
होर्मुज जलडमरूमध्य में यूरोपीय नौसैनिक मिशन तैयार, मैक्रों ने G7 शिखर सम्मेलन में दी जानकारी
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में इटली-नीदरलैंड समेत यूरोपीय बेड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की आज़ादी सुनिश्चित करने के लिए तैनात होगा।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को G7 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होते ही फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक मिशन होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इटली, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय सहयोगी भी इस अभियान में शामिल होंगे। फ्रांसीसी विमानवाहक पोत 'चार्ल्स डी गॉल' अपने सहायक युद्धपोतों के साथ दो से तीन दिनों के भीतर जलडमरूमध्य तक पहुँच सकता है, जबकि निगरानी विमान और युद्धपोत मंगलवार से ही सक्रिय किए जा सकते हैं। मैक्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मिशन अमेरिका, ईरान और ओमान के अनुरोध पर ही शुरू होगा।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलना, जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार के पारगमन शुल्क को रोकना है। मैक्रों ने ज़ोर देकर कहा कि जलडमरूमध्य से गुज़रने पर कोई भी शुल्क अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा और पश्चिमी देश ऐसा नहीं होने देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि ओमान ने इस अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार, इस नौसैनिक बेड़े में खदान हटाने और जहाज़ों को एस्कॉर्ट करने की क्षमता शामिल होगी, जिससे व्यापारिक मार्ग पर लंबे समय से बना तनाव कम हो सके।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच 15 जून की रात को शांति समझौते की रूपरेखा तय हुई और 19 जून को जिनेवा में एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस समझौते में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने का प्रावधान है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने इससे पहले कहा था कि ज्ञापन के पाठ में कुछ बारीक बिंदु हैं, हालांकि मैक्रों ने अपने बयान में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को निष्क्रिय करने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में लाने की शर्त भी रखी। ईरानी मीडिया ने इसे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताया, लेकिन यूरोपीय पक्ष इसे स्थायी शांति के लिए ज़रूरी मानता है।
ऊर्जा बाज़ारों पर निर्भरता को देखते हुए मैक्रों ने कहा कि G7 देश खाड़ी के सहयोगियों के साथ मिलकर होर्मुज से इतर वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति मार्ग विकसित करने पर काम करेंगे। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए यह पहल अहम है, क्योंकि उनकी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुज़रता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है और यूरोपीय नौसैनिक मिशन सक्रिय होता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों की सहमति और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना अनिवार्य होगा।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त नौवहन सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय नौसैनिक मिशन अमेरिका-ईरान शांति समझौते के कुछ दिनों के भीतर तैनात होने को तैयार है, जिसका नेतृत्व फ्रांस और ब्रिटेन कर रहे हैं। ओमान ने अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति का विरोध न करने का संकेत दिया है, जबकि पेरिस इस बात पर जोर दे रहा है कि रास्ता किसी भी शुल्क से मुक्त होना चाहिए। इस पुनः उद्घाटन को क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है।
यूरोपीय संघ हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक नौसैनिक अभियान अमेरिका-ईरान शांति समझौते के दो से तीन दिनों के भीतर बहुत तेज़ी से शुरू करने के लिए तैयार है, जिसका नेतृत्व फ्रांस और ब्रिटेन करेंगे और इटली व नीदरलैंड का समर्थन होगा। राष्ट्रपति मैक्रों के अनुसार एक प्रमुख लक्ष्य व्यापारिक जहाज़ों से किसी भी प्रकार के पारगमन शुल्क को रोकना है। यह घोषणा टेलीविजन साक्षात्कार में की गई, जो यूरोपीय पहल की तत्परता को रेखांकित करती है।
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