
यूएई ने भारतीयों के लिए वीज़ा-ऑन-अराइवल शर्तें बदलीं, छह नए देशों को मिली छूट
संयुक्त अरब अमीरात ने ब्रिटेन के निवास वीज़ा वाले भारतीयों की सशर्त प्रवेश सुविधा समाप्त कर दी, जबकि इंडोनेशिया समेत छह देशों के नागरिकों के लिए पूर्व-स्वीकृत प्रवेश परमिट का विस्तार किया गया।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की संघीय पहचान, नागरिकता, सीमा शुल्क एवं बंदरगाह सुरक्षा प्राधिकरण (आईसीपी) ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए सशर्त वीज़ा-ऑन-अराइवल नीति में संशोधन की घोषणा की है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, केवल ब्रिटेन के निवास वीज़ा के आधार पर यह सुविधा पाने वाले भारतीय नागरिक अब पात्र नहीं रहेंगे। वहीं, वैध अमेरिकी या यूरोपीय संघ के विज़िट या निवास वीज़ा या अमेरिकी ग्रीन कार्ड रखने वालों के लिए 14 दिन की वीज़ा-ऑन-अराइवल बरकरार रहेगी। आईसीपी ने कार्यान्वयन की तिथि अभी निर्धारित नहीं की है, लेकिन 60 दिन की नई सशर्त वीज़ा-ऑन-अराइवल योजना पर भी विचार कर रहा है।
यूएई ने इसी अवधि में इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, वियतनाम, केन्या और दक्षिण अफ्रीका के नागरिकों के लिए पूर्व-स्वीकृत प्रवेश परमिट कार्यक्रम का विस्तार किया है। अमीरात एयरलाइंस और वीएफएस ग्लोबल द्वारा संचालित इस सुविधा के तहत, पात्र यात्री बिना पूर्व वीज़ा के 14 दिन तक रह सकते हैं, बशर्ते उनके पास वापसी या आगे की यात्रा का टिकट हो और ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ब्रिटेन, अमेरिका या यूरोपीय संघ के किसी सदस्य देश का कम से कम छह महीने की वैधता वाला निवास परमिट हो। वीएफएस ग्लोबल के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी जितेन व्यास ने इसे यूएई को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
वैश्विक स्तर पर प्रवेश नियमों में बदलाव का यह दौर एक साथ ढील और सख्ती का मिलाजुला रुख दर्शाता है। केप वर्डे के विदेशी एवं सीमा निदेशालय (डीईएफ) ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और अनियमित प्रवासन को कम करने के उद्देश्य्य से 96 देशों के नागरिकों के लिए वीज़ा-ऑन-अराइवल स्थगित कर अनिवार्य कांसुलर वीज़ा प्रक्रिया लागू कर दी है। प्रभावित देशों में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका सहित 28 अफ्रीकी, 31 एशियाई-मध्य पूर्वी, 22 अमेरिकी-कैरिबियाई तथा 10 यूरोपीय-ओशिनियाई राष्ट्र शामिल हैं। वहीं, आर्मीनिया के विदेश मंत्रालय ने पर्यटन को गति देने के लिए संयुक्त अरब अमीरात, खाड़ी सहयोग परिषद के अन्य सदस्य देशों और यूरोपीय संघ के निवासियों के लिए वीज़ा-मुक्त प्रवेश की अस्थायी छूट को 1 जुलाई 2027 तक बढ़ा दिया है।
दक्षिण एशियाई यात्रियों पर इन नीतियों का सीधा प्रभाव पड़ेगा। भारतीय पर्यटकों और व्यावसायिक यात्रियों, जो अब तक ब्रिटेन के निवास वीज़ा के सहारे यूएई की सशर्त वीज़ा-ऑन-अराइवल सुविधा का लाभ उठाते थे, को अब नियमित पर्यटक वीज़ा लेना होगा। आव्रजन विशेषज्ञों के अनुसार, एयरलाइंस बोर्डिंग से पहले वीज़ा पात्रता का प्रमाण मांग सकती हैं। इस बीच, अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास ने प्रशासनिक कारणों से आउटसोर्सिंग भागीदार अलहिंद टूर्स एंड ट्रैवल को सेवा हस्तांतरण में विलंब के चलते पासपोर्ट, वीज़ा और अटेस्टेशन जैसी कांसुलर सेवाएं अस्थायी रूप से सीधे वॉक-इन आधार पर प्रदान करना शुरू कर दिया है।
अमेरिका ने जुलाई से दिसंबर 2026 तक एक पायलट कार्यक्रम के तहत व्यावसायिक और पर्यटक वीज़ा आवेदकों को 750 डॉलर अतिरिक्त शुल्क पर शीघ्र साक्षात्कार की सुविधा दी है, जबकि कुवैत ने विदेशी निवेशकों के लिए 15 वर्षीय दीर्घकालिक निवास परमिट योजना आरंभ की है। यूएई में भारतीयों के लिए संशोधित वीज़ा-ऑन-अराइवल नियमों की प्रभावी तिथि की घोषणा शेष है, और 60 दिन की प्रस्तावित सुविधा पर अंतिम निर्णय आना बाकी है। केप वर्डे की नई अनिवार्य कांसुलर वीज़ा व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो चुकी है।
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.30 | aligned |
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| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
The UAE government updates rules to facilitate tourism and business, confirming the system's flexibility.
Presents the change as a technical and positive evolution, without mentioning any criticism or inconvenience.
Indian travelers must adapt to a new visa landscape, balancing losses and new opportunities.
Emphasizes the mixed effect, using a tone of caution and practical advice, without assigning blame.
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