
ब्राजील में रिकॉर्ड मांस उत्पादन, अर्जेंटीना में खपत 20 साल के निचले स्तर पर
वैश्विक गोमांस बाजार में विरोधाभास: ब्राजील का उत्पादन शिखर पर, अर्जेंटीना की घरेलू मांग ढही, अमेरिका में कीमतें बढ़ीं और भारत जैसे निर्यातकों के लिए नए समीकरण बन रहे हैं।
दक्षिण अमेरिका के दो सबसे बड़े गोमांस उत्पादक देशों से इस सप्ताह आए आँकड़े वैश्विक प्रोटीन बाजार की विचित्र तस्वीर पेश करते हैं। ब्राजील में पहली तिमाही में मवेशियों, सूअरों और मुर्गियों का वध ऐतिहासिक ऊँचाई पर पहुँच गया—10.29 करोड़ गोवंश, 1.52 करोड़ सूअर और 1.7 अरब मुर्गियाँ काटे गए, जो 1997 के बाद किसी भी पहली तिमाही का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। कुल मांस आपूर्ति 78 लाख टन रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 7% अधिक है। यह उछाल तब आया जब पिछले अनुमान उत्पादन में गिरावट की भविष्यवाणी कर रहे थे, लेकिन मज़बूत बाहरी माँग और आपूर्ति शृंखला की कुशलता ने रिकॉर्ड बनाए। हालाँकि, विश्लेषक आगे की चुनौतियों की चेतावनी भी दे रहे हैं, जिनमें वैश्विक बाजार की संतृप्ति और जलवायु अनिश्चितता शामिल हैं।
इसके ठीक विपरीत, अर्जेंटीना में गोमांस की घरेलू खपत मई में 6.1% गिरकर पिछले 20 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ गई। उद्योग संगठन सिक्रा के अनुसार, प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत घटकर 47.5 किलोग्राम रह गई, जबकि 2022 के सूखे ने पशुधन उपलब्धता को कम कर दिया और ऐतिहासिक रूप से ऊँची कीमतों ने क्रय शक्ति को क्षीण कर दिया। जनवरी-मई 2026 के दौरान उत्पादन 7.3% सिकुड़कर 11.68 लाख टन रहा। अर्जेंटीना का मांस क्षेत्र अब निर्यात के सहारे खड़ा है, लेकिन कमज़ोर अंतरराष्ट्रीय मूल्य और घरेलू मुद्रास्फीति उसकी राह कठिन बना रहे हैं।
उत्तरी अमेरिका में भी दबाव गहरा रहा है। अमेरिका में गोमांस की कीमतें 2025 की शुरुआत से चढ़ी हुई हैं, और अब मेक्सिको से फैला स्क्रूवर्म संक्रमण मवेशियों के झुंड को ख़तरे में डाल रहा है, जो सूखे के कारण पहले ही 1950 के दशक के स्तर तक सिमट चुका है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रंप ने अवैध प्रवासियों और फेंटानिल के प्रवाह को रोकने के लिए मेक्सिको पर नए शुल्क लगाने की धमकी दी है, जिससे व्यापार वार्ता अनिश्चित हो गई है। यदि आपूर्ति शृंखला बाधित होती है, तो अमेरिकी बर्गर की कीमत और बढ़ सकती है, जिसका असर वैश्विक मांस व्यापार प्रवाह पर पड़ेगा।
दक्षिण एशिया के लिए यह विरोधाभासी परिदृश्य अवसर और चुनौतियाँ दोनों लेकर आया है। भारत, जो भैंस के मांस का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है, ऊँची अमेरिकी कीमतों के कारण मूल्य-संवेदनशील बाज़ारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है। लेकिन ब्राज़ील की रिकॉर्ड आपूर्ति वैश्विक कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रख सकती है, जिससे भारतीय निर्यातकों का मार्जिन सीमित रहेगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में गोमांस कीमतों पर वैश्विक रुझानों का सीधा असर होगा। कुल मिलाकर, जलवायु आघात, पशु रोग और व्यापार नीतियों का यह मेल एक अस्थिर वैश्विक मांस बाजार की ओर इशारा करता है, जहाँ हर क्षेत्र अपनी अलग लय में चल रहा है।
संबंधित लेख
ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका समझौते को मंजूरी दी, ट्रंप को बताया 'हताश'
6 भाषाएँ · 25 स्रोत
अपराध एवं आपदाब्रिटेन के चिड़ियाघर में तीन साल के बच्चे को मगरमच्छ के बाड़े में फेंकने का आरोप, 30 वर्षीय व्यक्ति गिरफ्तार
6 भाषाएँ · 21 स्रोत
राजनीतिअमेरिका ने ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी हटाई, हॉरमुज़ जलडमरूमध्य से तेल प्रवाह बहाल
5 भाषाएँ · 22 स्रोत