
गाज़ा सहायता कार्यकर्ताओं पर कथित अत्याचार, UNRWA विवाद और ऑस्ट्रेलियाई पुलिस की आलोचना
ऑस्ट्रेलिया इज़रायली बलों पर कार्यकर्ताओं के यौन उत्पीड़न की जांच कर रहा है, जबकि कनाडा ने UNRWA को नई धनराशि दी और घरेलू पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे।
ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (AFP) ने इज़रायली बलों पर गंभीर आरोपों की जांच शुरू कर दी है, जिसमें गाज़ा को मानवीय सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहे कार्यकर्ताओं के साथ बलात्कार और यातना के कृत्य शामिल हैं। ग्लोबल सुमुद फ़्लोटिला अभियान में शामिल ऑस्ट्रेलियाई नागरिक एथन फ्लॉयड ने बताया कि उन्हें पूरी तरह निर्वस्त्र कर तलाशी के दौरान एक सैनिक ने डिजिटल रेप किया और इज़रायली झंडा चूमने से इनकार करने पर पीटा गया। चार महिला कार्यकर्ताओं ने विदेश मंत्री पेनी वोंग से मुलाकात के बाद यह मामला उठाया, जिसके बाद AFP ने जांच के आदेश दिए। इज़रायली दूतावास ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है और अभी तक औपचारिक शिकायत नहीं मिली है। 18 मई को गाज़ा जा रहे इस बेड़े को रोके जाने के दौरान ग्यारह ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
इस बीच, कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने गाज़ा और वेस्ट बैंक के लिए अतिरिक्त 100 मिलियन डॉलर की सहायता की घोषणा की, जिससे फ़लस्तीनी क्षेत्रों को कुल धनराशि 500 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई। यह निर्णय ऐसे समय आया जब संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNRWA ने हमास आतंकवादियों से कथित गहरे संबंधों के आरोप में अपने 70 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। आलोचकों का कहना है कि यह धनराशि अप्रत्यक्ष रूप से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है, लेकिन कनाडा सरकार ने रेड क्रॉस और गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से मानवीय सहायता पहुंचाने पर जोर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया के भीतर भी पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। न्यू साउथ वेल्स (NSW) पुलिस की उस समय कड़ी आलोचना हुई जब जनवरी 2023 में एक महिला की पिटाई की ट्रिपल ज़ीरो कॉल के बावजूद अधिकारी अपनी गाड़ियों से बाहर नहीं निकले और लगभग छह घंटे बाद पीड़िता का शव मिला। एक अलग घटना में, वोलोंगोंग में फ़लस्तीन समर्थक प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी द्वारा एक महिला को धक्का देकर गिराने का वीडियो सामने आया, जिसकी NSW पुलिस समीक्षा कर रही है। ये मामले घरेलू स्तर पर पुलिस आचरण और नागरिक अधिकारों की रक्षा को लेकर बहस को और तेज़ करते हैं।
ये घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर राज्य प्राधिकारों की जवाबदेही के संकट को उजागर करते हैं। ऑस्ट्रेलिया को एक ओर अपने नागरिकों के साथ विदेशी धरती पर हुए कथित अत्याचारों के लिए इज़रायल से जवाब मांगना है, वहीं दूसरी ओर अपनी पुलिस बलों में सुधार की आंतरिक मांग भी झेलनी है। कनाडा का UNRWA को वित्तपोषण अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता में पारदर्शिता और आतंकवाद-रोधी सतर्कता के बीच संतुलन का कठिन प्रश्न खड़ा करता है। आगे की राह में AFP की जांच के नतीजे, इज़रायल की प्रतिक्रिया और NSW पुलिस की आंतरिक समीक्षा यह तय करेंगे कि पीड़ितों को न्याय मिलता है या संस्थागत विफलताएं एक बार फिर अनुत्तरित रह जाती हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पश्चिमी सरकारों पर गहरे विरोधाभासों का आरोप है: वे हमास से कथित रूप से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र एजेंसी को वित्त पोषित कर रही हैं, जबकि दूसरी ओर इज़राइली बलों द्वारा दुर्व्यवहार की जांच कर रही हैं। यह पाखंड स्पष्ट है—एक ओर आतंकवादी संबंधों को नज़रअंदाज़ करना, दूसरी ओर उनसे लड़ने वालों की निंदा करना। परिणामस्वरूप एक असंगत विदेश नीति पश्चिमी विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है।
ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने इज़राइली सैनिकों द्वारा मानवीय कार्यकर्ताओं के साथ बलात्कार और यातना के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। यह जांच कार्यकर्ताओं और विदेश मंत्री के बीच बैठक के बाद शुरू हुई, जो गाज़ा की नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने के प्रयास के दौरान की घटनाओं पर केंद्रित है।