
पुतिन ने 20 सितंबर को संसदीय चुनावों की घोषणा की, यूक्रेन युद्ध के बाद पहला बड़ा चुनावी परीक्षण
रूस में 18 से 20 सितंबर तक तीन दिवसीय मतदान होगा, जिसमें पहली बार यूक्रेन के कब्जे वाले इलाकों से भी सांसद चुने जाएंगे।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 16 जून को एक आधिकारिक डिक्री पर हस्ताक्षर कर नौवीं स्टेट ड्यूमा के चुनावों की तारीख 20 सितंबर 2026 तय कर दी, जिसके साथ ही चुनावी अभियान का औपचारिक आगाज़ हो गया। केंद्रीय चुनाव आयोग की अध्यक्ष एला पाम्फिलोवा ने तुरंत घोषणा की कि चुनावी तैयारियों से जुड़ी कार्रवाइयां शुरू हो गई हैं। हालांकि मतदान की आधिकारिक तारीख 20 सितंबर है, लेकिन पिछले चुनावों की तरह इस बार भी वोटिंग तीन दिनों तक चलेगी—18 से 20 सितंबर तक—और कई क्षेत्रों में दूरस्थ इलेक्ट्रॉनिक मतदान की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक है। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद यह पहला संसदीय चुनाव है, और पहली बार रूस उन चार यूक्रेनी क्षेत्रों—दोनेत्स्क, लुहान्स्क, ज़ापोरिज्झिया और ख़ेरसॉन—में भी मतदान कराएगा जिन्हें 2022 में अवैध रूप से अपने में मिलाने की घोषणा की गई थी। क्रीमिया में तो इससे पहले भी चुनाव हो चुके हैं, लेकिन इन नए इलाकों को शामिल करना क्रेमलिन के लिए एक प्रतीकात्मक और प्रशासनिक चुनौती दोनों है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कदम की व्यापक निंदा हुई है, जबकि मॉस्को इसे इन क्षेत्रों के 'एकीकरण' के रूप में पेश कर रहा है।
चुनावी ढांचे की बात करें तो 450 सीटों वाली ड्यूमा के लिए आधे सांसद पार्टी सूचियों के ज़रिए और आधे एकल-जनादेश वाले निर्वाचन क्षेत्रों से चुने जाएंगे। कुल 17 पार्टियों को चुनाव लड़ने का अधिकार है, जिनमें से 12 बिना हस्ताक्षर अभियान के सीधे मैदान में उतर सकती हैं। सत्तारूढ़ 'यूनाइटेड रशिया' पार्टी के लिए राष्ट्रपति प्रशासन ने 55 प्रतिशत वोट का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो 2021 में मिले 49.8 प्रतिशत से अधिक है लेकिन 2016 के 54.2 प्रतिशत के आसपास है। यह आंकड़ा बताता है कि युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद क्रेमलिन अपनी चुनावी मशीनरी पर पूर्ण नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
इसी दिन 11 क्षेत्रों के गवर्नर और 39 क्षेत्रीय संसदों के चुनाव भी होंगे, जिससे यह एक व्यापक चुनावी महापर्व बन जाएगा। केंद्रीय चुनाव आयोग 17 जून को बैठक कर चुनावी कैलेंडर और बहु-दिवसीय मतदान की प्रक्रिया को अंतिम रूप देगा। तीन दिन का मतदान और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग ऐसे तरीके हैं जिनकी पारदर्शिता पर विपक्ष और स्वतंत्र पर्यवेक्षक लगातार सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन महामारी के बाद से ये रूसी चुनावों का स्थायी हिस्सा बन गए हैं।
वैश्विक नज़रिए से देखें तो यह चुनाव पुतिन और उनकी पार्टी की लोकप्रियता की अहम परीक्षा होगी, खासकर तब जब चार साल से अधिक समय से जारी युद्ध ने अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरी छाप छोड़ी है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए, जो रूस के साथ रणनीतिक संबंध बनाए हुए है, इस चुनाव का सीधा प्रभाव भले सीमित हो, लेकिन रूसी शासन की स्थिरता और वैश्विक शक्ति संतुलन पर इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। आने वाले महीने बताएंगे कि क्रेमलिन कब्ज़े वाले इलाकों में मतदान को कैसे अंजाम देता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस प्रक्रिया को किस रूप में देखता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पुतिन ने 20 सितंबर को ड्यूमा चुनावों की घोषणा की है, जिसमें तीन दिन का मतदान होगा और कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में भी मतदान केंद्र होंगे। पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद यह पहली बार है जब रूस इन क्षेत्रों में संसदीय चुनाव करा रहा है, इसे अवैध कब्जे को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।
राष्ट्रपति पुतिन ने 20 सितंबर 2026 को राज्य ड्यूमा चुनाव निर्धारित करने वाले डिक्री पर हस्ताक्षर किए। मतदान तीन दिनों तक चलेगा और पहली बार इसमें डोनेट्स्क, लुहान्स्क, ज़ापोरिज़िया और ख़ेरसॉन क्षेत्र शामिल होंगे, जो 2022 में रूस का हिस्सा बन गए थे। केंद्रीय चुनाव आयोग ने आधिकारिक रूप से अभियान की शुरुआत कर दी।
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