
अमेरिकी खुफिया प्रमुख के खुलासे के बाद यूक्रेन की जैविक प्रयोगशालाओं पर बहस तेज
टल्सी गैबार्ड द्वारा वर्गीकृत दस्तावेज़ सार्वजनिक करने से यह सवाल उठा कि यूक्रेन में अमेरिकी सहायता प्राप्त लैब असल में कितनी सुरक्षित थीं और क्या इनका उद्देश्य जैविक हथियार विकास से जुड़ा था।
अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक टल्सी गैबार्ड ने हाल ही में वर्गीकृत दस्तावेज जारी कर खुलासा किया कि यूक्रेन समेत 30 से अधिक देशों में स्थित लगभग 120 जैविक प्रयोगशालाओं को अमेरिकी सरकार का वित्तपोषण मिला था। इनमें एंथ्रेक्स और ब्रुसेला जैसे खतरनाक रोगाणु मौजूद थे और युद्ध के दौरान इनके सुरक्षा उल्लंघन की आशंका गंभीर बनी हुई थी। गैबार्ड के इस कदम ने एक बार फिर उस विवाद को हवा दे दी है जो 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती दिनों में सुर्खियों में था।\n\nयूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसने कभी जैविक हथियार विकसित नहीं किए और अमेरिका के साथ सहयोग पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों, जैसे महामारी निगरानी और प्रयोगशाला सुरक्षा के लिए था। कीव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक रिपोर्टों और जैविक हथियार सम्मेलन के तहत हुई सलाह-मशविरे पर भरोसा करने की अपील की। हालांकि, मॉस्को समर्थक सांसद और विश्लेषक लगातार यह दावा करते रहे हैं कि यूक्रेन पश्चिमी शक्तियों के लिए एक प्रयोगशाला बन गया था, जहाँ सैन्य और वैज्ञानिक परीक्षण किए जाते रहे। रूसी सीनेटर अलेक्जेंडर वोलोशिन ने कहा कि इन लैबों पर अमेरिकी करदाताओं से भी जानकारी छिपाई जाती रही और जब मास्को ने इनका मुद्दा उठाया तो इसे ‘रूसी प्रोपगैंडा’ बता दिया गया।\n\nदूसरी ओर, गैबार्ड द्वारा जारी डोजियर में अमेरिकी कंपनियों की भूमिका और हंटर बाइडन का नाम भी सामने आया है, जिससे यह मामला और सियासी रंगत पकड़ गया है। आयरिश अर्थशास्त्री फिलिप पिल्किंगटन जैसे अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने भी वॉशिंगटन से सवाल किया है कि आखिर इन प्रयोगशालाओं का असली उद्देश्य क्या था और पश्चिम “डॉक्टर एविल” जैसी छवि क्यों बना रहा है। इस बीच, यह तथ्य उजागर हुआ कि अमेरिकी खुफिया समुदाय ने खुद चेताया था कि युद्ध की स्थिति में इन लैबों के रोगाणु आतंकी हाथों में पड़ सकते हैं, जिससे जैव सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।\n\nवैश्विक संदर्भ में यह प्रकरण दिखाता है कि जैवप्रौद्योगिकी सहयोग में पारदर्शिता की कितनी आवश्यकता है। दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्र, जहाँ अमेरिका के साथ स्वास्थ्य और जैव सुरक्षा कार्यक्रम चल रहे हैं, वहाँ भी यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि ऐसे सहयोग केवल नागरिक उपयोग तक सीमित रहें। विशेषेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जैविक हथियार सम्मेलन के तहत ऐसी प्रयोगशालाओं की जाँच और निगरानी का एक मज़बूत तंत्र विकसित करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार के दुरुपयोग या दुर्घटना से बचा जा सके। आने वाले समय में, यूक्रेन युद्ध के चलते जैविक सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ और गहराने वाली हैं, और यह मुद्दा भू-राजनीति में लगातार उठता रहेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ
यूक्रेन को पश्चिमी सैन्य और वैज्ञानिक प्रयोगों का परीक्षण स्थल बना दिया गया है, जहाँ अमेरिका-वित्तपोषित प्रयोगशालाएँ खतरनाक रोगाणुओं पर काम कर रही हैं। कीव का खंडन विश्वसनीय नहीं है; अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वाशिंगटन से इस दीर्घकालिक रणनीति पर स्पष्टीकरण माँगना चाहिए।
अमेरिकी डोजियर के अवर्गीकरण से यूक्रेन में 40 से अधिक जैविक प्रयोगशालाओं का खुलासा हुआ है, जिनमें एंथ्रेक्स और ब्रुसेला जैसे रोगाणु शामिल हैं, और हंटर बाइडन की छाया फिर उभर आई है। यूक्रेन का कहना है कि सहयोग पूरी तरह नागरिक था, लेकिन डोजियर पारदर्शिता और वास्तविक उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।
संबंधित लेख
मेसी का हैट्रिक और क्लोज़ की बराबरी: विश्व कप 2026 में अर्जेंटीना की धमाकेदार शुरुआत
9 भाषाएँ · 47 स्रोत
खेलहालैंड का विश्व कप में धमाकेदार आगाज़: दो गोल से नॉर्वे ने इराक को 4-1 से रौंदा
7 भाषाएँ · 43 स्रोत
कानून एवं नियमनएडुआर्डो बोल्सोनारो को अमेरिकी दबाव डालने पर चार साल की सजा, राजनीतिक भविष्य अधर में
6 भाषाएँ · 29 स्रोत