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विश्व कप 2026: जर्मनी-स्वीडन की गोल बौछार, जापान ने नीदरलैंड को बराबरी पर रोका

ग्रुप ई और एफ के शुरुआती मुकाबलों में जर्मनी ने कुराकाओ को 7-1 से रौंदा, स्वीडन ने ट्यूनीशिया को 5-1 से हराया, जबकि जापान ने नीदरलैंड के खिलाफ 2-2 की ड्रॉ खेलकर एशियाई ताकत का परचम लहराया।

विश्व कप 2026 के चौथे दिन यूरोपीय दिग्गजों ने जोरदार प्रदर्शन किया, लेकिन असली सुर्खियां एशिया से आईं। जर्मनी ने ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में डेब्यूटेंट कुराकाओ को 7-1 से कुचलते हुए 2014 के उस ऐतिहासिक स्कोरलाइन की याद ताजा कर दी, जब ब्राजील के खिलाफ सेमीफाइनल में यही अंतर देखने को मिला था। फेलिक्स नमेचा के शुरुआती गोल के बाद कुराकाओ ने लिवानो कोमेनेन्सिया के जरिए बराबरी कर ली, जो टीम का विश्व कप इतिहास का पहला गोल बना, लेकिन इसके बाद जर्मनी ने काई हैवर्ट्ज, जमाल मुसियाला और निकलास फुलक्रुग जैसे सितारों की मदद से लगातार हमले किए और स्कोर को एकतरफा बना दिया। इस जीत ने जर्मनी को ग्रुप ई में शीर्ष पर पहुंचा दिया, जहां पेंटी आइवरी कोस्ट ने इक्वाडोर को 1-0 से हराकर तीन अंकों के साथ दूसरा स्थान हासिल किया।

दूसरी ओर, ग्रुप एफ में स्वीडन ने मॉन्टेरी के बीबीवीए स्टेडियम में ट्यूनीशिया को 5-1 से ध्वस्त कर अपनी दावेदारी पेश की। विक्टर ग्योकेरेस की अगुआई वाली आक्रामक पंक्ति ने शुरू से ही दबदबा बनाया और टीम को प्लस चार के गोल अंतर के साथ तालिका में सबसे ऊपर खड़ा कर दिया। यह प्रदर्शन स्कैंडिनेवियाई टीम के लिए नॉकआउट की राह आसान करने वाला साबित हो सकता है।

हालांकि, दिन का सबसे चर्चित मुकाबला डलास में खेला गया, जहां जापान ने नीदरलैंड को 2-2 की रोमांचक बराबरी पर रोककर ‘काला घोड़ा’ वाली भविष्यवाणी को सच कर दिखाया। सामुराई ब्लू ने दो बार पिछड़ने के बाद वापसी की और यूरोपीय टीमों के खिलाफ लगातार दस मैचों में अजेय रहने का रिकॉर्ड बढ़ाया। जापानी प्रशंसकों ने भी स्टेडियम में जबरदस्त माहौल बनाया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने खूब तारीफ की। इस ड्रॉ ने नीदरलैंड को दबाव में डाल दिया है; डच टीम को अगले मुकाबलों में जीत की सख्त जरूरत होगी, वरना बड़े टूर्नामेंट से जल्दी विदाई का खतरा मंडरा सकता है।

ग्रुप ई में पेंटी आइवरी कोस्ट ने इक्वाडोर के खिलाफ फिलाडेल्फिया में 1-0 की नाटकीय जीत दर्ज की, जिससे अफ्रीकी टीम ने जर्मनी के साथ कदम मिला लिया है। इक्वाडोर और कुराकाओ बिना अंक के निचले पायदान पर हैं। कुल मिलाकर, चौथे दिन चार मैचों में लगभग पांच गोल प्रति गेम की औसत रही और टूर्नामेंट में अब तक कोई गोलरहित ड्रॉ नहीं हुआ है।

आगे की राह देखें तो जर्मनी और स्वीडन के लिए गोल अंतर बड़ी पूंजी बन चुका है, जबकि जापान ने यह साबित किया कि एशियाई फुटबॉल अब केवल बचाव तक सीमित नहीं है। नीदरलैंड को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा, और ट्यूनीशिया जैसी टीमों के लिए अगला मैच करो या मरो जैसा होगा। दक्षिण एशियाई संदर्भ में देखें तो यह प्रदर्शन इस बात की याद दिलाता है कि संरचनात्मक निवेश और धैर्य के बिना विश्व मंच पर बड़ी छलांग संभव नहीं है, लेकिन जापान की कहानी भारत जैसे देशों के लिए प्रेरणा जरूर बन सकती है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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स्वीडन की बर्फबारी और जापान द्वारा नीदरलैंड को जमाने से विश्व कप की श्रेणीबद्धता बदल गई। जापान, जिसे एक डार्क हॉर्स माना जा रहा था, ने डचों को 2-2 पर रोक दिया, जबकि स्वीडन ने ट्यूनीशिया को 5-1 से कुचल दिया। जर्मनी ने भी 7-1 की जीत का जश्न मनाया, लेकिन एशियाई नज़र जापान के उदय पर टिकी है।

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जर्मनी ने 7-1 की पुनरावृत्ति की, इस बार कुराकाओ के खिलाफ, ऐसे दिन जब गोलों की बरसात ने 2014 के ब्राज़ील के खिलाफ सेमीफाइनल की याद ताज़ा कर दी। स्वीडन ने भी गोल उत्सव में भाग लिया, ट्यूनीशिया को 5-1 से कुचला। जर्मन परिणाम, एक साधारण जीत से बढ़कर, एक ऐतिहासिक गूंज बन गया।

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