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मंगलवार, 16 जून 2026

वैश्विक आवास निर्माण में मंदी: अमेरिका से ईरान तक संकट के बादल

अमेरिका में आवास निर्माण 15.4% गिरकर छह साल के निचले स्तर पर, ईरान में खरीदार नदारद, रूस में नए-पुराने मकानों की कीमतों का अंतर घटा, और स्विट्ज़रलैंड आपूर्ति बढ़ाने की राह में अटका।

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका से आया ताजा आंकड़ा वैश्विक आवास क्षेत्र की गहराती कठिनाइयों को रेखांकित करता है। मई माह में नए मकानों का निर्माण अप्रैल की तुलना में 15.4 प्रतिशत लुढ़ककर महज 11.8 लाख की वार्षिक दर पर आ गया, जो 2020 के बाद का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। ब्लूमबर्ग द्वारा सर्वेक्षित सभी अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से यह गिरावट कहीं अधिक तीखी रही, जबकि निर्माण अनुमतियों में भी 0.7 प्रतिशत की नरमी दर्ज हुई। बिल्डर अब नई परियोजनाएं शुरू करने के बजाय पहले से तैयार मकानों की बिक्री पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों और महंगाई ने खरीदारों की क्षमता को कमजोर कर दिया है।

इसी तरह की तस्वीर पश्चिम एशिया के बाजारों में भी उभर रही है। ईरान की राजधानी तेहरान में रियल एस्टेट यूनियन की उपाध्यक्ष के अनुसार, बड़ी संख्या में निर्माण परियोजनाएं या तो रुक गई हैं या पूरी तरह छोड़ दी गई हैं। मकान मौजूद हैं, लेकिन खरीदार नहीं हैं। इसकी प्रमुख वजह जमीन की कीमतों में उछाल, निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत, वित्तपोषण की कठिनाइयां और निर्माण ऋणों की घटती प्रभावशीलता है। पहले ऐसे ऋण किसी इकाई की लागत का बड़ा हिस्सा कवर कर लेते थे, अब उनका योगदान बेहद सीमित रह गया है। लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और खरीदारों की गिरती क्रयशक्ति ने संकट को और गहरा दिया है।

रूस के दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में एक अलग किस्म का बदलाव देखने को मिल रहा है। वहां नवनिर्मित और पुराने मकानों की कीमतों के बीच का अंतर तेजी से घट रहा है। निज़नी नोवगोरोद में एक साल पहले द्वितीयक बाजार 21 प्रतिशत सस्ता था, जो अब सिकुड़कर 15 प्रतिशत रह गया है। पेर्म में यह अंतर 29 से 24 प्रतिशत, ऊफ़ा में 25 से 21 प्रतिशत और कज़ान में 17 से 13 प्रतिशत पर आ गया। विशेषज्ञ इसे नई परियोजनाओं की ऊंची लागत और मांग के द्वितीयक बाजार की ओर खिसकने का संकेत मान रहे हैं, जो निर्माण क्षेत्र के लिए दबाव पैदा कर सकता है।

यूरोप का संपन्न देश स्विट्ज़रलैंड भी आवास आपूर्ति का संकट झेल रहा है। वहां जनसंख्या वृद्धि को सीमित करने वाली एक पहल को जनमत संग्रह में खारिज कर दिया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि समाधान पहुंच पर रोक लगाने में नहीं, बल्कि निर्माण बढ़ाने में है। फिर भी, 2015-19 के दौरान सालाना 51,000 से अधिक आवासीय इकाइयां बनाने वाला देश 2020-24 में 46,000 के नीचे खिसक गया, जबकि हर साल 50,000 से अधिक नए परिवार बन रहे हैं। नियामक अड़चनें, बिखरी जिम्मेदारियां और वित्तीय बाधाएं रफ्तार पकड़ने में रोड़ा बनी हुई हैं।

यह वैश्विक परिदृश्य दक्षिण एशिया, खासकर भारत के लिए भी चेतावनी लेकर आता है। भारत में शहरीकरण की तेज रफ्तार और किफायती आवास की भारी कमी पहले से ही चुनौती है। निर्माण लागत में इजाफा, वित्तपोषण की कठिनाइयां और नियामक जटिलताएं वैसी ही बाधाएं हैं जो ईरान और स्विट्ज़रलैंड में दिख रही हैं। यदि नीतिगत हस्तक्षेप से आपूर्ति पक्ष को मजबूत नहीं किया गया, तो मकानों की कमी और कीमतों का दबाव सामाजिक तनाव को जन्म दे सकता है। अमेरिकी मंदी यह भी संकेत देती है कि ऊंची ब्याज दरों के दौर में मांग को कृत्रिम रूप से उभारना कठिन है, इसलिए संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देना ही आगे की राह होगी।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

41%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa iraniana e affiniStampa russa e CSI
Stampa iraniana e affini/ regime
allarmevittimismo

ईरान का आवास क्षेत्र गहरे संकट में है: तेहरान में निर्माण परियोजनाएं बढ़ती लागत, महंगी ज़मीन और कमज़ोर ऋण प्रभाव के कारण रुकी या छोड़ी गई हैं। बिल्डरों में नई परियोजनाएं शुरू करने की प्रेरणा नहीं है और आपूर्ति-मांग का अंतर बढ़ता जा रहा है।

Stampa russa e CSI/ business
pragmatismodistacco

रूस के बड़े शहरों में नए और पुराने आवासों के दामों का अंतर घट रहा है, कुछ शहरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई। इस बीच, नए फ्लैटों का औसत आकार छोटा होता जा रहा है क्योंकि खरीदार किस्त पर ध्यान दे रहे हैं।

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वैश्विक आवास निर्माण में मंदी: अमेरिका से ईरान तक संकट के बादल

