
कांगो में इबोला का प्रकोप अभी चरम पर नहीं, रेड क्रॉस की चेतावनी: एक साल तक चल सकता है संकट
800 से अधिक पुष्ट मामलों और 192 मौतों के बावजूद, बुंडीबुग्यो स्ट्रेन का प्रकोप लगातार फैल रहा है, युगांडा तक पहुंच चुका है और केन्या सहित पड़ोसी देश हाई अलर्ट पर हैं।
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला का मौजूदा प्रकोप एक माह बाद भी नियंत्रण से बाहर होता दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसायटी के संचालन प्रबंधक ब्रूनो मिशों ने मंगलवार को जिनेवा से वीडियो कॉल के जरिए साफ कहा कि “महामारी का चरम अभी हमारे सामने है” और यह संकट एक साल तक खिंच सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी माना कि वायरस का भौगोलिक विस्तार जारी है और “हम केस मिस कर रहे हैं।” मेडेसां फ्रंटियर (एमएसएफ) ने निगरानी, निदान, संपर्क अनुरेखण और सामुदायिक सहभागिता में खतरनाक अंतराल की ओर इशारा करते हुए कहा कि प्रतिक्रिया प्रयास संकट के पैमाने से मेल नहीं खा रहे हैं।
यह प्रकोप बुंडीबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस से फैला है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या उपचार मौजूद नहीं है। पहली बार 2007 में युगांडा में पहचाने गए इस स्ट्रेन की ऐतिहासिक मृत्यु दर 30 से 50 प्रतिशत रही है, हालांकि कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक यह दर लगभग 23.8 प्रतिशत है। सबसे अधिक प्रभावित इतुरी प्रांत में कुल पुष्ट मामलों का 93 प्रतिशत केंद्रित है, जहां दशकों से जारी सशस्त्र संघर्ष, मरीजों का भागना और सीमित संपर्क अनुरेखण रोकथाम प्रयासों को कमजोर कर रहे हैं। यह वायरस सीमा पार कर युगांडा में भी दस्तक दे चुका है, जहां अब तक 19 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जबकि केन्या ने हालांकि कोई केस नहीं पाया है फिर भी 25 उच्च जोखिम वाले जिलों में 300 से अधिक स्वास्थ्यकर्मियों की स्टैंडबाय टीम तैनात कर सतर्कता बढ़ा दी है।
वैश्विक स्तर पर डब्ल्यूएचओ ने 16 मई को ही अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया था, जिसके बाद इटली जैसे देशों ने प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए निगरानी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। एक अमेरिकी डॉक्टर पीटर स्टैफोर्ड के स्वस्थ होकर लौटने जैसी सकारात्मक खबरों के बावजूद, जमीनी हकीकत चिंताजनक है। रेड क्रॉस और एमएसएफ जैसी संस्थाएं इस बात पर जोर दे रही हैं कि मानवीय सहायता की रफ्तार महामारी की गति से पीछे है। पूर्वी कांगो में सक्रिय लगभग 100 अर्धसैनिक समूहों के कारण स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और आवाजाही बाधित हो रही है, और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहयोग में आई कमी ने स्थिति को और विकट बना दिया है।
आगे की राह क्षेत्रीय सहयोग और तत्काल संसाधन जुटाने की मांग करती है। डब्ल्यूएचओ ने युगांडा की प्रतिक्रिया की सराहना की है, लेकिन सीमापार आवाजाही को देखते हुए निरंतर सतर्कता अपरिहार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए टीका और उपचार विकसित करने में हो रही देरी भविष्य के लिए बड़ा जोखिम है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह प्रकोप एक बार फिर याद दिलाता है कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहती; हवाई अड्डों पर मजबूत निगरानी, त्वरित जांच क्षमता और क्षेत्रीय सहयोग में निवेश ही अगली महामारी की चपेट में आने से बचा सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जब दुनिया कांगो में इबोला के प्रकोप पर नज़र रख रही है, नाइजीरिया के स्थानीय मीडिया ने पठार राज्य में हैजा के प्रकोप पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई और 11 संक्रमित हुए। स्वास्थ्य अधिकारी रोकथाम के उपाय तेज़ कर रहे हैं, जो वैश्विक स्वास्थ्य अलार्म से अलग एक व्यावहारिक, स्थानीय-केंद्रित प्रतिक्रिया दर्शाता है।
डीआरसी में इबोला के मामले बढ़कर लगभग 800 हो गए हैं, जो दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के कारण है जिसके लिए कोई स्वीकृत टीका या उपचार नहीं है, जिससे चिंता बढ़ गई है। आधिकारिक आंकड़ों को कम आंका गया माना जा रहा है क्योंकि पता लगाने में देरी हुई और संपर्क अनुरेखण 56 प्रतिशत तक गिर गया, जो कमजोर प्रतिक्रिया और अनियंत्रित प्रसार के खतरे का संकेत है।
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