
G7 में ट्रंप-ज़ेलेंस्की की 'बहुत अच्छी' बैठक, रूस पर दबाव बढ़ाने का संकल्प
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध समाप्त करने का वादा किया, G7 नेताओं ने रूस के ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों पर नए प्रतिबंधों पर सहमति जताई।
फ्रांस के एवियां-ले-बैं में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के बीच हुई मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति को एक नई दिशा दी। ट्रंप ने बैठक को 'बहुत अच्छा' बताते हुए कहा कि रूस को यूक्रेन के साथ शांति समझौता करना चाहिए और वे युद्ध समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्धों का समाधान कराया है, लेकिन यह संघर्ष उनकी अपेक्षा से अधिक जटिल साबित हुआ। G7 नेताओं ने एक स्वर में यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अटूट समर्थन दोहराया और रूस पर दबाव बढ़ाने पर सहमति जताई।
यूरोपीय नेतृत्व ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि कोई भी शांति समझौता 'ठोस और गंभीर' होना चाहिए। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मेर्ट्ज़ ने रूस के ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाने की योजना का समर्थन किया, ताकि मॉस्को की युद्ध मशीनरी को कमजोर किया जा सके। ज़ेलेंस्की ने बैठक में रूसी हमलों से क्षतिग्रस्त कीव के ऐतिहासिक कैथेड्रल की तस्वीरें दिखाकर युद्ध की वास्तविकता को रेखांकित किया। यह माहौल पिछले वर्ष ओवल ऑफिस की उस मुलाकात से बिल्कुल अलग था, जब ट्रंप ने ज़ेलेंस्की को बातचीत में कोई लाभ न होने की बात कही थी। अब यूरोपीय सहयोगी यह संदेश देने में सफल रहे कि यूक्रेन की ड्रोन क्षमताओं और युद्धक्षेत्र में हालिया बढ़त ने स्थिति बदल दी है।
वैश्विक दृष्टि से देखें तो यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए महत्वपूर्ण है। भारत रूस का एक प्रमुख ऊर्जा साझेदार है और यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होता है। G7 के नए प्रतिबंधों से रूसी तेल और गैस की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारत जैसे बड़े आयातकों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख करना पड़ सकता है। रूसी सरकारी मीडिया TASS ने यूक्रेनी ड्रोन हमले को अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया, जो संघर्ष की तीव्रता को दर्शाता है। ऐसे में भारत की कूटनीतिक संतुलन साधने की नीति—जहाँ वह रूस के साथ संबंध बनाए रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ भी जुड़ाव चाहता है—और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
आगे की राह आशावादी पर अनिश्चित है। ट्रंप के बयानों से शांति वार्ता की संभावना बढ़ी है, लेकिन रूस अभी भी किसी समझौते के लिए तैयार नहीं दिखता। G7 का बढ़ता दबाव मॉस्को को बातचीत की मेज पर ला सकता है, परंतु युद्ध की जटिलताएँ—जैसे क्षेत्रीय दावे और सुरक्षा गारंटी—आसानी से सुलझने वाली नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी मध्यस्थता से कोई ढाँचा बन सकता है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों की ओर से लचीलेपन की आवश्यकता होगी। फिलहाल, G7 का एकजुट रुख यह संकेत देता है कि पश्चिमी शक्तियाँ यूक्रेन को कमजोर पड़ने नहीं देंगी, और यह युद्ध का रुख मोड़ने वाला क्षण साबित हो सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एवियन में एकत्र हुए G7 नेताओं ने यूक्रेन के समर्थन और मास्को पर दबाव को नई गति दी। ट्रंप ने कहा कि रूस को समझौता करना होगा और वे शांति के लिए हर संभव प्रयास करेंगे, जबकि ज़ापोरिज्जिया पर रूसी रात्रि हमले में एक की मौत और सात घायल हुए, जिससे स्थिति की तात्कालिकता रेखांकित हुई। गठबंधन कीव के प्रति अटूट समर्थन में एकजुट है।
फ्रांस में बैठक कर रहे G7 ने यूक्रेन के साथ एकजुटता दिखाई और ऊर्जा तथा वित्त पर नए प्रतिबंधों के माध्यम से रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने पर सहमति बनी। ट्रंप ने ज़ेलेंस्की के साथ अपनी मुलाकात को 'बहुत अच्छा' बताया और युद्ध समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करने का वादा किया, जबकि नेताओं ने मास्को को गंभीर वार्ता के लिए मजबूर करने हेतु रुख संरेखित किया।
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