
डिजिटल युग में नियमन का नया चेहरा: नवाचार और विश्वास का संतुलन
मलेशिया के अंतरराष्ट्रीय नियामक सम्मेलन से लेकर वैश्विक रिपोर्टों तक, डिजिटल परिवर्तन अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि संस्थागत सुधार और मानव-केंद्रित नीतियों की मांग कर रहा है।
कुआलालंपुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नियामक सम्मेलन (आईआरसी 2026) ने एक स्पष्ट संकेत दिया कि डिजिटल नियमन अब केवल नियंत्रण का औजार नहीं, बल्कि निवेश और नवाचार को गति देने वाला उत्प्रेरक बन चुका है। मलेशियाई संचार एवं मल्टीमीडिया आयोग (एमसीएमसी) के वरिष्ठ सलाहकार दातुक जुरकरनैन मोहम्मद यासीन ने इसे 'नियामक सोच में बड़ा बदलाव' बताया, जहां नियमों को 'निवेश उत्पाद' के रूप में देखा जा रहा है। यह दृष्टिकोण उस वैश्विक चिंता से उपजा है जिसमें तीव्र तकनीकी बदलाव—विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग—पारंपरिक कानूनी ढाँचों को पीछे छोड़ रहे हैं। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की प्रतिनिधि सुल्यना अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि अब पूर्ण सामंजस्य के बजाय 'नियामक अंतर-संचालनीयता' पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसमें देश साझा सिद्धांतों पर सहमत होते हुए अपने कानूनों को बनाए रखते हैं।
इसी सप्ताह जारी विश्व बैंक और मलेशिया के डिजिटल मंत्रालय की संयुक्त रिपोर्ट 'बिल्डिंग मलेशियाज़ फ्यूचर गवर्नमेंट' ने सार्वजनिक क्षेत्र की डिजिटल तैयारी की जमीनी हकीकत उजागर की। 28 मंत्रालयों के 16,500 से अधिक सिविल सेवकों के सर्वेक्षण पर आधारित इस रिपोर्ट में पाया गया कि विभागीय अलगाव (साइलो मेंटैलिटी) और आँकड़ों के आदान-प्रदान में बाधाएँ सबसे बड़ी रुकावटें हैं। विश्व बैंक के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र विशेषज्ञ मार्को लारिज़ा ने स्पष्ट किया कि समस्या धन की कमी नहीं, बल्कि अंतर-एजेंसी सहयोग का अभाव है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 71 प्रतिशत कर्मचारी एआई प्रशिक्षण चाहते हैं, लेकिन केवल 52 प्रतिशत को ही यह मिल पाया है। डिजिटल मंत्री गोबिंद सिंह देव ने जोर देकर कहा कि अब बुनियादी ढाँचे से आगे बढ़कर संस्थाओं, मानव पूँजी और सुशासन को मजबूत करने की जरूरत है, अन्यथा तकनीक अपनाने में विफल रहने वाले कर्मचारी पहले विस्थापित होंगे।
वैश्विक दक्षिण के अन्य हिस्सों से भी मिलती-जुलती तस्वीर उभरती है। बांग्लादेश में ग्रामीणफोन और द डेली स्टार की गोलमेज चर्चा में बताया गया कि 78 प्रतिशत वैश्विक कंपनियाँ एआई का उपयोग कर रही हैं, लेकिन वहाँ के 90 प्रतिशत युवा इसका इस्तेमाल केवल मनोरंजन के लिए करते हैं। घाना में एक्सेस बैंक ने युवा उद्यमियों को चेतावनी दी कि एआई न अपनाने वाले व्यवसाय पीछे छूट जाएँगे। अर्जेंटीना के क्लारिन अखबार ने डिजिटल भेद्यता को सभी आयु वर्गों के लिए समान खतरा बताया, जहाँ बुजुर्ग वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं तो किशोर ग्रूमिंग और डीपफेक का सामना कर रहे हैं। ब्राजील के वैलोर इकोनॉमिको ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आँकड़ों के विखंडन को रेखांकित किया, जहाँ 92 प्रतिशत संस्थान इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखते हैं लेकिन केवल 44 प्रतिशत प्रणालियाँ आपस में संवाद कर पाती हैं।
इन चुनौतियों के बीच, नियामक 'सैंडबॉक्स' एक उभरता हुआ समाधान बनकर सामने आया है। मलेशिया, ब्राजील और अन्य देशों में इस मॉडल पर चर्चा हो रही है, जिसमें नई तकनीकों को नियंत्रित वातावरण में परीक्षण के बाद ही व्यापक रूप से अपनाया जाता है। एमसीएमसी ने बताया कि 2022 से अब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से 12.16 लाख से अधिक हानिकारक सामग्री हटाने के अनुरोध किए गए, जिनमें से 11.38 लाख सामग्री वास्तव में हटाई गईं—2024 की तुलना में 2025 में ऐसे अनुरोधों में 57 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उप संचार मंत्री टियो नी चिंग ने कहा कि भरोसा अगले डिजिटल युग की परिभाषित चुनौती है और बाल सुरक्षा को प्लेटफॉर्मों के डिजाइन में ही शामिल किया जाना चाहिए।
अगला ठोस कदम आसियान डिजिटल अर्थव्यवस्था रूपरेखा समझौते (डीईएफए) का कार्यान्वयन होगा, जो सीमापार डेटा प्रवाह के लिए साझा मानक तय करेगा। मलेशिया सरकार ने गवर्नमेंट टेक रिपोर्ट की सिफारिशों को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें माईडिजिटल आईडी और एकीकृत डिजिटल सेवा गेटवे (माईगव) को केंद्र में रखा गया है। यह सब इस बात की ओर इशारा करता है कि डिजिटल भविष्य अब केवल आविष्कारों से नहीं, बल्कि इस बात से आकार लेगा कि नवाचार का शासन कैसे होता है और वह किसकी सेवा करता है।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.50 | aligned |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.40 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
Malaysia takes the lead in global digital governance, building trust through cooperative rules and investments in talent and infrastructure.
The bloc cites concrete initiatives (IRC 2026, GovTech) and authoritative statements to craft a narrative of controlled progress and partnership.
It omits the digital risks and vulnerabilities highlighted in other blocs, such as online scams and algorithmic discrimination.
Unchecked digitalisation creates new vulnerabilities: fragmented data and online scams threaten the most vulnerable.
The bloc uses concrete cases of patients and scam victims to shift the abstract debate onto an emotional and moral plane.
It leaves out the positive picture of regulatory cooperation and public investment that emerged from the Kuala Lumpur summit.
Artificial intelligence must not become a discriminatory filter, but neither should rules stifle innovation.
The bloc builds credibility by juxtaposing two extremes (tech overreach and regulatory overreach) and presenting itself as a moderate, rational voice.
It ignores the broader context of the Kuala Lumpur summit, which also addressed trust and global cooperation.
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