
ओबामा की चेतावनी: ईरान युद्ध के बाद अमेरिका 'बदतर', ट्रंप का समझौता पुरानी डील से भिन्न
पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि युद्धविराम के बावजूद अमेरिका पहले से खराब स्थिति में पहुंच सकता है; ट्रंप प्रशासन का 60-दिवसीय समझौता ज्ञापन परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत प्रतिबंधों से रहित है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने शुक्रवार को एनबीसी न्यूज़ से कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने वाले मौजूदा समझौते के बाद अमेरिका संभवतः 'थोड़ा बदतर' स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने युद्ध की मूल तर्कसंगति पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा 2015 के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) से हटने के कारण ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता बढ़ाई, और अब अरबों डॉलर खर्च करने, भारी सैन्य दबाव झेलने तथा अनेक लोगों की जान जाने के बाद अमेरिका वहीं लौट आया है जहां युद्ध से पहले था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को वर्साय में ईरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जो 60 दिनों की युद्धविराम अवधि और स्थायी समझौते के लिए बातचीत की रूपरेखा तय करता है।
विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं इस समझौते पर गहरे मतभेद दर्शाती हैं। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, यह समझौता ओबामा युग के 'भयावह' जेसीपीओए से बेहतर है, और ट्रंप ने ओबामा पर रिश्वत के माध्यम से समझौता करने का आरोप लगाया। वहीं, इज़राइली मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों ने समझौते की आलोचना की, जिस पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इज़राइल की समस्या अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं। यूरोपीय परिषद ने इस ज्ञापन का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अवसर बताया और इसके कार्यान्वयन में सहयोग की तैयारी जताई। ईरानी पक्ष के लिए यह समझौता तत्काल तेल निर्यात की अनुमति और अरबों डॉलर की जब्त संपत्तियों को मुक्त करने का मार्ग खोलता है, जिसकी उसकी कमज़ोर अर्थव्यवस्था को सख्त आवश्यकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, दोनों समझौतों की संरचना में बुनियादी अंतर है। जेसीपीओए 160 पृष्ठों का विस्तृत दस्तावेज़ था, जिसमें ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर कठोर सीमाएं, व्यापक अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण प्रणाली और चरणबद्ध प्रतिबंध राहत शामिल थी। वालोर इकोनॉमिको की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का एमओयू मात्र डेढ़ पृष्ठ और 14 बिंदुओं का है, जिसमें ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की सामान्य प्रतिबद्धता दोहराई है, लेकिन संवर्धित यूरेनियम के भंडार को पतला करने या निगरानी व्यवस्था जैसे ठोस कदमों को अंतिम समझौते पर छोड़ दिया गया है। समझौते में अमेरिका और मध्य पूर्वी सहयोगियों द्वारा 300 अरब डॉलर के विकास कोष के प्रस्ताव का भी उल्लेख है, हालांकि इसकी समयसीमा स्पष्ट नहीं है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ने अब तक कम पाया और तेहरान को अधिक रियायतें दी हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब 2018 में ट्रंप के जेसीपीओए से हटने और प्रतिबंध दोबारा लगाने के बाद ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम तेज़ कर दिया था, जिसे फरवरी में शुरू हुए युद्ध का प्रमुख कारण बताया गया। भारत, जो ईरान के साथ ऊर्जा और व्यापारिक संबंध रखता है और परमाणु अप्रसार के साथ शांतिपूर्ण उपयोग के सिद्धांत का समर्थन करता है, क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों पर नज़र रखे हुए है। अब 60 दिनों की वार्ता में स्थायी समझौते पर सहमति बनाने का प्रयास होगा, जिसमें परमाणु कार्यक्रम की सीमा, प्रतिबंध राहत और होर्मुज़ जलडमरूमध्य का भविष्य जैसे मुद्दे सुलझाने बाकी हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ओबामा ने चेतावनी दी कि ईरान युद्ध के बाद अमेरिका की स्थिति पहले से भी बदतर हो सकती है, भारी वित्तीय और मानवीय क्षति का हवाला देते हुए, और यह सवाल उठाया कि क्या युद्धविराम समझौता वास्तव में संघर्ष से पहले की तुलना में स्थिति सुधारता है। कथा सेना पर पड़े दबाव और एक ऐसे यथास्थिति की ओर लौटने पर जोर देती है जो शायद और भी अनिश्चित हो।
ओबामा ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच युद्धविराम पर खुशी जताई और उम्मीद जताई कि यह स्थायी होगा, साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका युद्ध से पहले की तुलना में बदतर स्थिति में हो सकता है। ईरानी कवरेज पूर्व राष्ट्रपति की शत्रुता समाप्त होने पर राहत और उनके सतर्क आशावाद को उजागर करती है।
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