
ली पेन के राजनीतिक भविष्य पर मंगलवार को आएगा फैसला, फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ तेज
पेरिस की अपील अदालत कल सहायक घोटाले में सजा पर फैसला सुनाएगी, जिससे मरीन ली पेन की 2027 की उम्मीदवारी तय होगी और जॉर्डन बार्डेला, एडुआर्ड फिलिप व क्रिस्टीन लेगार्ड जैसे विकल्प सामने आएंगे।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में मंगलवार को अपील अदालत उस फैसले पर मुहर लगाएगी जो न केवल मरीन ली पेन का राजनीतिक भविष्य तय करेगा, बल्कि 2027 के राष्ट्रपति चुनाव की पूरी दिशा को प्रभावित कर सकता है। यूरोपीय संसद के सहायकों से जुड़े धोखाधड़ी मामले में पिछले साल मार्च में ली पेन को चार साल की जेल (दो साल स्थगित) और पांच साल के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध की सजा सुनाई गई थी। यदि अपील अदालत इस प्रतिबंध को बरकरार रखती है या इसे दो साल से अधिक करार देती है, तो राष्ट्रीय रैली (आरएन) की नेता अप्रैल 2027 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन पाएंगी। फ्रांसीसी संवैधानिक प्रावधानों के तहत, ऐसे मामलों में कैसेशन कोर्ट में अपील का निलंबनकारी प्रभाव नहीं होता, जिससे चुनावी भागीदारी पर तत्काल रोक लग सकती है।
राष्ट्रीय रैली ने इस संभावित परिदृश्य के लिए पहले से तैयारी कर रखी है। पार्टी अध्यक्ष और यूरोपीय सांसद जॉर्डन बार्डेला, जो 30 वर्ष की आयु में ही लोकप्रियता के कई सर्वेक्षणों में ली पेन से आगे निकल चुके हैं, को वैकल्पिक उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। पिछले शनिवार को पास-डी-कैले के लिएविन में एक जनसभा में दोनों नेताओं ने एकता का प्रदर्शन किया और ली पेन ने कहा कि यदि वह चुनाव नहीं लड़ पाईं तो बार्डेला को पूरा समर्थन देंगी। हालांकि, फ्रांसीसी मीडिया में यह भी चर्चा है कि बार्डेला स्वयं एक अन्य यूरोपीय संसद धन के दुरुपयोग की जांच के दायरे में हैं, जो हाल ही में कई यूरोपीय संघ देशों में एक साथ हुई छापेमारी से जुड़ी है। इस मामले में अभी कोई औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं, लेकिन इससे आरएन की चुनावी रणनीति पर अनिश्चितता की छाया पड़ सकती है।
दूसरी ओर, केंद्र-दक्षिणपंथी खेमे में पूर्व प्रधानमंत्री एडुआर्ड फिलिप ने रविवार को पेरिस के आदिदास एरिना में पांच हजार समर्थकों के सामने अपनी उम्मीदवारी का औपचारिक आगाज किया। फिलिप, जो कभी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के करीबी थे, ने आप्रवासन पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि फ्रांस को सीमाओं पर नियंत्रण रखना होगा और विदेशी अपराधियों को निर्वासित करना होगा। उन्होंने वामपंथी नेता ज्यां-ल्यूक मेलेनशॉन पर यहूदी-विरोध और पुलिस विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया। फ्रांसीसी विश्लेषकों के अनुसार, फिलिप का लक्ष्य दक्षिणपंथी मतदाताओं को आकर्षित करते हुए केंद्र को एकजुट करना है, लेकिन उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के ब्रूनो रिटेलो और मैक्रों खेमे के गैब्रियल अट्टल जैसे उम्मीदवारों से कड़ी टक्कर मिलेगी।
इस चुनावी माहौल में यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने भी संभावित उम्मीदवारी के संकेत दिए हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति पद की बहस में एक यूरोपीय आवाज की जरूरत है और यदि फ्रांस का यूरोपीय संघ से जुड़ाव कमजोर करने की बात होगी तो वे उसके दुष्परिणाम समझाने के लिए तैयार हैं। लेगार्ड का नाम ऐसे समय में सामने आया है जब मैक्रों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और वे स्वयं 2032 में पुनः राष्ट्रपति बनने की संभावना तलाश रहे हैं। इतालवी समाचार पत्र लिबेरो के अनुसार, मैक्रों दूरसंचार अरबपति जेवियर नील के साथ मिलकर एक ऐसी भूमिका की योजना बना रहे हैं जो उन्हें सार्वजनिक बहस में प्रभावशाली बनाए रखे और 2032 के लिए मंच तैयार करे।
राष्ट्रपति चुनाव की तारीखें पहले ही तय हो चुकी हैं: पहला चरण 18 अप्रैल 2027 और दूसरा चरण 2 मई 2027 को होगा। मंगलवार का अदालती फैसला इस दौड़ का पहला बड़ा मोड़ साबित होगा। यदि ली पेन अयोग्य ठहरती हैं, तो आरएन के लिए बार्डेला के नेतृत्व में चुनाव लड़ना लगभग तय है, लेकिन पार्टी पर लगे अन्य आरोपों की जांच आगे बढ़ने से स्थिति जटिल हो सकती है। फ्रांसीसी राजनीतिक हलकों में इस बात पर सहमति है कि ली पेन की अनुपस्थिति से मतदान पैटर्न में बड़ा बदलाव आ सकता है, क्योंकि वे पिछले तीन चुनावों में लगातार दूसरे स्थान पर रही हैं और उनकी पार्टी को मजदूर वर्ग का व्यापक समर्थन प्राप्त है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.30 | critical |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
The appeal court's decision will mark the future of Marine Le Pen and the party she transformed.
The political crisis is personalized around Le Pen, making the judicial verdict an existential issue for the party.
The parallel Trump case in the US is not mentioned, reducing the global scope of the judicial story.
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The Le Pen case, which also faces an imminent verdict, is completely ignored.
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No reference is made to the Trump case, focusing solely on the French dimension.
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