
चार महीने के ठहराव के बाद रास तनूरा टर्मिनल से तेल लदान फिर शुरू, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जोखिम घटा
सऊदी अरामको ने शुक्रवार को खाड़ी स्थित अपने सबसे बड़े निर्यात केंद्र पर कच्चे तेल की लोडिंग दोबारा प्रारंभ की, जो अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते के बाद क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला में सुधार का संकेत है।
सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी अरामको ने शुक्रवार को रास तनूरा टर्मिनल से कच्चे तेल का लदान पुनः आरंभ कर दिया। एलएसईजी के शिपिंग आंकड़ों के अनुसार, दो वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (वीएलसीसी) टर्मिनल पर तेल भर रहे थे और तीसरा पास में प्रतीक्षारत था। यह विकास लगभग चार महीने के निलंबन के बाद हुआ है, जिसकी शुरुआत 8 मार्च को हुई थी जब ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर दिया था। रास तनूरा सऊदी कच्चे तेल के निर्यात का प्रमुख केंद्र है, जो युद्ध-पूर्व कुल विदेशी शिपमेंट का 80 से 90 प्रतिशत संभालता था।
यह ठहराव फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव का प्रत्यक्ष परिणाम था। तेहरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के साथ-साथ रास तनूरा के टर्मिनल, उसकी रिफाइनरी और आसपास के तेल क्षेत्रों पर हमले किए, जिससे खाड़ी क्षेत्र से होने वाला निर्यात पूरी तरह ठप हो गया। इस दौरान सऊदी अरब को अपने निर्यात को सीमित मात्रा में लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह की ओर मोड़ना पड़ा, लेकिन वहां की क्षमता रास तनूरा की तुलना में काफी कम थी। अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते के बाद अब जलडमरूमध्य से आवाजाही बहाल हुई है, जिससे खाड़ी देशों का तेल निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर के 75 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए यह घटनाक्रम अहम है। सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है और ओपेक के अनुसार जनवरी में उसका उत्पादन प्रतिदिन लगभग एक करोड़ बैरल था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के आंकड़े बताते हैं कि युद्ध के दौरान सऊदी अरब का कुल द्रव हाइड्रोकार्बन उत्पादन 1.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन से गिरकर लगभग 80 लाख बैरल रह गया था। भारत जैसे प्रमुख एशियाई आयातकों के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से खरीदते हैं, रास तनूरा की बहाली आपूर्ति स्थिरता का संकेत है। हालांकि, उत्पादन अभी भी युद्ध-पूर्व स्तर से नीचे है, जिससे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि रास तनूरा से लदान की बहाली अभी प्रारंभिक चरण में है और पूर्ण क्षमता बहाली में समय लग सकता है। अरामको ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन शिपिंग डेटा से संकेत मिलता है कि परिचालन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव होगा ओपेक की अगली बैठक और अमेरिका-ईरान के बीच स्थायी समझौते की दिशा में प्रगति, जो खाड़ी क्षेत्र से दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक होगी।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.50 | critical |
The resumption of shipments is a positive step, but we cannot let our guard down: Iran remains the primary threat to maritime security. Our role is to ensure that oil flows are not disrupted by acts of aggression.
It subordinates an economic event to a security framework, making Gulf stability dependent on American deterrence and management of the Iranian threat.
The reopening of the Saudi terminal changes nothing: the real conflict is between those who submit to the American-Zionist axis and those who resist. We denounce this normalization as a betrayal of the Palestinian cause and Arab sovereignty.
It minimizes an economic event by neutralizing it through an ideological lens that opposes 'resistance' to 'normalization', making any regional development secondary to the main struggle.
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