल्पकालिक सोच को दर्शाती है, जबकि स्विट्ज़रलैंड में जनमत संग्रह की विफलता के बाद भी बुनियादी ढाँचे के पूर्व-वित्तपोषण की पहल एक सकारात्मक मोड़ ले सकती है। दक्षिण एशिया जैसे तेज़ी से शहरीकरण करते क्षेत्रों के लिए यह सबक स्पष्ट है: जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं के साथ निवेश को जोड़े बिना, भीड़भाड़ और सेवा विफलताएँ अपरिहार्य हैं।

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From Southeast Asia, the Swiss referendum on capping the population at 10 million is watched with detachment. The proposal, rejected by the majority, is portrayed as an attempt to curb demographic growth, without delving into the infrastructure pressures or political tensions behind it.

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