
चीन ने 20 जापानी संस्थाओं पर निर्यात प्रतिबंध लगाया, ताइवान तनाव के बीच सैन्य क्षमता पर रोक का दावा
बीजिंग ने दोहरे उपयोग की वस्तुओं के निर्यात पर रोक लगाते हुए कहा कि यह कदम जापान के 'नए सैन्यवाद' को रोकने के लिए है, जबकि टोक्यो ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने 29 जून को 20 जापानी संस्थाओं को निर्यात नियंत्रण सूची में शामिल कर दोहरे उपयोग (सैन्य और असैन्य) वाली वस्तुओं की आपूर्ति पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया। इस सूची में रक्षा अनुसंधान संस्थान, मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज और मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक की कई सहायक कंपनियाँ शामिल हैं। साथ ही, 20 अन्य जापानी कंपनियों को एक निगरानी सूची में डाला गया है, जिनके लिए निर्यातकों को विशेष लाइसेंस, जोखिम आकलन रिपोर्ट और लिखित गारंटी देनी होगी कि आपूर्ति की गई सामग्री सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं होगी।
बीजिंग के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा और अप्रसार दायित्वों को पूरा करने के लिए उठाया गया है, और इसका उद्देश्य जापान के 'नए सैन्यवाद' की ओर बढ़ने पर रोक लगाना है। दूसरी ओर, जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने इसे 'पूरी तरह अस्वीकार्य और अत्यंत खेदजनक' बताते हुए औपचारिक विरोध दर्ज कराया और प्रतिबंधों को तत्काल वापस लेने की माँग की। टोक्यो ने कहा है कि वह इन उपायों के प्रभावों की समीक्षा कर रहा है और आवश्यक कदम उठाएगा।
यह प्रतिबंध उन संस्थाओं पर केंद्रित हैं जो जापान के रक्षा क्षेत्र को घटक और इंजीनियरिंग सहायता प्रदान करती हैं, जैसे राष्ट्रीय रक्षा अध्ययन संस्थान और मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज। दोहरे उपयोग की वस्तुओं में दुर्लभ मृदा धातुएँ शामिल हैं, जिनका वैश्विक उत्पादन और शोधन में चीन का दबदबा है। यह फरवरी के बाद दूसरा दौर है, जब चीन ने 40 जापानी कंपनियों और संस्थानों पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाए थे। यह कड़ा रुख पिछले नवंबर में जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने ताइवान संकट को जापान के लिए 'अस्तित्व का खतरा' बताया था। इसके जवाब में चीन ने जापान के लिए उड़ानें रद्द करने, समुद्री भोजन का आयात रोकने और सैन्य जहाज भेजने जैसे दबावकारी कदम उठाए थे।
चीन ने पिछले सप्ताह अमेरिका की 10 कंपनियों, जिनमें दुर्लभ मृदा उत्पादक भी शामिल हैं, को भी इसी निर्यात नियंत्रण सूची में डाला था। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध का प्रभाव सीमित है, लेकिन जापान के मामले में आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता के कारण वास्तविक असर हो सकता है। जापान सरकार प्रभावित संस्थाओं पर पड़ने वाले व्यावहारिक प्रभावों का आकलन कर रही है और संभावित जवाबी कदमों पर विचार कर रही है। दिसंबर तक जापान की रक्षा नीति में संशोधन की संभावना को देखते हुए, यह मामला आगे भी तनावपूर्ण बना रह सकता है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| जापानी-कोरियाई प्रेस | −0.50 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.20 | neutral |
Europe frames the event as a normal market phenomenon: Chinese competition and the Middle East crisis explain the drop in Japanese sales.
By turning a political sanction into an economic data point, the conflict is neutralized and taking sides is avoided.
The blacklist of 20 Japanese organizations imposed by China is not mentioned, nor the context of trade retaliation.
Japan denounces the arbitrariness of Chinese sanctions and calls for a firm reaction to protect its economy.
By emphasizing the injustice suffered and the vulnerability of businesses, public opinion is mobilized and a counteroffensive is legitimized.
Russia justifies China's measures as necessary to counter Japanese and Western provocations.
By presenting the Chinese action as defensive and proportionate, the choice is legitimized and Russia aligns itself with Beijing's position.
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