
यूरो 2024 टिकट घोटाले में DFB मुख्यालय पर छापा, जर्मन फुटबॉल पर गहराया संकट
विश्व कप से बाहर होने के 36 घंटे बाद, जर्मन फुटबॉल संघ पर भ्रष्टाचार के आरोपों में 150 पुलिसकर्मियों ने छापेमारी की, जांच यूरो 2024 के दौरान मुफ्त टिकट और आतिथ्य लाभ देने के आरोपों पर केंद्रित है।
बुधवार सुबह फ्रैंकफर्ट स्थित जर्मन फुटबॉल संघ (DFB) के मुख्यालय पर 150 से अधिक पुलिस अधिकारियों ने धावा बोल दिया। यह कार्रवाई यूरो 2024 के दौरान कथित रिश्वतखोरी की जांच का हिस्सा थी, और इसने जर्मन फुटबॉल को उस समय झकझोर दिया जब टीम 2026 विश्व कप के 32वें दौर में पैराग्वे से पेनल्टी पर हारकर बाहर हो चुकी थी। छापेमारी सिर्फ DFB तक सीमित नहीं रही—बर्लिन, म्यूनिख, हैम्बर्ग, डॉर्टमुंड, गेल्सनकिर्चन और अन्य मेज़बान शहरों के नगर निगम दफ्तरों और कई निजी कंपनियों को भी तलाशी के दायरे में लाया गया।
जांच का केंद्र बिंदु ‘यूरो 2024 GmbH’ नामक कंपनी है, जिसे DFB और UEFA ने संयुक्त रूप से टूर्नामेंट के आयोजन के लिए बनाया था। अभियोजकों के अनुसार, इस कंपनी के ज़िम्मेदार लोगों ने मेज़बान शहरों के अधिकारियों को बिना अनुमति के मुफ्त टिकट, यात्रा और होटल ठहरने जैसे लाभ दिए। एक 66 वर्षीय जर्मन नागरिक, जो पहले गेल्सनकिर्चन नगर प्रशासन में कार्यरत था, पर आरोप है कि उसने स्पेन-फ्रांस सेमीफाइनल के लिए लगभग 2,400 यूरो की कीमत का आतिथ्य स्वीकार किया। वहीं, 46 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक, जो यूरो 2024 GmbH में मेज़बान शहरों से संपर्क का प्रभारी था, पर शीर्ष मैचों में स्थानीय अधिकारियों को बुलाने का संदेह है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह हजारों टिकट ‘पसंदीदा मेहमानों’ को अवैध रूप से बांटे गए होंगे।
यह झटका जर्मन फुटबॉल के लिए एक गहरे संकट का प्रतीक बन गया। टीम 2014 की विश्व विजेता रही, लेकिन 2018 और 2022 में ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद अब 2026 में भी 32वें दौर से आगे नहीं बढ़ सकी। एशियाई और मध्य-पूर्वी मीडिया ने इस समयरेखा को रेखांकित किया—पैराग्वे से हार के महज 36 घंटे बाद पुलिस की कार्रवाई ने जर्मन फुटबॉल की छवि को दोहरी चोट पहुंचाई। यूरोपीय रिपोर्टों में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि DFB पहले भी 2006 विश्व कप के वित्तीय विवाद और कर चोरी के मामले में दोषी ठहराए जाने जैसी कानूनी उलझनों का सामना कर चुका है।
नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया के गृह मंत्री हर्बर्ट रॉयल ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “फुटबॉल का टिकट वेतन का हिस्सा नहीं है। सार्वजनिक सेवा में जो कोई हाथ फैलाएगा, उसे हमारी ओर से मुलाकात मिलेगी।” यूरोपीय राजनीतिक हलकों से आए इस बयान ने जांच की गंभीरता को स्पष्ट किया। वहीं, अरब और इज़राइली मीडिया ने इस प्रकरण को भ्रष्टाचार के एक संरचनात्मक पैटर्न के रूप में देखा, जिसमें आयोजकों ने मेज़बान शहरों को विशेष खरीद अधिकार दिए और फिर उन टिकटों का दुरुपयोग हुआ।
फिलहाल, दोनों संदिग्धों को अभी तक आरोपों पर प्रतिक्रिया का मौका नहीं मिला है और उन्हें निर्दोष माना जा रहा है। जांच अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसने DFB और जर्मन फुटबॉल के भीतर लंबे समय से चली आ रही पारदर्शिता की कमी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अगला ठोस कदम दस्तावेजों की जांच और संभावित गवाहों से पूछताछ होगी, जिसके नतीजे आने वाले महीनों में जर्मन खेल प्रशासन की विश्वसनीयता को परखेंगे।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +1.00 | aligned |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
The Arab world rejoices in Paraguay's redemption, a symbol of the periphery defeating the center.
Transforms a football match into a geopolitical metaphor, amplifying the Paraguayan president's rhetoric and ignoring the match's technical details.
Completely omits the corruption scandal that engulfed the DFB and the controversy over the disallowed goal.
Continental Europe reaffirms the correctness of the refereeing decisions and frames Germany's elimination as part of the game.
Relies on official sources (Collina) and a technical-legal lexicon to defuse the emotional charge of the defeat.
Does not delve into the Euro-2024 ticket scandal or the corruption context preceding the match.
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