
पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को हराकर विश्व कप 2026 में रचा इतिहास
चार बार के विश्व चैंपियन जर्मनी को पहली बार विश्व कप पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा, जबकि पैराग्वे ने 1-1 की बराबरी के बाद 4-3 से जीत दर्ज कर अंतिम-16 में जगह बनाई।
फॉक्सबरो के जिलेट स्टेडियम में सोमवार रात जोस कानाले ने छठे पेनल्टी प्रयास पर गेंद को मैनुअल न्यूअर के पास से निकालते ही पैराग्वे के खिलाड़ी ढेर हो गए। यह वह क्षण था जब चार बार के विश्व विजेता जर्मनी को विश्व कप इतिहास में पहली बार पेनल्टी शूटआउट में हार झेलनी पड़ी। गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने काई हैवर्ट्ज और निक वोल्टेमेड के प्रयासों को रोककर मैच का रुख पलट दिया, जबकि जर्मन डिफेंडर जोनाथन ताह ने अपनी किक को क्रॉसबार के ऊपर से मारा। पैराग्वे ने 4-3 से शूटआउट जीतकर 16वें दौर में प्रवेश किया, जहां उसका सामना फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा।
मैच का नियमित समय 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ था। पहले हाफ के 42वें मिनट में जूलियो एनसिसो ने मटियास गलार्जा के क्रॉस पर शानदार हेडर से पैराग्वे को बढ़त दिलाई। जर्मनी ने दूसरे हाफ की शुरुआत में ही पलटवार किया और 54वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के क्रॉस पर हैवर्ट्ज ने हेडर से बराबरी का गोल दागा। इसके बाद जर्मनी ने लगातार दबदबा बनाए रखा, लेकिन पैराग्वे की रक्षापंक्ति ने अनुशासित खेल दिखाया। अतिरिक्त समय में ताह ने हेडर से गोल कर जर्मनी को जीत की खुशी दिलाई, लेकिन वीएआर समीक्षा के बाद रेफरी ने वाल्डेमर एंटन द्वारा गिल को धक्का देने के कारण गोल रद्द कर दिया। यह निर्णय पूरे मैच का सबसे विवादित क्षण बना रहा।
यह हार जर्मनी के लिए लगातार तीसरे विश्व कप में जल्दी बाहर होने का सिलसिला बन गई। 2014 में खिताब जीतने के बाद से टीम 2018 और 2022 में ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाई थी, और अब 32वें दौर में ही सफर समाप्त हो गया। कप्तान जोशुआ किमिच ने मैच के बाद कहा, “हम किसी भी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ अच्छा नहीं खेले। हम पूरी तरह से बाहर होने के हकदार थे।” जर्मन मीडिया ने कोच जूलियन नागल्समैन की रणनीति और चयन पर सवाल उठाए, जबकि पूर्व लिवरपूल प्रबंधक युर्गन क्लॉप ने वीएआर निर्णय की कड़ी आलोचना की। दूसरी ओर, दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने इसे पैराग्वे की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई।
पैराग्वे के कोच गुस्तावो अल्फारो ने टीम के अनुशासन और त्याग की सराहना करते हुए कहा, “खिलाड़ियों ने मैच की जरूरतों को पूरी तरह समझा और जर्मनी को जगह नहीं बनाने दी।” गोलकीपर गिल ने इस जीत को पूरे पैराग्वे को समर्पित किया। यह पैराग्वे का विश्व कप नॉकआउट मैच में केवल दूसरी जीत है; इससे पहले 2010 में उन्होंने जापान को पेनल्टी पर हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। अब टीम 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया में होने वाले अंतिम-16 मुकाबले में फ्रांस या स्वीडन से भिड़ेगी, जबकि जर्मनी को एक और निराशाजनक विश्व कप अभियान के बाद घर लौटना पड़ा।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.80 | aligned |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.50 | critical |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
पैराग्वे लैटिन अमेरिकी लचीलापन का प्रतीक बनकर खड़ा है, जो एक गिरती हुई यूरोपीय शक्ति को अपमानित करता है।
कहानी राष्ट्रीय पहचान और ऐतिहासिक बदले पर जोर देती है, एक मैच को सामूहिक मुक्ति के महाकाव्य में बदल देती है।
जर्मनी एक मृत अंत में है: हार केवल एक गहरी, प्रणालीगत बीमारी का लक्षण है।
कहानी एक अलग लेकिन आलोचनात्मक स्वर अपनाती है, डेटा और मिसालों का उपयोग करके घटना को एक पृथक घटना के बजाय संरचनात्मक गिरावट के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करती है।
परिणाम एक तथ्य है: पैराग्वे जीतता है, जर्मनी हारता है, बिना किसी अतिरिक्त व्याख्या के।
कहानी किसी भी निर्णय या संदर्भीकरण से बचती है, घटना को व्यापक अर्थों से रहित एक साधारण खेल समाचार के रूप में प्रस्तुत करती है।
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