
अमेरिका-ईरान डील पर इज़राइल की नाराज़गी, लेबनान में संघर्षविराम की मिली-जुली प्रतिक्रिया
अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते में लेबनान को शामिल किए जाने से बेरूत में राहत और आशंका दोनों हैं, जबकि इज़राइल के कट्टरपंथी मंत्री इस डील को नकार रहे हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच संपन्न युद्धविराम समझौते ने पश्चिम एशिया में तीन महीने से जारी रक्तपात पर विराम की उम्मीद जगा दी है, लेकिन इज़राइल के कट्टरपंथी गठबंधन सहयोगियों ने इस डील को सिरे से खारिज कर दिया है। इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने टेलीग्राम पर स्पष्ट कहा कि "ट्रंप का समझौता हमें बांधता नहीं है... हम इसके पक्षकार नहीं हैं और यह हमारी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।" उन्होंने हिज़्बुल्लाह के पूर्ण विघटन और लेबनान के दक्षिणी इलाकों से इज़राइली सेना की वापसी न करने की ज़िद दोहराई। यह पहली बार था जब किसी इज़राइली अधिकारी ने इस डील पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी, और इसने तेल अवीव के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर किया।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि लेबनान और वहां युद्ध की समाप्ति अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन का "अभिन्न अंग" है। उन्होंने बताया कि मसौदे में लेबनान का तीन बार उल्लेख है और इसमें सभी मोर्चों पर युद्ध रोकने, लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की बात कही गई है। तेहरान ने यह भी घोषणा की कि वह लेबनान की स्थिति पर कड़ी निगरानी रखेगा और ज़रूरत पड़ने पर विपक्षी पक्ष को अपने दायित्व निभाने के लिए बाध्य करने हेतु सभी उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करेगा। शुक्रवार को जिनेवा में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
लेबनान में इस डील पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। राष्ट्रपति जोसेफ आऊन और संसद अध्यक्ष नबीह बेरी ने समझौते का स्वागत किया और विशेष रूप से लेबनान को शामिल किए जाने पर ईरान का आभार जताया। बेरी ने कहा कि इसमें "इज़राइली आक्रमण को रोकने के लिए एक मौलिक और बाध्यकारी खंड" है जो लेबनान की संप्रभुता को बनाए रखता है। हिज़्बुल्लाह ने भी एक बयान में समझौते को "बड़ी सफलता" बताया और ईरानी नेतृत्व, सेना और जनता के "दृढ़ संकल्प और बलिदान" की सराहना की। हालांकि, एक अधिकारी सूत्र ने बताया कि लेबनान को समझौते की शर्तों या युद्धविराम के समय के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। दक्षिणी लेबनान में विस्थापित लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे, लेकिन प्रशासन ने जल्दबाज़ी न करने की चेतावनी दी। वहीं, इज़राइली सेना ने सोमवार को भी दक्षिणी लेबनान में रुक-रुक कर तोपखाने से गोलाबारी जारी रखी, हालांकि हवाई हमले नहीं हुए।
यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की मध्यस्थता से संभव हुआ, जिसमें कतर, सऊदी अरब और मिस्र ने भी सहयोग दिया। दक्षिण एशिया की इस कूटनीतिक पहल ने एक बार फिर क्षेत्रीय शक्तियों की संघर्ष समाधान में बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इज़राइल अपने कट्टरपंथी मंत्रियों के रुख पर चलता है तो युद्धविराम कमज़ोर पड़ सकता है, लेकिन ईरान की स्पष्ट प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय गारंटियों से लेबनान में स्थायी शांति की संभावना बनी हुई है। आने वाले दिनों में जिनेवा हस्ताक्षर और ज़मीनी हालात इस ऐतिहासिक डील की असली परीक्षा करेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते को ईरानी जनता के अदम्य साहस और बुद्धिमान नेतृत्व की बड़ी जीत के रूप में मनाया जा रहा है। हिज़बुल्लाह ने तेहरान को बधाई दी है कि उसने एक व्यापक युद्धविराम सुनिश्चित किया जिसमें लेबनान भी शामिल है, और संसद अध्यक्ष बेरी ने इज़राइली आक्रमण रोकने के लिए बाध्यकारी खंड डालने पर ईरान का आभार जताया है। इस समझौते को एक ऐसी सफलता के रूप में देखा जा रहा है जो लेबनान की संप्रभुता की रक्षा करती है और सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करती है।
इज़राइल के कट्टर दक्षिणपंथी मंत्री ने अमेरिका-ईरान समझौते को ग़ैर-बाध्यकारी बताकर गुस्से से खारिज कर दिया और लेबनान पर हमले जारी रखने पर ज़ोर दिया। हिज़बुल्लाह ने समझौते का स्वागत किया और ईरान ने स्थिति पर कड़ी नज़र रखने का वादा किया। इस विवरण में इज़राइल को शांति में बाधक के रूप में दिखाया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय सहमति के बावजूद अपना आक्रमण जारी रखने पर तुला है।
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