
कीव के हज़ार साल पुराने गुफा मठ पर हमले के बाद बहाली में दो साल लगेंगे, यूनेस्को ने जताई चिंता
रूसी हमले में क्षतिग्रस्त यूक्रेन के ऐतिहासिक पेचेर्स्क लावरा के डॉर्मिशन कैथेड्रल की मरम्मत में भारी लागत और लंबा समय लगने का अनुमान है, जबकि मॉस्को ने आरोपों को खारिज कर यूक्रेनी मिसाइल को जिम्मेदार ठहराया है।
कीव स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पेचेर्स्क लावरा, जिसे गुफा मठ भी कहा जाता है, पर 15 जून की रात रूसी हमले के दौरान आग लगने से ऐतिहासिक डॉर्मिशन कैथेड्रल की छत और आंतरिक भाग को गंभीर क्षति पहुंची। मठ परिसर के प्रमुख मैक्सिम ओस्तापेंको के अनुसार, प्रारंभिक आकलन में बहाली पर लगभग 500 मिलियन ह्रिवनिया (करीब 105 मिलियन स्वीडिश क्रोनोर) का खर्च आएगा और पूर्ण मरम्मत में दो साल तक लग सकते हैं। यह हमला यूक्रेन की राजधानी पर रात भर चले ड्रोन और मिसाइल हमलों का हिस्सा था, जिसमें पूरे देश में कम से कम 11 नागरिकों की मौत हुई।
यह क्षति केवल भौतिक नहीं है; पेचेर्स्क लावरा पूर्वी स्लाव संस्कृति और रूढ़िवादी ईसाई धर्म का एक हज़ार साल पुराना केंद्र है, जो यूक्रेन और रूस दोनों के लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है। यूनेस्को ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कैथेड्रल और उससे सटे ऐतिहासिक ढांचों, जैसे लावरा के रक्षात्मक परिसर और इवान कुशनिक टॉवर, को हुए नुकसान की कड़ी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एजेंसी ने युद्ध में सांस्कृतिक विरासत पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। यूरोपीय संघ ने भी इस घटना पर चिंता जताई, जबकि जी-7 देशों ने रूस पर दबाव बढ़ाने की बात दोहराई।
हालांकि, इस हमले को लेकर अलग-अलग भौगोलिक दृष्टिकोणों से विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूसी ड्रोन ने सीधे मठ को निशाना बनाया, जबकि मॉस्को ने इसे सिरे से खारिज किया। रूसी पक्ष से जुड़े कुछ स्रोतों और फिनिश राजनेता अरमांडो मेमा ने दावा किया कि चर्च वास्तव में यूक्रेनी पैट्रियट मिसाइल की चपेट में आया, जो रूसी हमले को रोकने के प्रयास में भटक गई। मेमा ने इसे यूरोप द्वारा रूस को आक्रामक दिखाने की कोशिश करार दिया और कहा कि यूरोप अपने लोगों को संघर्ष में घसीटने के लिए झूठ बोल रहा है। यह बयान क्रेमलिन समर्थक मीडिया में प्रमुखता से उभरा, जो सूचना युद्ध की गहराई को दर्शाता है।
इतिहास के पन्नों में यह मठ भूकंप, आग और 13वीं सदी में बातू खान की सेना द्वारा विनाश झेल चुका है, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है जब सैन्य कार्रवाई से इसे नुकसान पहुंचा है। जनवरी 2026 में भी रूसी सेना की कार्रवाई से मठ को मामूली क्षति हुई थी, परंतु इस बार का हमला कहीं अधिक गंभीर है। विशेषज्ञों का मानना है कि बहाली में लगने वाला लंबा समय न केवल संरचनात्मक मरम्मत के लिए है, बल्कि प्राचीन भित्तिचित्रों और धार्मिक कलाकृतियों के संरक्षण के लिए भी आवश्यक होगा।
वैश्विक दक्षिण, विशेषकर भारत जैसे देशों के लिए यह घटना सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा पर गहरा प्रश्न खड़ा करती है। भारत ने स्वयं युद्ध क्षेत्रों में ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की वकालत की है, और यूनेस्को के साथ मिलकर काम करता रहा है। आगे का विश्लेषण बताता है कि युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, साझा सांस्कृतिक प्रतीकों का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल बढ़ेगा। बहाली का दो वर्षीय समयरेखा यूक्रेन की सांस्कृतिक लचीलापन की परीक्षा होगी, लेकिन यह संघर्ष विरासत के मूल्य पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने की तत्काल आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूसी हमले ने जानबूझकर डॉर्मिशन कैथेड्रल को निशाना बनाया, जो यूनेस्को विश्व धरोहर और रूढ़िवादी आस्था का हज़ार साल पुराना प्रतीक है। यह अपवित्रीकरण पुतिन की हताशा को उजागर करता है, जो राजनीतिक के साथ-साथ आध्यात्मिक आत्महत्या है। जीर्णोद्धार में कम से कम दो साल लगेंगे।
यूनेस्को ने कीव पर रूसी हमले के दौरान डॉर्मिशन कैथेड्रल को हुए नुकसान की निंदा की। एजेंसी ने चर्च के अंदर और बाहर तथा आसपास की ऐतिहासिक संरचनाओं को काफी क्षति की सूचना दी। मठ परिसर के जीर्णोद्धार में लगभग दो साल लग सकते हैं।
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