
फ्रांस ने तेहरान में राजनयिकों की हिरासत पर ईरानी प्रभारी को तलब किया, ईरान ने जताई आपत्ति
दो फ्रांसीसी राजनयिकों को रविवार को तेहरान में हिरासत में लेने और शारीरिक धमकी देने के बाद फ्रांस ने पेरिस में ईरानी प्रभारी को बुलाया, जबकि ईरान ने उन राजनयिकों के 'अपारंपरिक' आचरण पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
फ्रांस ने मंगलवार को पेरिस में ईरान के प्रभारी दूत (कार्यवाहक राजदूत) को विदेश मंत्रालय में तलब किया। यह कदम रविवार को तेहरान में फ्रांसीसी दूतावास के दो कर्मचारियों को ईरानी सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिए जाने और उनके साथ शारीरिक धमकी व पूछताछ की घटना के बाद उठाया गया। फ्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने इसे राजनयिक उन्मुक्तियों का 'घोर उल्लंघन' बताया और कहा कि एक राजनयिक के साथ शारीरिक हिंसा हुई। दोनों कर्मचारियों को कई घंटों तक बिना कारण रोके रखा गया, बाद में उन्हें दूतावास लौटने और फ्रांस वापस जाने की अनुमति दी गई।
फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, पेरिस ने ईरानी अधिकारियों से इस घटना पर 'प्रकाश डालने', दोषियों को दंडित करने और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप राजनयिक परिसरों व कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपेक्षा की है। बारो ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराकची को सूचित किया कि 'हमारे एजेंटों की अखंडता पर यह अत्यंत गंभीर और अस्वीकार्य हमला बिना परिणाम के नहीं रह सकता।' फ्रांस ने यह भी स्पष्ट किया कि ये दोनों राजनयिक ईरानी नागरिक समाज, कलाकारों और वैज्ञानिकों के लिए फ्रांस के समर्थन कार्यक्रमों का संचालन कर रहे थे।
वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अराकची ने मंगलवार को बारो के साथ टेलीफोन पर बातचीत में फ्रांसीसी राजनयिकों के 'अपारंपरिक और राजनयिक मानकों के विपरीत' आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई। ईरानी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, अराकची ने इस व्यवहार को 'अस्वीकार्य' बताते हुए कहा कि मेज़बान देश के कानूनों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य राजनयिक सिद्धांतों का पालन विदेशी मिशनों के संचालन के लिए अनिवार्य है। उन्होंने फ्रांस सरकार से ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। इस कॉल में अराकची ने होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को भी अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन और एकतरफा नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम बताया, हालांकि इसका इस राजनयिक विवाद से सीधा संबंध स्पष्ट नहीं है।
इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और जटिल बना दिया है। यूरोपीय संघ ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिन्हें हटाने से फ्रांस ने तब तक इनकार किया है जब तक तेहरान अपना रुख नहीं बदलता। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने अभी तक फ्रांस द्वारा प्रभारी दूत को तलब किए जाने पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी सामने आई है कि फ्रांस तेहरान स्थित अपने दूतावास में कर्मचारियों की संख्या घटाने पर विचार कर रहा है, और कुछ कर्मचारियों ने स्वेच्छा से शीघ्र वापसी का अनुरोध किया है।
फिलहाल, फ्रांस ने ईरानी अधिकारियों से घटना की पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई है, जबकि ईरान ने फ्रांस से अपने राजनयिकों के आचरण पर नियंत्रण की अपेक्षा की है। दोनों पक्षों के बीच आगे की कूटनीतिक बातचीत या संभावित प्रतिक्रियात्मक कदमों की घोषणा आने वाले दिनों में होने की संभावना है। इस बीच, फ्रांसीसी दूतावास के संचालन और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.80 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
तेहरान फ्रांसीसी आरोपों को निराधार दावे बताकर खारिज करता है और संकेत देता है कि राजनयिकों का एक छिपा हुआ एजेंडा था।
ईरानी शासन फ्रांसीसी निंदा की विश्वसनीयता को कम करने के लिए 'दावा' शब्द का उपयोग करता है, इसे तथ्यात्मक रिपोर्ट के बजाय एक राजनीतिक कदम के रूप में प्रस्तुत करता है।
ईरानी शासन फ्रांसीसी अधिकारियों की पूर्ण राजनयिक प्रतिरक्षा को स्वीकार करने में विफल रहता है और हिरासत के लिए कोई आधिकारिक औचित्य प्रदान नहीं करता है।
फ्रांस हिरासत को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताते हुए निंदा करता है और परिणामों का वादा करता है, इसे सभी राजनयिक मानदंडों पर हमले के रूप में प्रस्तुत करता है।
फ्रांस घटना को सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त राजनयिक सिद्धांतों के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत करके इसे सार्वभौमिक बनाता है, जिससे ईरान को अलग-थलग किया जाता है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाया जाता है।
फ्रांस इस संभावना पर विचार करने से बचता है कि राजनयिक प्रतिरक्षा से आच्छादित न होने वाली गतिविधियों में लगे हो सकते हैं, जैसा कि ईरानी अधिकारियों ने सुझाया है।
रूस बिना पक्ष लिए घटना की तथ्यात्मक रिपोर्ट करता है, तटस्थ और तकनीकी लहजा बनाए रखता है।
रूस फ्रांसीसी-ईरानी संघर्ष में पक्ष लेने से बचने के लिए एक अलग और तथ्यात्मक लहजा अपनाता है, एक संभावित मध्यस्थ के रूप में अपनी स्थिति को संरक्षित करता है।
रूस फ्रांसीसी प्रतिशोध की धमकियों और व्यापक राजनयिक तनाव का उल्लेख करने से बचता है, घटना को एक नियमित समाचार आइटम तक सीमित करता है।
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