
ट्रंप ने तय की तारीख: 24 सितंबर को वाशिंगटन में शी जिनपिंग, एआई रेस पर केंद्रित होगी बातचीत
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीनी समकक्ष की राजकीय यात्रा की पुष्टि करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को प्रमुख एजेंडा बताया, जबकि दोनों पक्षों के बीच प्रौद्योगिकी चोरी के आरोप और प्रतिबंधों की धमकियाँ जारी हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 24 सितंबर को वाशिंगटन की राजकीय यात्रा पर आएंगे, और इस दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रमुख चर्चा का विषय होगी। यह यात्रा मई में ट्रंप की बीजिंग यात्रा के दौरान दिए गए निमंत्रण का प्रत्युत्तर है, और ओबामा प्रशासन के बाद किसी चीनी नेता की पहली व्हाइट हाउस राजकीय यात्रा होगी। ट्रंप ने पर्यावरण संरक्षण एजेंसी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “एआई शायद अब तक की सबसे बड़ी चीज़ है,” और यह भी जोड़ा कि अमेरिका इस दौड़ में चीन से आगे है और इसे बनाए रखना चाहता है।
वाशिंगटन की ओर से यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी प्रशासन ने चीनी कंपनी मूनशॉट एआई पर अमेरिकी एआई मॉडलों से अवैध रूप से ज्ञान “डिस्टिल” करने और प्रतिबंधित एनवीडिया चिप्स के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंध और “एंटिटी लिस्ट” में डाले जाने पर विचार हो रहा है। ट्रंप के प्रौद्योगिकी सलाहकार माइकल क्रैट्सियोस के अनुसार, मूनशॉट ने एंथ्रोपिक के मॉडल से “अस्वीकार्य” तरीके से प्रशिक्षण लिया। वहीं, चीनी विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का राजनीतिकरण वैश्विक एआई विकास को बाधित करेगा।
दोनों महाशक्तियों के बीच एआई प्रतिस्पर्धा का भू-राजनीतिक आयाम लगातार गहरा रहा है। पिछले सप्ताह शी जिनपिंग ने शंघाई में 29 देशों की भागीदारी वाली विश्व एआई सहयोग संगठन (वाइको) की घोषणा करते हुए कहा कि एआई विकास “किसी एक देश का एकल प्रदर्शन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सिम्फनी” होनी चाहिए। यूरोपीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने पहले देशों को वाइको में शामिल होने से रोकने का प्रयास किया था। इसी बीच, प्यू रिसर्च सेंटर के एक सर्वेक्षण में सामने आया कि 36 प्रतिशत अमेरिकी चीन को एआई में वैश्विक नेता मानते हैं, जबकि केवल 12 प्रतिशत अमेरिका को आगे देखते हैं।
सितंबर की बैठक से पहले दोनों पक्षों ने कूटनीतिक ज़मीन तैयार करनी शुरू कर दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मनीला में आसियान बैठक के इतर बातचीत की और सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति जताई, ताकि इस यात्रा को “बहुत सकारात्मक” बनाया जा सके। चीनी पक्ष ने बैठक को “व्यावहारिक, सकारात्मक और रचनात्मक” बताया। दोनों नेताओं के बीच ईरान, दक्षिण चीन सागर तनाव और ताइवान जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2026 में दोनों नेताओं के बीच चार पूर्ण बैठकें हो सकती हैं, जिनमें जी20 शिखर सम्मेलन और एपेक फोरम भी शामिल हैं।
मूनशॉट के ओपन-सोर्स मॉडल किमी के3 ने प्रदर्शन परीक्षणों में एंथ्रोपिक और ओपनएआई के शीर्ष मॉडलों की बराबरी कर अमेरिकी कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अमेरिकी प्रशासन के लिए यह यात्रा व्यापार, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा हितों को संतुलित करने का अवसर होगी, जबकि बीजिंग इसे अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव को कम करने और बहुपक्षीय एआई सहयोग को बढ़ावा देने के मंच के रूप में देखता है। फिलहाल, 24 सितंबर की तारीख तय है, और दोनों राजधानियों में तैयारियाँ जारी हैं।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
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| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.10 | neutral |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
America positions itself as the bulwark of technological freedom against the Chinese threat, while Trump is celebrated as the leader who stands up to Beijing.
Alarmist tones (China as 'AI war machine') alternate with triumphalist ones (Trump announcing the 'biggest thing ever seen'), creating a narrative of competition and superiority.
The Atlantic bloc omits the context of China's commitments on Iran and the broader geopolitical tensions, focusing solely on the AI competition and Trump's role.
Europe frames Xi's visit as a piece of a complex relationship, where promises on Iran are a key element to assess Chinese credibility.
The news is placed within a framework of past tensions and specific commitments, suggesting the summit is a test for future cooperation.
The continental European bloc omits the celebratory tone of Trump's announcement and the focus on AI competition, instead emphasizing the Iran issue and diplomatic conditionality.
Russia presents the visit as an ordinary diplomatic event, without emphasizing tensions or competition, almost suggesting that US-China relations are normal.
It reports essential facts (date, AI topic) without adding critical context, normalizing the meeting as routine bilateral business.
The Russian bloc omits any mention of the Iran issue, bilateral tensions, or the competitive framing of AI, offering a sanitized version of the visit.
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