
इज़राइल के खिलाफ लेबनान की UN में शिकायत: ग्लाइफोसेट और सेना पर हमला
दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती गांवों में जानबूझकर रासायनिक खरपतवारनाशी के छिड़काव और सैन्य काफिले पर हमले के बाद बेरूत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है।
लेबनान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को घोषणा की कि उसने इज़राइल के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासचिव के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत दो अलग-अलग घटनाओं पर आधारित है: पहली, फरवरी 2026 में दक्षिणी लेबनान के गांवों पर रासायनिक खरपतवारनाशी ‘ग्लाइफोसेट’ का छिड़काव, और दूसरी, 6 जून 2026 को एक सैन्य वाहन पर हमला जिसमें दो अधिकारी और एक सैनिक शहीद हुए। मंत्रालय ने बताया कि यह शिकायत राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें मिट्टी के नमूनों के प्रयोगशाला विश्लेषण से इन आरोपों की पुष्टि हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली सेना ने 1 फरवरी 2026 को अइता अल-शाब, रास नकूरा और अल-जहीरा गांवों में जानबूझकर ग्लाइफोसेट का छिड़काव किया। जांच में इन स्थानों की मिट्टी में ग्लाइफोसेट की सांद्रता 22.750 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम तक मिली, जबकि सामान्य कृषि उपयोग के बाद यह मात्रा अधिकतम 0.5 से 2 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम होती है। यह रासायनिक हथियार संधि (सीडब्ल्यूसी) का स्पष्ट उल्लंघन है, जो युद्ध के साधन के रूप में खरपतवारनाशियों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाती है। लेबनान ने इसे नागरिकों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया है।
दूसरी शिकायत 6 जून की घटना से जुड़ी है, जब इज़राइली बलों ने दक्षिणी लेबनान में काफर तिबनीत-अल खरदली मार्ग पर सेना के एक बख्तरबंद वाहन को निशाना बनाया। इस हमले में एक ब्रिगेडियर जनरल, एक कप्तान और एक सैनिक की मौत हो गई। लेबनानी विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई क्षेत्र में राजनयिक प्रयासों को कमजोर कर रही है और स्थायी संघर्षविराम की संभावनाओं को धूमिल कर रही है।
ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुए जब मार्च 2026 में इज़राइल और हिज़बुल्लाह के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ने से पहले ही सीमा तनाव चरम पर था। संयुक्त राष्ट्र में दर्ज यह शिकायत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इज़राइल को जवाबदेह ठहराने की कवायद मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक खरपतवारनाशियों का सैन्य उपयोग वैश्विक प्रतिबंधों के बावजूद बढ़ रहा है, जो दक्षिण एशिया जैसे संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी चेतावनी है। अब तक संयुक्त राष्ट्र की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संभव है कि यह मामला सुरक्षा परिषद में पश्चिमी और अरब गुटों के बीच राजनीतिक खींचतान को जन्म दे।
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