
मोंटेरे में इतिहास: विश्व कप का 1000वां मैच खेलेंगे ट्यूनीशिया-जापान
फीफा विश्व कप के 96 साल के सफर में रविवार को 1000वां मुकाबला मोंटेरे के एस्टादियो बीबीवीए में खेला जाएगा, जहां ग्रुप एफ में ट्यूनीशिया और जापान आमने-सामने होंगे।
रविवार की सुबह (भारतीय समयानुसार) मेक्सिको के मोंटेरे शहर में फुटबॉल इतिहास का एक सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है। जब ट्यूनीशिया और जापान की टीमें मैदान पर उतरेंगी, तो यह सिर्फ तीन अंकों की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि 1930 में उरुग्वे से शुरू हुए विश्व कप के 96 साल के सफर का 1000वां पड़ाव चिह्नित करेगी। टूर्नामेंट के इतिहास में यह एक अनोखा संयोग है कि एशिया और अफ्रीका की दो टीमें इस मील के पत्थर की हिस्सा बन रही हैं, जबकि 48 टीमों वाला यह पहला विश्व कप पहले ही कई रिकॉर्ड बना चुका है।
इससे पहले, विश्व कप के हर सौवें मैच ने कुछ खास यादें छोड़ी हैं। 1954 में 100वां मैच ऑस्ट्रिया-उरुग्वे के बीच तीसरे स्थान का मुकाबला था, तो 1966 का फाइनल 200वां मैच बना जहां इंग्लैंड ने जर्मनी को हराया। 2018 में फ्रांस-क्रोएशिया फाइनल 900वां मुकाबला था, और अब 1000वें मैच की बारी है। फीफा ने इस ऐतिहासिक पल के लिए रेफरी को विशेष नारंगी जर्सी दी है, जिस पर सुनहरी धारियों के साथ ‘मैच 1000’ का बैज लगा है।
मैदान पर लौटें तो दोनों टीमें बिल्कुल अलग मनोदशा में होंगी। जापान ने अपने पहले मैच में नीदरलैंड को 2-2 की कड़ी टक्कर दी, जिसमें केइतो नाकामुरा और दाइची कामादा ने गोल कर टीम की जुझारू क्षमता दिखाई। दूसरी ओर, ट्यूनीशिया को स्वीडन के खिलाफ 1-5 की शर्मनाक हार झेलनी पड़ी, जिसके बाद कोच साबरी लामूची को बर्खास्त कर हर्वे रेनार को जिम्मेदारी सौंपी गई। रेनार के नाम अफ्रीकी कप ऑफ नेशंस के दो खिताब और 2022 में अर्जेंटीना को हराने का अनुभव है, लेकिन उनके पास टीम को संवारने के लिए बस कुछ दिन हैं। जापान को स्टार मिडफील्डर ताकेफुसा कुबो की चोट का झटका लगा है, लेकिन कोच हाजिमे मोरियासु ने इस ऐतिहासिक मैच को जीत के साथ यादगार बनाने का संकल्प जताया है।
ग्रुप एफ में अभी स्वीडन तीन अंकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि जापान और नीदरलैंड के एक-एक अंक हैं। ट्यूनीशिया का खाता नहीं खुला है। जापान के लिए यह मैच अगले दौर की राह आसान कर सकता है, वहीं ट्यूनीशिया के लिए हार का मतलब लगभग बाहर होना होगा। हालांकि 48 टीमों के इस विस्तारित प्रारूप में आठ सर्वश्रेष्ठ तीसरे नंबर की टीमों को भी मौका मिलेगा, लेकिन -5 का गोल अंतर पहले ही ट्यूनीशिया की मुश्किलें बढ़ा चुका है। दोनों टीमों के बीच अब तक छह मुकाबले हुए हैं, जिनमें जापान ने पांच जीते और एक में हार मिली। 2002 विश्व कप में भी जापान ने ट्यूनीशिया को 2-0 से हराया था।
दिलचस्प बात यह है कि मैदान के बाहर भी जापानी प्रशंसकों ने सुर्खियां बटोरी हैं। उन्होंने स्टेडियम की सफाई के लिए 10,000 कचरा बैग मांगे, जिसे स्थानीय प्रशासन ने बढ़ाकर 20,000 कर दिया। यह सांस्कृतिक पहल विश्व कप की भावना को दर्शाती है। अब सबकी निगाहें मोंटेरे की उस रात पर टिकी हैं, जहां एक ओर जापान अपनी तेजी और तकनीकी क्षमता से जीत का दावा ठोकना चाहेगा, तो दूसरी ओर रेनार की ट्यूनीशिया सम्मान बचाने और बाहर होने की कगार से वापसी का साहस जुटाएगी। यह मुकाबला सिर्फ अंक तालिका ही नहीं, बल्कि फुटबॉल के शताब्दी-सफर की गाथा भी लिखेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जापान विश्व कप के ऐतिहासिक 1000वें मुकाबले में सावधानी बरत रहा है, यह जानते हुए कि स्वीडन से अपमानित और नए कोच के साथ ट्यूनीशिया बेहद प्रेरित होगा। जापानी टीम को नीदरलैंड के खिलाफ ड्रॉ से कहीं अधिक तीव्र मुकाबले की उम्मीद है।
मॉन्टेरी में जापान और ट्यूनीशिया के बीच मुकाबला विश्व कप इतिहास का 1000वां मैच होगा, जो यूरोप और दक्षिण अमेरिका के पारंपरिक वर्चस्व से परे फुटबॉल के वैश्वीकरण का प्रतीक है। जापान भारी हार और अचानक कोच बदलाव के बाद गहरे संकट में फंसी ट्यूनीशियाई टीम के खिलाफ नॉकआउट चरण की ओर निर्णायक कदम बढ़ाना चाहता है।
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