
स्वीडन: पत्नी को 120 पुरुषों को बेचने वाले पूर्व हेल्स एंजल्स सदस्य को साढ़े चार साल की कैद
क्रैमफोर्स कांड में अदालत ने गंभीर दलाली, बलात्कार के प्रयास और धमकियों का दोषी ठहराया, जबकि पीड़िता को अवैध कमाई पर भी कर चुकाना पड़ा।
स्वीडन की एक अदालत ने मंगलवार को एक चौंकाने वाले यौन शोषण मामले में 61 वर्षीय पूर्व हेल्स एंजल्स सदस्य को साढ़े चार साल के कारावास की सजा सुनाई। यह व्यक्ति तीन वर्षों तक अपनी पत्नी को क्रैमफोर्स स्थित घर में बंधक बनाकर 120 से अधिक पुरुषों को बेचता रहा। अदालत ने पाया कि उसने न केवल यौन क्रियाओं की योजना बनाई और ग्राहकों से संपर्क किया, बल्कि पीड़िता को ड्रग्स देकर नियंत्रित किया और भागने पर जान से मारने की धमकियां दीं। गंभीर दलाली के अलावा उसे बलात्कार के प्रयास, छह मामलों में अवैध धमकी और मादक पदार्थ अपराध का भी दोषी करार दिया गया।
यह दुःस्वप्न अक्टूबर 2025 की एक रात टूटा, जब पीड़िता ने साहस जुटाकर घर में लगे निगरानी कैमरों की अंधी जगह का फायदा उठाया और भाग निकली। 112 पर किए गए आपातकालीन कॉल में उसने बताया कि वह बिना कपड़ों के कार में बैठी है और उसे डर है कि उसका पति उसका पीछा कर रहा है। उसने ऑपरेटर से कहा, "अगर मैं भागूंगी तो वह मुझे और मेरे कुत्ते को मार डालेगा।" पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने तीन साल तक पत्नी को शारीरिक और ऑनलाइन यौन क्रियाओं के लिए मजबूर किया, ग्राहकों की बुकिंग की और विज्ञापन तैयार किए।
इस मामले का एक विवादास्पद पहलू स्वीडिश कर प्रणाली से जुड़ा है। स्काटेवरकेट (कर विभाग) ने पीड़िता को वेश्यावृत्ति से हुई आय पर भारी कर चुकाने का आदेश दिया, क्योंकि स्वीडन का कानून अवैध कमाई के लिए कोई छूट नहीं देता। विभाग की अधिकारी हेलेना जांगेल स्ट्रिध ने स्पष्ट किया, "हम अपने कानून नहीं बना सकते।" इस निर्णय ने पीड़िता की पीड़ा को और बढ़ा दिया, जो पहले ही शारीरिक और मानसिक आघात झेल रही थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले की तुलना फ्रांस के गिजेल पेलिको कांड से की जा रही है, जहां पति ने पत्नी को बेहोश कर दर्जनों पुरुषों को बलात्कार के लिए पेश किया था और उसे 20 साल की सजा मिली। स्वीडिश मामले में सजा काफी कम है, जिससे न्यायिक दृष्टिकोण पर सवाल उठ रहे हैं। आरोपी का हेल्स एंजल्स जैसे संगठित अपराध समूह से जुड़ाव होने के बावजूद अदालत ने पीड़िता को 2,00,000 स्वीडिश क्रोनर (लगभग 18,370 यूरो) का मुआवजा तय किया है।
यह प्रकरण यौन शोषण के पीड़ितों के लिए कानूनी सुरक्षा और आर्थिक न्याय के बीच गहरी खाई को उजागर करता है। स्वीडन जैसे प्रगतिशील देश में भी पीड़िता को अपने उत्पीड़न से उपजी आय पर कर चुकाने की विडंबना, वैश्विक स्तर पर पीड़ित-केंद्रित नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। दक्षिण एशिया के संदर्भ में देखें तो यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति के मामलों में पीड़िता को अक्सर दोहरी सजा झेलनी पड़ती है—पहले अपराधी से, फिर व्यवस्था से।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्वीडन की एक अदालत ने 61 वर्षीय व्यक्ति को अपनी पत्नी को सौ से अधिक पुरुषों के सामने व्यवस्थित रूप से वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर करने, धमकाने और हमला करने के लिए साढ़े चार साल की जेल की सजा सुनाई। पीड़िता, जो दहशत में भाग निकली और आपातकालीन सेवाओं को फोन किया, अब शोषण से हुई आय पर भारी कर ऋण का सामना कर रही है, क्योंकि कर प्राधिकरण का कहना है कि कोई कानूनी अपवाद नहीं है। इस मामले ने स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया है और राज्य की नौकरशाही द्वारा पीड़ितों के साथ व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वीडन की एक अदालत ने 61 वर्षीय व्यक्ति को तीन साल में 100 से अधिक पुरुषों के साथ अपनी पत्नी को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर करने के लिए चार साल और पांच महीने की जेल की सजा सुनाई। उसे गंभीर दलाली, बलात्कार के प्रयास, हमले और धमकियों का दोषी ठहराया गया; अदालत ने कहा कि उसने ही इस कार्य की शुरुआत की और संचालन किया। महिला अपने पति से बहुत डरती थी, जिसने उसे चेतावनी दी थी कि अगर उसने उसे गुस्सा दिलाया तो 'राक्षस बाहर आ जाएगा'।
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