
भाड़े के निशानेबाजों का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: टोरंटो से पाकिस्तान तक हिंसा की लहर
कनाडा में युवाओं को ऐप के जरिये गोलीबारी के लिए भर्ती करने वाले गिरोह, ऑस्ट्रेलिया में पारिवारिक हमले और पाकिस्तान में पुलिस की गोली से बच्ची की मौत—ये घटनाएं संगठित अपराध के बदलते चेहरे को उजागर करती हैं।
टोरंटो पुलिस ने एक ऐसे बहुस्तरीय भाड़े के गोलीबाज नेटवर्क का खुलासा किया है जो सिग्नल, टेलीग्राम और व्हाट्सऐप जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिये युवाओं और किशोरों को हमलों के लिए भर्ती करता है। यह नेटवर्क अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, यहूदी स्कूलों और प्रार्थनालयों पर हुई दर्जनों गोलीबारियों से जुड़ा है। जांचकर्ताओं के अनुसार, हमलावरों को भुगतान पाने के लिए अपनी वारदात फिल्माना अनिवार्य होता है। इस मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की छापेमारी के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद 19 वर्षीय निकोलस बेनेट पर हत्या का आरोप लगाया गया। पुलिस प्रमुख मायरन डेमकिव ने कहा कि वे अभी भी सक्रिय रूप से इस साजिश के सूत्रधारों की तलाश कर रहे हैं और इसके लिए रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस और एफबीआई के साथ सहयोग कर रहे हैं।
इसी दौरान ओंटारियो के ऑरोरा शहर में एक अन्य सामूहिक हिंसा की घटना में छह लोगों पर एक 55 वर्षीय व्यक्ति की हत्या का आरोप लगा है। पुलिस ने बताया कि पीड़ित डेविड गॉसे के शरीर पर गंभीर चोटें थीं और मौत का कारण कुंद बल का आघात था। हालांकि इस मामले को सीधे भाड़े के निशानेबाज नेटवर्क से नहीं जोड़ा गया है, लेकिन यह कनाडा में समूह अपराध और युवा भागीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति को रेखांकित करता है।
ऑस्ट्रेलिया में भी किशोर हिंसा की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं। गोल्ड कोस्ट पर एक परिवार अपने पिता की अस्थियां समुद्र में प्रवाहित कर लौट रहा था, तभी दो किशोरों ने उनकी कार में घुसकर हमला कर दिया। परिवार की 12 वर्षीय बेटी की चीख से सतर्क हुए पिता ने हमलावरों को खदेड़ा, लेकिन यह घटना सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा की कमजोरी को दर्शाती है। वहीं, कॉफ्स हार्बर में दो वर्षीय बच्चे की मौत के मुकदमे में बचाव पक्ष ने दलील दी कि टी-शर्ट पर खून के धब्बे पुनर्जीवन प्रयासों के दौरान लगे, न कि हत्या के सबूत हैं। अभियोजन के पास आरोपी और बच्चे के बीच शारीरिक शोषण का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, जिससे मामला रहस्य बना हुआ है।
दक्षिण एशिया से जुड़ा एक मामला पाकिस्तान के चकवाल जिले में सामने आया, जहां ऑस्ट्रेलियाई नागरिक 9 वर्षीय हानिया अहमद की पुलिस गोली से मौत हो गई। परिवार छुट्टियां मनाने आया था और लुटेरों का सामना करने पर उन्होंने सारा सामान देने की पेशकश की, लेकिन कुछ ही सेकंड में पुलिस की विवादास्पद इकाई ने मशीनगनों से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। पिता ने न्याय और इस पुलिस विंग की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग की है। यह घटना प्रवासी भारतीयों और दक्षिण एशियाई मूल के विदेशी नागरिकों के लिए सुरक्षा चिंताएं पैदा करती है।
ये सभी घटनाएं एक वैश्विक पैटर्न की ओर इशारा करती हैं—संगठित अपराध अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये युवाओं को आसानी से हिंसा में शामिल कर रहा है, चाहे वह कनाडा का भाड़े का नेटवर्क हो या ऑस्ट्रेलिया में कारजैकिंग के लिए किशोरों का इस्तेमाल। पाकिस्तान की घटना कानून प्रवर्तन की जवाबदेही पर सवाल उठाती है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह चेतावनी है कि एन्क्रिप्टेड ऐप आधारित भर्ती और सीमापार अपराध से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्थानीय पुलिस सुधार दोनों जरूरी हैं।
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