
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच इज़रायल का लेबनान पर घातक ड्रोन हमला, यूरोपीय संघ ने जताई चिंता
वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने वाले समझौते की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही दक्षिण लेबनान में हुई पहली मौत ने क्षेत्रीय तनाव को फिर गहरा दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच सभी मोर्चों पर युद्धविराम की घोषणा के साथ ही सोमवार को वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा मोड़ आया, लेकिन इसके चंद घंटों बाद ही दक्षिण लेबनान में इज़रायली ड्रोन हमले ने पूरे समझौते की नींव हिला दी। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने ब्रसेल्स में स्पष्ट किया कि सदस्य देशों के विदेश मंत्री इस बात पर सहमत हैं कि लेबनान को भी इस अमेरिका-ईरान युद्धविराम के दायरे में लाया जाना चाहिए। जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मेर्ट्स ने इस समझौते को वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अहम बताते हुए जोर दिया कि इसमें लेबनान की स्थिति को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
इस कूटनीतिक सहमति के बीच, इज़रायल ने सोमवार शाम दक्षिण लेबनान के कफ़रतिबनीत और हारिस क्षेत्र में एक वाहन को ड्रोन से निशाना बनाया, जिसमें चालक की मौत हो गई। लेबनानी सुरक्षा सूत्रों और राजकीय मीडिया के अनुसार, यह अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा के बाद इज़रायल की पहली घातक कार्रवाई है। स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया कि बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने समझौते की घोषणा के बाद भी दक्षिण लेबनान के गांवों पर हवाई और तोपखाने से हमले जारी रखे, जिसे कई विश्लेषक समझौते को विफल करने की जानबूझकर की गई कोशिश मान रहे हैं। वहीं हिज़्बुल्लाह ने भी इज़रायली सैन्य वाहनों को रॉकेट से निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की, जिससे इलाके में तनाव और बढ़ गया।
वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच भी असहजता के संकेत मिले। फ़ॉक्स न्यूज़ के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बेरूत पर हमलों को लेकर नेतन्याहू की आलोचना करते हुए सीधे सवाल किया, “तुम यह क्या कर रहे हो?” दूसरी ओर, यूरोपीय संघ इज़रायल के आंतरिक सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर पर प्रतिबंध लगाने को लेकर एकमत नहीं हो सका, हालांकि फ्रांस सहित कई देशों ने फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ अनैतिक कार्रवाइयों के लिए बेन-गवीर और वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच पर स्वतंत्र रूप से पाबंदियां पहले ही लगा दी थीं।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिका-ईरान समझौता भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत हो, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त में इसकी पकड़ बेहद कमज़ोर है। लेबनान, जो पहले से ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है, एक बार फिर बड़ी शक्तियों के बीच खींचतान का मैदान बन गया है। दक्षिण एशिया के लिए इसका सबक यह है कि पश्चिम एशिया में कोई भी युद्धविराम तब तक अधूरा है जब तक क्षेत्रीय शक्तियां उसका पालन करने को तैयार न हों। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को न केवल समझौते की शर्तों को स्पष्ट करना होगा, बल्कि उल्लंघन करने वालों पर ठोस दबाव भी डालना होगा, वरना यह युद्धविराम कागज़ी दस्तावेज़ बनकर रह सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा के तुरंत बाद दक्षिण लेबनान में इज़रायली ड्रोन हमले को नेतन्याहू सरकार द्वारा जानबूझकर की गई तोड़फोड़ के रूप में देखा जा रहा है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कालास और जर्मन चांसलर मेर्ट्ज़ ने जोर देकर कहा कि लेबनान को इस समझौते के दायरे में लाया जाना चाहिए, लेकिन इज़रायल का यह कदम व्यापक युद्धविराम को कमज़ोर करने की मंशा दिखाता है।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद दक्षिण लेबनान में पहला शहीद: इज़रायली ड्रोन ने कफ़र तिब्नीत चौराहे पर एक कार को निशाना बनाया, जिससे चालक की मौत हो गई। रिपोर्ट शांत, तथ्यात्मक लहजे में दी गई है, जिसमें पीड़ित और निवासियों की वापसी पर ध्यान केंद्रित किया गया है, समझौते या राजनीतिक दोष पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी गई।
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