
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच यूरोपीय एजेंसी ने खाड़ी देशों के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी
ईएएसए ने बहरीन, कुवैत, कतर, यूएई और ओमान की खाड़ी के ऊपर सभी ऊंचाइयों पर उड़ान न भरने की सलाह 29 जुलाई तक जारी की, जिससे अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है।
यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (ईएएसए) ने 14 जुलाई को एक संघर्ष क्षेत्र सूचना बुलेटिन जारी कर यूरोपीय और गैर-यूरोपीय एयरलाइनों को बहरीन, कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान की खाड़ी के पश्चिमी भाग (58 डिग्री पूर्व देशांतर के पश्चिम) के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी। यह सलाह 29 जुलाई तक प्रभावी रहेगी और सभी उड़ान स्तरों पर लागू होगी। ईएएसए के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े सैन्य तनाव के कारण नागरिक विमानों के लिए "उच्च जोखिम" उत्पन्न हो गया है। एजेंसी ने पिछले सप्ताह ही अस्थायी युद्धविराम के बाद अपनी चेतावनी वापस ली थी, लेकिन अब इसे और सख्त प्रतिबंधों के साथ पुनः लागू किया गया है।
ईएएसए के आकलन में कहा गया कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए रखने के प्रयास, वाणिज्यिक जहाजों पर बार-बार हमले और अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में जोखिम बढ़ा दिया है। ईरानी सैन्य सूत्रों के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में एक अमेरिकी एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने ईरान के पूर्व बयानों का हवाला देते हुए यूएई में अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह अद्यतन की, जिसमें कहा गया कि ईरान खाड़ी में अमेरिका और इज़राइल से जुड़े ठिकानों को निशाना बना सकता है। इस बीच, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी जहाजरानी की नाकेबंदी फिर से लागू करने और इस जलमार्ग की सुरक्षा के लिए 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने का प्रस्ताव रखा है।
इस घटनाक्रम के बीच इज़राइली अधिकारियों ने दुबई के लिए उड़ानों पर प्रतिबंध अक्टूबर अंत तक बढ़ा दिया है, हालांकि फ्लाईदुबई और एतिहाद जैसी स्थानीय एयरलाइनें अधिकांश रूटों पर परिचालन जारी रखे हुए हैं। लुफ्थांसा, ब्रिटिश एयरवेज और कैथे पैसिफिक समेत कई अंतरराष्ट्रीय वाहकों ने यूएई के लिए अपनी सेवाएं निलंबित या सीमित कर दी हैं। ईएएसए ने ईरान, इराक और लेबनान के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह को भी अगस्त के अंत तक बढ़ा दिया है। एयरलाइनों को रूट बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उड़ान अवधि लंबी हो रही है और ईंधन आवश्यकताएं बढ़ रही हैं। दुबई हवाई अड्डों का परिचालन सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी एयरलाइन के आधिकारिक चैनलों से उड़ान स्थिति की पुष्टि करते रहें।
ईएएसए ने चेतावनी दी कि क्षेत्र में प्रमुख अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी से मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा बना हुआ है, और वायु रक्षा प्रणालियों के सक्रिय होने से नागरिक विमानों की गलत पहचान होने की आशंका है। एजेंसी यूरोपीय आयोग और सदस्य देशों के साथ स्थिति की निगरानी कर रही है और 29 जुलाई से पहले जोखिम स्तर की समीक्षा कर सकती है। सैन्य गतिविधियों में तेजी से बदलाव के कारण एयरलाइनों के पास रूट बदलने या प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया देने का सीमित समय रह सकता है, इसलिए यात्रियों को अल्प सूचना पर कार्यक्रम बदलाव के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | 0.00 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.50 | critical |
The report presents facts without interpretation: the EASA advisory and the UK update are laid out objectively.
The account cites only official sources (EASA, FCDO) without commentary, creating an impression of impartial information.
It omits the context of the temporary ceasefire between the US and Iran that had led to the earlier lifting of the warning.
Israel acts to protect its citizens by extending the flight ban, while foreign airlines follow their own assessments.
The narrative focuses on the Israeli state's decisions, presenting it as a rational and prudent actor, while the reasons of foreign airlines are only hinted at.
It does not mention that the EASA warning applies to all European carriers, not just Israeli ones, and that the Israeli ban is an additional measure.
The Iranian regime is the cause of tensions; EASA reactivated the warning after a temporary ceasefire, demonstrating Iran's dangerousness.
It uses the term 'regime' to delegitimize Iran and emphasizes the resumption of hostilities after a pause, reinforcing the idea of a constant threat.
It does not give voice to the Iranian position nor mention that the warning is precautionary, not based on an imminent attack.
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