
रक्त परीक्षण से अंगों की जैविक आयु का अनुमान: पोषण और जीवनशैली कैसे धीमा कर सकते हैं बुढ़ापा
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के नए रक्त परीक्षण से मस्तिष्क, हृदय और गुर्दों की जैविक उम्र का पता लगाकर अल्जाइमर जैसी बीमारियों की भविष्यवाणी संभव, जबकि वैश्विक शोध पोषण और व्यायाम की भूमिका को रेखांकित करते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अलग-अलग अंग एक समान गति से बूढ़े नहीं होते—यह सच्चाई अब एक क्रांतिकारी रक्त परीक्षण के ज़रिए सामने आई है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में एक ऐसा प्रायोगिक परीक्षण विकसित किया है जो रक्त में मौजूद लगभग 7,000 प्रोटीनों का विश्लेषण कर मस्तिष्क, हृदय, फेफड़े और गुर्दों की जैविक आयु का अनुमान लगाता है। जर्मनी के वैज्ञानिकों के अनुसार, 20 से 25 प्रतिशत लोगों में कम से कम एक अंग अपनी कालानुक्रमिक उम्र से तेज़ी से बूढ़ा हो रहा होता है, जिससे कैंसर, मनोभ्रंश और एएलएस जैसी बीमारियों का ख़तरा वर्षों पहले ही बढ़ जाता है। यह परीक्षण संभवतः तीन साल के भीतर बाज़ार में आ सकता है और भविष्य में व्यक्तिगत रोकथाम रणनीतियों का आधार बनेगा।
इस बीच, दुनिया भर के पोषण विज्ञानी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि भोजन की थाली ही कई अंगों की उम्र को धीमा कर सकती है। जापान के हिरोसाकी शहर में 2,000 से अधिक बुज़ुर्गों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि रक्त में विटामिन सी का उच्च स्तर मस्तिष्क के धूसर पदार्थ की मात्रा और तंत्रिका संयोजनों को सुरक्षित रखता है, जिससे स्मृति और ध्यान संबंधी कार्य बेहतर बने रहते हैं। रूसी वैज्ञानिकों की एक समीक्षा ने टॉरिन नामक अमीनो अम्ल को कोशिकीय ऊर्जा केंद्रों और सूजनरोधी प्रक्रियाओं का संरक्षक बताया है, जो समग्र बुढ़ापे की गति को मंद कर सकता है। वहीं, कॉफ़ी के लाभ भी बहुआयामी नज़र आते हैं—स्पेन और इंडोनेशिया के विशेषज्ञ बताते हैं कि इसमें मौजूद ट्राइगोनेलिन गुर्दे की कोशिकाओं की रक्षा करता है और फैटी लिवर में वसा संचय को घटाता है, लेकिन कैफ़ीन रक्तचाप में अस्थायी वृद्धि कर सकती है, इसलिए संवेदनशील लोगों को माचा जैसे विकल्पों में भी सावधानी बरतनी चाहिए।
जीवनशैली के अन्य पहलू भी अंगों की उम्र पर गहरा असर डालते हैं। अर्जेंटीना और रूस के चिकित्सक 50 वर्ष के बाद भारोत्तोलन को सार्कोपीनिया यानी मांसपेशी क्षय और हड्डियों के घनत्व में गिरावट रोकने का सशक्त उपाय मानते हैं, जो संज्ञानात्मक गिरावट को भी टालता है। ईरानी शोधकर्ताओं ने पाया कि बुज़ुर्गों में देर से नाश्ता करने की आदत मृत्यु दर को बढ़ा सकती है, जबकि स्पेन की एक पारिवारिक चिकित्सक का वायरल संदेश है कि शाम पाँच बजे की भूख का कारण अक्सर सुबह नौ बजे का असंतुलित नाश्ता होता है, जो ग्लूकोज़ स्पाइक पैदा करता है। नींद का पैटर्न भी उम्र के साथ बदलता है—60 पार कर चुके लोगों की जैविक घड़ी आगे खिसक जाती है, इसलिए जल्दी जागना स्वाभाविक है, बशर्ते नींद पूरी हो।
भारत और दक्षिण एशिया के लिए ये निष्कर्ष विशेष रूप से प्रासंगिक हैं, जहाँ उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मनोभ्रंश का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है। यदि स्टैनफोर्ड का रक्त परीक्षण किफ़ायती रूप में उपलब्ध होता है, तो यह बता सकेगा कि किसी व्यक्ति का हृदय या मस्तिष्क अपनी उम्र से अधिक तेज़ी से बूढ़ा हो रहा है या नहीं, और तदनुसार आहार व व्यायाम की सटीक सलाह दी जा सकेगी। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया में चूहों पर किए गए एक प्रयोग में Cu(ATSM) नामक यौगिक ने अल्जाइमर से जुड़े विषैले प्रोटीन को 42 प्रतिशत तक कम कर दिया, जो भविष्य की दवाओं की दिशा तय कर सकता है। यह समग्र दृष्टिकोण—रक्त की एक बूंद से लेकर रसोई की थाली और जिम की प्लेट तक—बुढ़ापे को केवल वर्षों की गिनती नहीं, बल्कि अंगों की सेहत से मापने का युग ला रहा है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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50 के बाद, विशेषज्ञ सरल दैनिक दिनचर्या की सलाह देते हैं: चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना और शक्ति व्यायाम, जो गतिशीलता बनाए रखने, जकड़न रोकने और सक्रिय बुढ़ापा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। ये सुलभ गतिविधियाँ हृदय स्वास्थ्य, मांसपेशियों और समग्र कल्याण को बिना जिम के बढ़ावा देती हैं।
बहुत देर तक बैठना धूम्रपान जितना खतरनाक है, इससे चयापचय और रक्त संचार धीमा हो जाता है। लेकिन कार्डियो के साथ प्रतिरोध प्रशिक्षण जोड़ने से बुढ़ापा अधिक सुखी और लंबा हो सकता है, विशेषज्ञों का कहना है।
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