अमेरिका में आवास निर्माण 15.4% गिरकर छह साल के निचले स्तर पर, ईरान में खरीदार नदारद, रूस में नए-पुराने मकानों की कीमतों का अंतर घटा, और स्विट्ज़रलैंड आपूर्ति बढ़ाने की राह में अटका।

दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका से आया ताजा आंकड़ा वैश्विक आवास क्षेत्र की गहराती कठिनाइयों को रेखांकित करता है। मई माह में नए मकानों का निर्माण अप्रैल की तुलना में 15.4 प्रतिशत लुढ़ककर महज 11.8 लाख की वार्षिक दर पर आ गया, जो 2020 के बाद का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। ब्लूमबर्ग द्वारा सर्वेक्षित सभी अर्थशास्त्रियों के अनुमानों से यह गिरावट कहीं अधिक तीखी रही, जबकि निर्माण अनुमतियों में भी 0.7 प्रतिशत की नरमी दर्ज हुई। बिल्डर अब नई परियोजनाएं शुरू करने के बजाय पहले से तैयार मकानों की बिक्री पर जोर दे रहे हैं, क्योंकि ऊंची ब्याज दरों और महंगाई ने खरीदारों की क्षमता को कमजोर कर दिया है।

इसी तरह की तस्वीर पश्चिम एशिया के बाजारों में भी उभर रही है। ईरान की राजधानी तेहरान में रियल एस्टेट यूनियन की उपाध्यक्ष के अनुसार, बड़ी संख्या में निर्माण परियोजनाएं या तो रुक गई हैं या पूरी तरह छोड़ दी गई हैं। मकान मौजूद हैं, लेकिन खरीदार नहीं हैं। इसकी प्रमुख वजह जमीन की कीमतों में उछाल, निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत, वित्तपोषण की कठिनाइयां और निर्माण ऋणों की घटती प्रभावशीलता है। पहले ऐसे ऋण किसी इकाई की लागत का बड़ा हिस्सा कवर कर लेते थे, अब उनका योगदान बेहद सीमित रह गया है। लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं और खरीदारों की गिरती क्रयशक्ति ने संकट को और गहरा दिया है।

रूस के दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में एक अलग किस्म का बदलाव देखने को मिल रहा है। वहां नवनिर्मित और पुराने मकानों की कीमतों के बीच का अंतर तेजी से घट रहा है। निज़नी नोवगोरोद में एक साल पहले द्वितीयक बाजार 21 प्रतिशत सस्ता था, जो अब सिकुड़कर 15 प्रतिशत रह गया है। पेर्म में यह अंतर 29 से 24 प्रतिशत, ऊफ़ा में 25 से 21 प्रतिशत और कज़ान में 17 से 13 प्रतिशत पर आ गया। विशेषज्ञ इसे नई परियोजनाओं की ऊंची लागत और मांग के द्वितीयक बाजार की ओर खिसकने का संकेत मान रहे हैं, जो निर्माण क्षेत्र के लिए दबाव पैदा कर सकता है।

यूरोप का संपन्न देश स्विट्ज़रलैंड भी आवास आपूर्ति का संकट झेल रहा है। वहां जनसंख्या वृद्धि को सीमित करने वाली एक पहल को जनमत संग्रह में खारिज कर दिया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि समाधान पहुंच पर रोक लगाने में नहीं, बल्कि निर्माण बढ़ाने में है। फिर भी, 2015-19 के दौरान सालाना 51,000 से अधिक आवासीय इकाइयां बनाने वाला देश 2020-24 में 46,000 के नीचे खिसक गया, जबकि हर साल 50,000 से अधिक नए परिवार बन रहे हैं। नियामक अड़चनें, बिखरी जिम्मेदारियां और वित्तीय बाधाएं रफ्तार पकड़ने में रोड़ा बनी हुई हैं।

यह वैश्विक परिदृश्य दक्षिण एशिया, खासकर भारत के लिए भी चेतावनी लेकर आता है। भारत में शहरीकरण की तेज रफ्तार और किफायती आवास की भारी कमी पहले से ही चुनौती है। निर्माण लागत में इजाफा, वित्तपोषण की कठिनाइयां और नियामक जटिलताएं वैसी ही बाधाएं हैं जो ईरान और स्विट्ज़रलैंड में दिख रही हैं। यदि नीतिगत हस्तक्षेप से आपूर्ति पक्ष को मजबूत नहीं किया गया, तो मकानों की कमी और कीमतों का दबाव सामाजिक तनाव को जन्म दे सकता है। अमेरिकी मंदी यह भी संकेत देती है कि ऊंची ब्याज दरों के दौर में मांग को कृत्रिम रूप से उभारना कठिन है, इसलिए संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देना ही आगे की राह होगी।

स्रोतों में मतभेद

— · 4 स्रोत · 3 भाषाएँ

41%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र71%
निंदक29%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa iraniana e affiniStampa russa e CSI
Stampa iraniana e affini/ regime
allarmevittimismo

ईरान का आवास क्षेत्र गहरे संकट में है: तेहरान में निर्माण परियोजनाएं बढ़ती लागत, महंगी ज़मीन और कमज़ोर ऋण प्रभाव के कारण रुकी या छोड़ी गई हैं। बिल्डरों में नई परियोजनाएं शुरू करने की प्रेरणा नहीं है और आपूर्ति-मांग का अंतर बढ़ता जा रहा है।

Stampa russa e CSI/ business
pragmatismodistacco

रूस के बड़े शहरों में नए और पुराने आवासों के दामों का अंतर घट रहा है, कुछ शहरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई। इस बीच, नए फ्लैटों का औसत आकार छोटा होता जा रहा है क्योंकि खरीदार किस्त पर ध्यान दे रहे हैं।

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