
मॉस्को अदालत ने मानवाधिकार कार्यकर्ता लेव पोनोमार्योव को अनुपस्थिति में 5.5 वर्ष कारावास की सजा सुनाई
पश्चिमी मानवाधिकार समूहों के अनुसार, यह मामला रूस में राजनीतिक असंतोष को दबाने के लिए 'विदेशी एजेंट' और 'अवांछित' कानूनों के इस्तेमाल का ताजा उदाहरण है।
मॉस्को के खोरोशेव्स्की जिला न्यायालय ने 84 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता लेव पोनोमार्योव को अनुपस्थिति में साढ़े पांच साल के कारावास और नौ साल तक वेबसाइट प्रशासन पर प्रतिबंध की सजा सुनाई। अदालत ने उन्हें 'विदेशी एजेंट' दायित्वों की अनदेखी (सोशल मीडिया पोस्ट पर अनिवार्य लेबल न लगाना) और एक 'अवांछित' संगठन की गतिविधियों के संचालन का दोषी पाया। यह संगठन 'आंद्रेई सखारोव संस्थान' है, जिसे पोनोमार्योव ने 2022 में पेरिस में स्थापित किया था। सजा उनके प्रत्यर्पण या रूस लौटने पर लागू होगी; फिलहाल वे विदेश में हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पोनोमार्योव पहले जुर्माने के बावजूद अपनी सामग्री पर 'विदेशी एजेंट' का चिह्न लगाने में बार-बार विफल रहे, और 2024 में संस्थान के 'अवांछित' घोषित होने के बाद भी उसका संचालन जारी रखा। अदालत में बताया गया कि संस्थान ऐसी सामग्री वितरित करता था जो 'विरोध की भावना भड़काने और राज्य सत्ता को बदनाम करने' के लिए थी। पोनोमार्योव के सरकारी वकील ने कहा कि वे अपने मुवक्किल के रुख से अवगत नहीं हैं। स्वयं संस्थान के अनुसार, उसका उद्देश्य दमन के बीच रूसी नागरिक समाज की मदद करना, राजनीतिक शरणार्थियों और सेना छोड़ने वालों की सहायता करना, तथा युद्ध समाप्ति और लोकतंत्र की बहाली पर विशेषज्ञ चर्चा का मंच तैयार करना है।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार पर्यवेक्षकों का कहना है कि रूसी प्रशासन 'विदेशी एजेंट' और 'अवांछित' कानूनों का इस्तेमाल सीमा पार सक्रिय असंतुष्टों को निशाना बनाने के लिए कर रहा है। पोनोमार्योव को 2020 में पहली बार 'विदेशी एजेंट' सूची में डाला गया था, उनका आंदोलन 'फॉर ह्यूमन राइट्स' भंग कर दिया गया, और वे सोशल मीडिया पर लेबल न लगाने पर जुर्माना भरने वाले पहले व्यक्ति बने। 2022 में यूक्रेन युद्ध के विरोध में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने रूस छोड़ दिया। इस मामले में वेबसाइट प्रशासन पर नौ साल का प्रतिबंध भी लगाया गया है, जिसे मीडिया रिपोर्टें उनकी ऑनलाइन सक्रियता को सीमित करने के उपाय के रूप में देखती हैं।
दक्षिण एशिया के संदर्भ में, विशेषज्ञ बताते हैं कि नागरिक समाज को नियंत्रित करने के लिए 'विदेशी एजेंट' जैसे कानूनों का चलन वैश्विक है। भारत में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत गैर-सरकारी संगठनों पर प्रतिबंधों को लेकर भी ऐसी ही बहस होती रही है। विश्लेषकों के अनुसार, ये कानूनी ढाँचे संप्रभुता की रक्षा के नाम पर घरेलू वकालत को सीमित करने की प्रवृत्ति का हिस्सा हैं। पोनोमार्योव के मामले में अगला कदम संभावित अपील है, लेकिन उनके फ्रांस में होने और यूरोपीय देशों द्वारा मानवाधिकार चिंताओं के चलते प्रत्यर्पण की संभावना कम होने से फैसले का तत्काल क्रियान्वयन मुश्किल है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.70 | critical |
रूस विदेशी एजेंटों और अवांछनीय संगठनों के खिलाफ कानून लागू करता है, नियमों का उल्लंघन करने वालों को दंडित करता है।
कथा मुकदमे को कानून के सामान्य अनुप्रयोग के रूप में प्रस्तुत करती है, सजा को वैध बनाने के लिए कानूनी भाषा का उपयोग करती है।
यह इस तथ्य को छोड़ देता है कि पोनोमार्योव 84 वर्ष के हैं और एक अनुभवी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, साथ ही रूस के विदेशी एजेंट कानूनों की अंतर्राष्ट्रीय आलोचना भी।
रूस दमनकारी कानूनों का उपयोग करके मानवाधिकार रक्षकों को दबाता है, देश को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से और अलग करता है।
कथा मामले को व्यवस्थित दमन के व्यापक संदर्भ में रखती है, विदेशी एजेंट कानून के तहत पहले प्रतिवादी के संदर्भ का उपयोग करके वृद्धि को उजागर करती है।
यह रूसी सरकार के दृष्टिकोण को छोड़ देता है जो कानूनों को राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए आवश्यक मानती है।
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