
नाटो मुख्यालय में जासूसी का आरोप: चीनी मूल की कनाडाई प्रशिक्षु गिरफ्तार
बेल्जियम की संघीय अभियोजन सेवा ने शनिवार को बताया कि नाटो के सर्वोच्च सैन्य मुख्यालय शेप में प्रशिक्षु एक कनाडाई महिला को किसी तीसरे देश के लिए जासूसी और आपराधिक संगठन में शामिल होने के संदेह में गिरफ्तार किया गया।
नाटो के यूरोपीय सैन्य अभियानों के केंद्र बेल्जियम के मॉन्स स्थित सुप्रीम हेडक्वार्टर अलाइड पॉवर्स यूरोप (शेप) में एक कनाडाई प्रशिक्षु को 24 जुलाई को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। बेल्जियम की संघीय अभियोजन सेवा के अनुसार, चीनी मूल की यह महिला किसी तीसरे देश के लिए जासूसी करने और एक आपराधिक संगठन का सदस्य होने के संदेह में है। अभियोजकों ने बताया कि शेप की सुरक्षा सेवाओं ने पहले उसके व्यवहार पर ध्यान दिया और बेल्जियम की खुफिया एजेंसी को सूचित किया, जिसके बाद संघीय न्यायिक पुलिस ने 23 जुलाई को उसके घर और कार्यालय की तलाशी ली। अगले दिन एक जांच मजिस्ट्रेट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अभियोजन पक्ष ने मामले की जांच जारी रहने तक और कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया है, हालांकि यह स्पष्ट किया कि आरोपी को अभी दोषी नहीं माना जा सकता।
बेल्जियम की अभियोजन एजेंसी के बयान के अनुसार, इस गिरफ्तारी से नाटो की परिचालन तैयारी या कमान संरचना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। शेप के एक प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यालय बिना किसी रुकावट के अपनी जिम्मेदारियां निभा रहा है। हालांकि, ब्रसेल्स में कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि यह मामला नाटो देशों के बीच चीनी खुफिया गतिविधियों को लेकर पहले से मौजूद चिंताओं को और बढ़ा सकता है। यूरोपीय संघ और नाटो के भीतर हाल के वर्षों में कई मामलों में चीन पर जासूसी के आरोप लगे हैं, हालांकि बीजिंग ने इन्हें हमेशा निराधार बताया है। तीसरे देश का नाम उजागर न किए जाने के बावजूद, कई पश्चिमी विश्लेषक इसे चीन से जोड़कर देख रहे हैं, जो यूरोपीय संस्थानों में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है।
नई दिल्ली के रणनीतिक विशेषेषज्ञों के अनुसार, यह घटनाक्रम बहुपक्षीय संगठनों में जासूसी के बढ़ते खतरे और उससे निपटने की चुनौतियों को रेखांकित करता है। भारत, जो स्वयं नाटो का सदस्य नहीं है लेकिन पश्चिमी देशों और चीन दोनों के साथ गहरे संबंध रखता है, के लिए यह मामला सुरक्षा प्रोटोकॉल की मजबूती पर बल देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ा रहा है, ऐसे प्रकरण संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता की ओर इशारा करते हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जारी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के मद्देनज़र, यह गिरफ्तारी वैश्विक खुफिया परिदृश्य की जटिलता को भी उजागर करती है।
फिलहाल जांच जारी है और बेल्जियम के अधिकारियों ने आगे कोई बयान देने से इनकार किया है। आरोपी की पहचान गुप्त रखी गई है और यह स्पष्ट नहीं है कि किस देश के लिए जासूसी का संदेह है। अगले कानूनी कदमों में अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप पत्र दाखिल करना शामिल हो सकता है, हालांकि अभी तक कोई तारीख तय नहीं की गई है। इस मामले पर कनाडा या चीन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
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