
ईरानी फुटबॉलर का अमेरिकी वीज़ा संकट सुलझा, फीफा के हस्तक्षेप से मिली बहु-प्रवेश अनुमति
विश्व कप के पहले मैच के बाद एकल-प्रवेश वीज़ा समाप्त होने से उपजी कूटनीतिक उलझन के बाद मेहदी तोराबी को अब शेष टूर्नामेंट के लिए अमेरिका आने-जाने की छूट मिल गई है।
ईरानी राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के फॉरवर्ड मेहदी तोराबी को मंगलवार शाम अमेरिका के लिए बहु-प्रवेश वीज़ा जारी कर दिया गया, जिससे विश्व कप 2026 में उनकी भागीदारी का रास्ता साफ हो गया। ईरानी फुटबॉल महासंघ (एफएफआईआरआई) ने एक बयान में कहा कि फीफा के साथ समन्वय और महासंघ के निरंतर प्रयासों के बाद यह नया वीज़ा हासिल हुआ। इसके साथ ही तोराबी अब बेल्जियम के खिलाफ 21 जून को लॉस एंजिल्स के सोफी स्टेडियम में होने वाले अगले ग्रुप मुकाबले और उसके बाद सिएटल में तीसरे मैच के लिए बिना किसी रुकावट के अमेरिका में प्रवेश कर सकेंगे।
यह संकट सोमवार रात को उस समय शुरू हुआ जब ईरान ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेलने के बाद मैक्सिको के सीमावर्ती शहर तिजुआना स्थित अपने टूर्नामेंट बेस पर वापसी की। टीम के अधिकांश खिलाड़ियों और स्टाफ के पास बहु-प्रवेश वीज़ा थे, लेकिन तोराबी को केवल एकल-प्रवेश की अनुमति दी गई थी, जो अमेरिकी सीमा से बाहर निकलते ही समाप्त हो गई। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस विसंगति को तुरंत उजागर किया। ईरानी टीम की यह अनोखी लॉजिस्टिक व्यवस्था—मैक्सिको में रहकर अमेरिका में मैच खेलना—दोनों देशों के बीच गहरे राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में की गई थी, ताकि खिलाड़ियों को लंबे समय तक अमेरिकी धरती पर रहने से बचाया जा सके।
शुरुआती रिपोर्टों में बताया गया कि एफएफआईआरआई दूसरे मैच से पहले नया वीज़ा दिलाने की कोशिशों में जुटी है, और कुछ ही घंटों में यह समस्या सुलझ गई। ब्राज़ील, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और मैक्सिको सहित विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के मीडिया आउटलेट्स ने इस घटनाक्रम को कवर किया, जो वैश्विक खेल आयोजनों में वीज़ा नीतियों की संवेदनशीलता को रेखांकित करता है। फीफा के हस्तक्षेप ने संभवतः अमेरिकी अधिकारियों के साथ संवाद को आसान बनाया, जिससे यह मामला कूटनीतिक गतिरोध बनने से बच गया। तोराबी भले ही न्यूज़ीलैंड के खिलाफ बेंच पर रहे, लेकिन बेल्जियम जैसी मजबूत टीम के सामने उनकी उपलब्धता ईरान के लिए अहम हो सकती है।
यह प्रकरण अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की बढ़ती जटिलता को दर्शाता है, खासकर जब मेज़बान देश और भाग लेने वाले देशों के बीच राजनीतिक संबंध तनावपूर्ण हों। दक्षिण एशिया के संदर्भ में देखें तो पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान जैसे देशों की टीमों को भविष्य में अमेरिका या अन्य पश्चिमी देशों में होने वाले बड़े टूर्नामेंटों में इसी तरह की वीज़ा बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ईरान का मामला एक मिसाल बन सकता है कि किस तरह खेल महासंघ और फीफा जैसी वैश्विक संस्थाएं प्रशासनिक अड़चनों को पार करने में मददगार साबित होती हैं। तोराबी का वीज़ा मिलना यह भी सुनिश्चित करता है कि ईरानी टीम अब पूरी तरह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी, और विश्व कप के बाकी मुकाबलों में कोई प्रशासनिक व्यवधान नहीं आएगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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तोराबी के वीज़ा का तमाशा: एकल प्रवेश की अनुमति समाप्त होने के बाद, ईरानी महासंघ ने नौकरशाही बाधा की निंदा की। समन्वित प्रयासों के बाद, खिलाड़ी को नया बहु-प्रवेश वीज़ा मिला और विश्व कप में उसकी भागीदारी सुनिश्चित हुई।
ईरानी फॉरवर्ड तोराबी को अमेरिका का वीज़ा मिल गया है जिससे वह बाकी विश्व कप खेल सकेंगे। शुरू में केवल एकल प्रवेश की अनुमति थी, लेकिन महासंघ के प्रयासों और फीफा के साथ समन्वय से नया बहु-प्रवेश वीज़ा जारी किया गया।
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