
शार्क हमले की दहशत से लेकर व्हेल की रिहाई तक: ऑस्ट्रेलिया के समुद्रों में तकनीक और मानव-प्रकृति टकराव
सिडनी के कूजी बीच पर एक शिक्षिका को ग्रेट व्हाइट शार्क ने बुरी तरह जख्मी कर दिया, जिसके बाद एआई ड्रोन निगरानी पर बहस तेज हो गई है, वहीं मछुआरों के लिए सोनार तकनीक और समुद्री मलबे में फंसी व्हेल नए सवाल खड़े कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट पर एक सप्ताह के भीतर दो बिल्कुल अलग घटनाओं ने समुद्र और इंसान के बदलते रिश्तों को उजागर कर दिया है। सबसे चर्चित मामला सिडनी के कूजी बीच का है, जहां 35 वर्षीय शिक्षिका लीआ स्टीवर्ट पर ग्रेट व्हाइट शार्क ने उस वक्त हमला कर दिया जब वह तैराकी के लिए निर्धारित झंडों के बीच पानी में थीं। हमले में उनका बायां हाथ काटना पड़ा और परिवार के अनुसार वह अब भी अस्पताल में जीवन-मृत्यु से जूझ रही हैं। इस घटना ने 1922 की गर्मियों की याद ताजा कर दी, जब कूजी में दो युवक शार्क का शिकार हुए थे और सरकार को ऑस्ट्रेलिया की पहली शार्क-रोधी बाड़ लगानी पड़ी थी। अब न्यू साउथ वेल्स सरकार बुल शार्क को मारने की संभावना पर विचार कर रही है, लेकिन ग्रेट व्हाइट के लिए इससे इनकार करते हुए पूरी तरह तकनीकी समाधान की ओर बढ़ रही है।
इसी कड़ी में वैज्ञानिकों ने एआई-संचालित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली का खाका खींचा है। मैक्वेरी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कुलम ब्राउन के अनुसार, स्वायत्त ड्रोन खाड़ी के ऊपर लगातार उड़ान भर सकते हैं और ऑनबोर्ड सेंसर व कृत्रिम बुद्धिमत्ता से शार्क की मौजूदगी पहचान कर तुरंत अलार्म बजा सकते हैं। न्यू साउथ वेल्स पहले से ही समर सीजन में लोकप्रिय बीचों पर एआई ड्रोन तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है, जबकि पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया ने शार्क हमलों के बाद अलग नीतियां अपनाई हैं। भारतीय संदर्भ में देखें तो गोवा, केरल और तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों में भी कभी-कभी शार्क के देखे जाने या हमले की खबरें आती हैं, लेकिन एआई ड्रोन जैसा स्वचालित निगरानी तंत्र अभी दूर की बात है। हिंद महासागर के किनारे बसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग समुद्री सुरक्षा के एक सस्ते और कारगर मॉडल की संभावना दिखाता है।
समुद्र से जुड़ी तकनीक पर एक अलग बहस मछुआरों के बीच छिड़ी है। फॉरवर्ड-फेसिंग सोनार जैसे उपकरण, जिनकी कीमत हजारों डॉलर हो सकती है, अब पानी के भीतर मछलियों की रियल-टाइम तस्वीर पेश करते हैं। कुछ एंगलर्स इसे खेल की आत्मा के लिए खतरा मान रहे हैं तो कुछ इसे आधुनिकता का लाभ। दशकों से मत्स्य पत्रकारिता कर रहे गैरी कोर्सगाडेन का कहना है कि लोगों को चिंता है कि मछली पकड़ने का खेल कहां जा रहा है और क्या मछली आबादी इस दबाव को झेल पाएगी। इस बहस के बीच बैटमैंस बे के पास एक हंपबैक व्हेल को 46 मीटर लंबी मछली पकड़ने की रस्सी और बॉय से मुक्त कराने की घटना ने समुद्री मलबे की भयावहता सामने रखी। न्यू साउथ वेल्स राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव सेवा और समुद्री बचाव दल ने संयुक्त अभियान में व्हेल से 13 किलोग्राम वजनी रस्सी और समुद्री शैवाल हटाया, जिसके बाद उसकी गति सकारात्मक रूप से बेहतर पाई गई। यह घटना बताती है कि अत्याधुनिक सोनार भले ही मछुआरों को फायदा पहुंचाए, लेकिन छोड़े गए मछली पकड़ने के उपकरण समुद्री जीवों के लिए मौत का जाल बन रहे हैं।
आगे का विश्लेषण साफ संकेत देता है कि ऑस्ट्रेलिया को एक साथ कई मोर्चों पर संतुलन बनाना होगा: नागरिक सुरक्षा के लिए एआई ड्रोन जैसी तकनीक अपनाना, मत्स्य संसाधनों की स्थिरता के लिए सोनार उपयोग पर नियंत्रण करना, और समुद्री संरक्षण के लिए फंसे हुए जीवों की त्वरित रिहाई सुनिश्चित करना। दक्षिण एशिया, जो दुनिया के सबसे बड़े समुद्री तटों में से एक है, इससे सीख लेकर कम लागत वाले ड्रोन निगरानी कार्यक्रम शुरू कर सकता है और साथ ही मछली पकड़ने के उपकरणों से होने वाले प्रदूषण को सख्ती से रोकने की नीति बना सकता है। न्यू साउथ वेल्स और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के अलग रुख यह भी दर्शाते हैं कि तटीय प्रबंधन में स्थानीय पारिस्थितिकी और सामाजिक स्वीकार्यता को ध्यान में रखते हुए विविध समाधान निकालने होंगे।
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