
टेक दिग्गजों की 50 अरब डॉलर कर बचत, एआई नौकरियों का दोहरा चेहरा और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं
अल्फाबेट, अमेज़न और मेटा ने पिछले साल 49.7 अरब डॉलर कर बचाए जबकि एआई पर 250 अरब डॉलर खर्च किए, वहीं नए अध्ययन बताते हैं कि एआई अपनाने वाली कंपनियाँ नौकरियाँ बढ़ा रही हैं लेकिन युवा स्नातकों पर दबाव बढ़ रहा है।
क्लाइमेट एंड कम्युनिटी इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अल्फाबेट, अमेज़न और मेटा ने 2025 में 49.7 अरब डॉलर का कर भुगतान टाला, जबकि इन्हीं कंपनियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सेंटरों पर 250 अरब डॉलर खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अमेरिकी प्रशासन सक्रिय रूप से डेटा सेंटरों के प्रसार को सुगम बना रहा है, जिससे एआई अवसंरचना का विस्तार तो हो रहा है लेकिन इसकी सामाजिक लागत पर सवाल उठ रहे हैं।
इसके विपरीत, रैम्प और रेवेलियो लैब्स द्वारा 22,000 अमेरिकी कंपनियों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि सर्वाधिक एआई खर्च करने वाली कंपनियों ने प्रौद्योगिकी अपनाने के बाद अपने कर्मचारियों की संख्या में लगभग 10.2 प्रतिशत की वृद्धि की, जिसमें प्रवेश-स्तर की नियुक्तियाँ 12 प्रतिशत बढ़ीं। हालाँकि यह वृद्धि मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में केंद्रित रही और बड़ी, वेंचर-समर्थित कंपनियों तक सीमित दिखी। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में हाल ही में स्नातक हुए युवाओं में बेरोज़गारी दर बढ़ रही है, जिसके लिए विश्लेषक एआई को एक प्रमुख कारण मान रहे हैं। चीन में भी युवा स्नातकों की बेरोज़गारी कई वर्षों से ऊँचाई पर है।
अफ्रीका और लैटिन अमेरिका इस बदलाव को अवसर में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। घाना ने 2025-2035 की राष्ट्रीय एआई रणनीति लॉन्च की, जिसके तहत 2033 तक 10,000 मध्य-से-वरिष्ठ एआई शोधकर्ता और दस लाख एआई-तैयार युवा तैयार करने का लक्ष्य है, साथ ही स्थानीय भाषाओं के लिए प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण केंद्र बनाने पर ज़ोर दिया गया है। कोलंबिया में डिजिटल उत्पादों का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है और देश स्वयं को स्पैनिश भाषी ज्ञान अर्थव्यवस्था के निर्यातक के रूप में स्थापित कर रहा है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत में भी इसी तरह की महत्वाकांक्षाएँ हैं, जहाँ विशाल युवा आबादी के लिए एआई सृजनकर्ता बनने बनाम उपभोक्ता बने रहने का प्रश्न केंद्रीय है।
कॉर्पोरेट जगत में एक नई सोच उभर रही है। कान फिल्म महोत्सव में विपणन नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एआई उत्पादकता बढ़ाकर मानवीय निर्णय, रुचि और रणनीतिक सोच के लिए समय मुक्त कर रहा है। ऑटोडेस्क की मुख्य विपणन अधिकारी ने इसे “उत्कृष्ट रुचि वाले विपणकों का स्वर्ण युग” बताया। ब्राज़ील के एक सर्वेक्षण में सामने आया कि 55.6 प्रतिशत कंपनियाँ एआई का सबसे अधिक उपयोग सामग्री निर्माण के लिए कर रही हैं, लेकिन तकनीकी परिपक्वता का स्तर अभी भी असमान है।
आगे की राह में घाना के एआई कोष का क्रियान्वयन, यूरोपीय सेंट्रल बैंक की एआई के आर्थिक प्रभाव पर निगरानी और युवा बेरोज़गारी से निपटने के लिए ठोस नीतिगत कदम देखने को मिलेंगे। क्लाइमेट एंड कम्युनिटी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट ने सरकारी सब्सिडी की पारदर्शिता पर भी ध्यान खींचा है, जिससे कर नीति और एआई अवसंरचना के बीच संतुलन की बहस आगे बढ़ेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Companies investing heavily in AI are not cutting jobs but hiring faster than their peers, including for entry-level positions. However, field research shows that AI changes work patterns in unexpected ways, expanding tasks and blurring time boundaries, so the picture is more complex than simple job destruction.
Artificial intelligence is arriving much faster than anticipated, raising urgent questions about which professions will remain relevant in five years. While new AI-related jobs are emerging as the backbone of future industry, millions of workers face uncertainty as machines take on tasks once thought exclusively human.
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